- भाजपा ने अपने नए राज्य प्रभारियों को सलाह दी है कि वे दिल्ली में कम समय बिताएं और राज्य पर ध्यान केंद्रित करें
- नेतृत्व ने कहा है कि बार-बार दिल्ली आने के बजाय प्रभारियों को अपने संबंधित राज्यों में जुटना चाहिए
- प्रभारियों को व्यक्तिगत कार्यों से अधिक पार्टी हितों को प्राथमिकता देकर बूथ स्तर तक काम का निर्देश दिया गया
भाजपा ने अपने नए बने राज्य प्रभारियों को सलाह दी है कि वे दिल्ली में कम वक्त गुजारें. उन्हें जो काम दिया गया है, उस पर फोकस करें और जमीन पर संगठन को मजबूत करने में जुट जाएं. शीर्ष नेतृत्व की ओर से स्पष्ट नसीहत है कि बार-बार दिल्ली के चक्कर लगाने से ज्यादा अच्छा यह होगा कि वे अपने संबंधित राज्य में संगठन को मजबूत करें. पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को संगठन की मीटिंग के दौरान यह बात कही. इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारी भी शामिल थे. इसके अलावा संगठन महामंत्री बीएल संतोष, सह-संगठन महामंत्री शिव प्रकाश और सौदान सिंह भी मौजूद थे.
सूत्रों के अनुसार नए बने प्रभारियों से कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी वाले राज्य में ज्यादा वक्त गुजारें. संगठन को मजबूती दें और बार-बार दिल्ली आने से परहेज करें. इन लोगों से कहा गया है कि अपने निजी कामों से ज्यादा पार्टी के हितों को प्राथमिकता दें और संबंधित राज्यों में संगठन की मजबूती के लिए समय दें. नेतृत्व का मानना है कि इससे प्रभारियों को राज्यों में पकड़ बनाने में मदद मिलेगी और वहां के कामकाज संगठन और रीति-नीति को समझ सकेंगे. इस बैठक में यह भी कहा गया कि हर मीटिंग से पहले स्पष्ट एजेंडा रखा जाए. इसके अलावा यह भी समीक्षा हो कि पहले तय किए गए लक्ष्यों में से कितने हासिल किए गए.
यूपी, ओडिशा, बिहार और बंगाल समेत देश के सभी राज्यों और यूटी के प्रभारियों का भाजपा ने ऐलान किया है. इसके अलावा सह-प्रभारी भी तैनात किए गए हैं. भाजपा नेतृत्व ने अब इन लोगों से कहा है कि वे बूथ लेवल पर संगठन को मजबूत करें. कार्यकर्ताओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखें. इसके अलावा जिन राज्यों में चुनाव है, वहां ज्यादा से ज्यादा दौरे करने को कहा गया. संगठन में जमीनी स्तर तक पकड़ रखने और सब चीजों का आकलन करने को भी कहा गया. नेतृत्व की ओर से यह नसीहत भी दी गई कि महिलाओं और युवाओं के बीच संवाद बढ़ाएं.
भाजपा लीडरशिप की ओर से कहा गया है कि महिलाओं और युवाओं के बीच पार्टी की पैठ मजबूत करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करें. इसके अलावा युवा वर्ग के बीच पार्टी को लेकर क्या राय है. इसके बारे में फीडबैक भी दिल्ली तक भेजते रहें. इस मीटिंग में यह चर्चा भी हुई कि कैसे केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से चलाई गई योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी दी जाए. पुराने और आजकल थोड़े निष्क्रिय हुए कार्यकर्ताओं को भी फिर से एक्टिव होने को कहा गया है. लीडरशिप ने इसके लिए स्पष्ट संदेश दिया कि बार-बार दिल्ली न आएं. इसकी बजाय जिन राज्यों की जिम्मेदारी मिली है वहां के दौरे करें और वहां संगठन के लोगों से मिलें.
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