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'बारूद के ढेर' पर बैठा है भोपाल! रिहायशी इलाके में चल रहीं 122 आरा मशीनें, एक चिंगारी और सब तबाह

भोपाल रिहायशी इलाकों में चल रही 122 आरा मशीनों से खतरे की जद में है. टनों लकड़ी का बुरादा, ज्वलनशील केमिकल और बिना फायर एनओसी का यह टिम्बर मार्केट किसी भी वक्त बड़े हादसे की वजह बन सकता है. बार‑बार आग लगने के बावजूद डेढ़ साल से शिफ्टिंग अधर में लटकी है.

'बारूद के ढेर' पर बैठा है भोपाल! रिहायशी इलाके में चल रहीं 122 आरा मशीनें, एक चिंगारी और सब तबाह
  • भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में 122 आरा मशीनें बिना फायर एनओसी के चल रही हैं, जिससे आग का बड़ा खतरा बना हुआ है.
  • टिम्बर मार्केट में टनों लकड़ी और ज्वलनशील केमिकल जमा हैं, जो किसी भी वक्त विस्फोटक स्थिति पैदा कर सकते हैं.
  • मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत आरा मशीनों को बाहर शिफ्ट करने की योजना 1.5 साल से अधूरी पड़ी है, कोई ठोस कदम नहीं हुआ.
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Bhopal Fire Risk 2026: भोपाल शहर एक बड़े खतरे की जद में खड़ा नजर आ रहा है. रिहायशी इलाकों के बीच वर्षों से चल रही 122 आरा मशीनें किसी भी वक्त बड़े हादसे की वजह बन सकती हैं. मेट्रो प्रोजेक्ट को कारण बताया जा रहा है, लेकिन असल चिंता वह आग का खतरा है जो चंद पलों में पूरे इलाके को तबाह कर सकता है. टनों की मात्रा में जमा लकड़ी का बुरादा, ज्वलनशील केमिकल और बिना फायर एनओसी के यह टिम्बर मार्केट शहर को बारूद के ढेर पर बैठाए हुए है. 

हाल ही में हुए हादसों ने बड़े हादसे की चेतावनी भी दी है, लेकिन प्रशासन अभी भी इसे शिफ्ट करने की कवायद में गंभीर नजर नहीं आ रहा है. इन मशीनों को शिफ्ट करने की बात डेढ़ साल से चल रही है, जमीन और करोड़ों रुपये भी दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक नतीजा शून्य है.

जहांगीराबाद की गलियों में फायर ट्रैप

जहांगीराबाद इलाके की तंग गलियों में आरा मशीनें धड़ल्ले से चल रही हैं. चारों तरफ घर, स्कूल और अस्पताल मौजूद हैं, और ठीक उनके बीच में सूखी लकड़ी व बुरादे के ढेर लगे हैं. फायर एक्सपर्ट्स इसे ‘सॉलिड पेट्रोल' कहते हैं. उनका मानना है कि यह पूरा इलाका फायर ट्रैप बन चुका है, जहां एक छोटी‑सी चिंगारी भी विनाश का कारण बन सकती है.

मेट्रो के बहाने शिफ्टिंग की कवायद

मेट्रो की ऑरेंज लाइन के बहाने प्रशासन ने इन आरा मशीनों को शहर से बाहर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की थी. करीब दो साल पहले नोटिस भी जारी कर दिए गए थे, लेकिन शिफ्टिंग अब तक शुरू नहीं हो पाई. इस बीच जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है.

बार‑बार भड़क चुकी है आग

बीते समय में आरा मशीनों में कटिंग के बाद रखी लकड़ियों के स्टॉक में कई बार आग लग चुकी है. हर बार आग इतनी भीषण रही कि आसपास के कई किलोमीटर तक लोगों में दहशत फैल गई. दमकल विभाग को आग पर काबू पाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. इन घटनाओं के बावजूद हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ.

हाल ही में फिर धधका टिम्बर मार्केट

10 मई को फिर भोपाल के बीचोंबीच स्थित टिम्बर मार्केट में आग लग गई. बरखेड़ी ऑटो स्टैंड के पास एक लकड़ी की दुकान में लगी आग की लपटें करीब 20 फीट तक ऊपर उठ गईं. दुकान के ठीक पीछे रेलवे ट्रैक है, जहां से ट्रेनें गुजरती रहीं. तेज हवा के कारण आग पर करीब डेढ़ घंटे बाद काबू पाया जा सका. इससे पहले दिसंबर 2025 में भी यहां आग लग चुकी है.

कलेक्टर ने कहा- जल्द होगी शिफ्टिंग

भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा का कहना है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है और आरा मशीनों को जल्द ही शिफ्ट किया जाएगा. इसके लिए 18 एकड़ जमीन और करीब 5.85 करोड़ रुपये पहले ही दिए जा चुके हैं. हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि टिम्बर मार्केट अब भी वहीं है.

संचालकों की परेशानी और दलील

टिम्बर एसोसिएशन के अध्यक्ष बदर आलम का कहना है कि भोपाल पहले ही गैस त्रासदी जैसी भयावह घटना झेल चुका है. ऐसे में शहर के बीचोंबीच मौजूद टिम्बर मार्केट एक और बड़े हादसे को न्योता दे रहा है. आरा मशीन संचालकों का तर्क है कि उन्हें 30 किलोमीटर दूर परवलिया सड़क के छोटा रातीबड़ में शिफ्ट किया जा रहा है, जहां उनके व्यवसाय के टिकने की संभावना कम है. उनका कहना है कि वे यहां 48 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं.

नोटिस आते रहे, हालात जस के तस

अब तक कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं. तीन‑तीन कलेक्टर अपना कार्यकाल पूरा कर बदल चुके हैं, लेकिन टिम्बर मार्केट का ठिकाना नहीं बदला. कवायद अब भी जारी है, लेकिन यह सिर्फ शहर के विकास का नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जान से जुड़ा मसला है. सवाल यही है कि प्रशासन कार्रवाई कब करेगा?  

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