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BJP में आने वाले बिहार के दो MLC बंशीधर और राहुल राज पर मचा बवाल, सदस्यता पर तलवार; क्या कहता है दलबदल कानून

दलबदल कानून के तहत निर्दलीय उम्मीदवार अगर किसी दल की सदस्यता ग्रहण करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. आइए जानते हैं पूरी डिटेल...

BJP में आने वाले बिहार के दो MLC बंशीधर और राहुल राज पर मचा बवाल, सदस्यता पर तलवार; क्या कहता है दलबदल कानून
  • MLC की आठ सीटों में से दो निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर बृजवासी और राहुल राज ने भाजपा का समर्थन स्वीकार किया है
  • आरजेडी और जनसुराज ने विधान परिषद के सभापति से दोनों नेताओं की सदस्यता रद्द करने की याचिका दायर की है
  • दसवीं अनुसूची के तहत निर्दलीय सदस्य द्वारा राजनीतिक दल की सदस्यता लेने पर उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सकता है
पटना:

बिहार में 8 विधान परिषद सीटों पर चुने गए उम्मीदवारों में से 2 नेताओं बंशीधर बृजवासी और राहुल राज ने भाजपा का दामन थाम लिया है. इसे लेकर विवाद छिड़ गया है. लालू प्रसाद यादव की आरजेडी और प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने इसकी शिकायत सभापति से की है और उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग की है. ऐसी ही दलील आरजेडी ने भी दी है और सभापति का रुख किया है. आज जन सुराज का प्रतिनिधिमंडल बिहार विधान परिषद पहुंचा और सभापति रामबचन राय को याचिका सौंपकर दोनों निर्दलीय एमएलसी बंशीधर बृजवासी और राहुल राज की सदस्यता रद्द करने की मांग की.

जन सुराज के प्रतिनिधिमंडल ने सवाल उठाया कि निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में कैसे शामिल हो सकते हैं, प्रतिनिधिमंडल ने दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए दोनों एमएलसी के खिलाफ सबूत भी सभापति को सौंपे. इसके अलावा आरजेडी की ओर से परिषद में पार्टी के मुख्य सचेतक अब्दुल बारी सिद्दीकी ने विधान परिषद के सभापति को याचिका सौंपी है. उन्होंने याचिका में सदस्यता रसीद और दोनों के बयानों को शामिल किया है. आइए जानते हैं, दलबदल कानून के तहत इनके खिलाफ क्या एक्शन हो सकता है...

दलबदल कानून के तहत निर्दलीय उम्मीदवार अगर किसी दल की सदस्यता ग्रहण करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. संविधान की दसवीं अनुसूची, पैरा 2(2) निर्दलीय निर्वाचित सदस्य के पार्टी में शामिल होने पर निर्वाचित सदस्य को अयोग्य घोषित किया जा सकता है. इसके अलावा अनुच्छेद 191(2) दसवीं अनुसूची के तहत सदस्यता समाप्त होने का संवैधानिक आधार भी है. दसवीं अनुसूची, पैरा 6(1) अयोग्यता पर फैसला लेने का अधिकार विधान परिषद के सभापति को प्राप्त है. वह व्यक्ति सरकार या किसी पार्टी को बाहर से समर्थन दे सकता है या मंत्री पद की शपथ ले सकता है, लेकिन कागजी और आधिकारिक तौर पर उस दल का सदस्य नहीं बन सकता.

मिजोरम के मौजूदा सीएम को भी लगा था झटका

इसी के तहत 2020 का एक मामला उल्लेखनीय है. मिजोरम के पूर्व IPS अधिकारी और वर्तमान मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 'सर्चिप' सीट से निर्दलीय के रूप में जीत हासिल की थी. चुनाव जीतने के बाद उन्होंने खुद को आधिकारिक तौर पर 'जोराम पीपुल्स मूवमेंट' (ZPM) पार्टी का सदस्य बताया और उसके कार्यक्रमों की अगुवाई की. सत्तारूढ़ MNF पार्टी की शिकायत पर मिजोरम विधानसभा अध्यक्ष ने 27 नवंबर 2020 को संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता रद्द कर दी.

नागालैंड के विधायक की रद्द हुई थी सदस्यता

ऐसा ही एक मामला 2008 का भी है. नागालैंड के निर्दलीय विधायक इमकोंग इमचेन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 17 जनवरी 2008 को महत्वपूर्ण फैसला दिया था. इमचेन पर चुनाव जीतने के बाद एक राजनीतिक दल में शामिल होने का आरोप था और विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें अयोग्य घोषित किया था. सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्यता के फैसले को बरकरार रखा. अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्दलीय विधायक का किसी दल को बाहर से समर्थन देना और उस दल की सदस्यता ग्रहण करना अलग-अलग बातें हैं.

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