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भोपाल मेट्रो पर बवाल; कब्रिस्तान के नीचे अंडरग्राउंड लाइन का विरोध, वक्फ तक पहुंच मामला

Bhopal Metro Controversy: भोपाल में मेट्रो अंडरग्राउंड लाइन कब्रिस्तान व वक्फ भूमि के नीचे प्रस्तावित है. मुस्लिम संगठनों का विरोध, मामला वक्फ अधिकरण पहुंचा. पढ़िए पूरी खबर.

भोपाल मेट्रो पर बवाल; कब्रिस्तान के नीचे अंडरग्राउंड लाइन का विरोध, वक्फ तक पहुंच मामला
भोपाल मेट्रो को लेकर कब्रिस्तान और वक्फ भूमि पर विवाद

Bhopal Metro Controversy: राजधानी भोपाल में बहुप्रतीक्षित मेट्रो परियोजना अब एक नए और संवेदनशील विवाद में घिर गई है. भोपाल टॉकीज क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक बड़ा बाग कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा की वक्फ भूमि पर किए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर मुस्लिम समाज और वक्फ संस्थाओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. धार्मिक भावनाओं के उल्लंघन, बिना अनुमति निर्माण और वक्फ संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के साथ यह मामला अब सड़कों से होते हुए अदालत तक पहुंच गया है. विरोध-प्रदर्शन, राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी याचिकाओं के बीच यह विवाद गंभीर रूप लेता जा रहा है.

बड़ा बाग कब्रिस्तान से मेट्रो गुजरने पर आपत्ति

भोपाल टॉकीज क्षेत्र के बड़ा बाग कब्रिस्तान को लेकर विवाद उस वक्त गहराया जब सामने आया कि प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो कॉरिडोर का एक बड़ा हिस्सा इस कब्रिस्तान के नीचे से गुजरेगा. यह कब्रिस्तान शहर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक कब्रिस्तानों में गिना जाता है, जहां हजारों कब्रें मौजूद हैं. जैसे ही निर्माण की जानकारी सामने आई, मुस्लिम समाज में नाराजगी फैल गई.

मुस्लिम त्योहार कमेटी का प्रदर्शन

इस मुद्दे को लेकर बड़ा बाग कब्रिस्तान परिसर में प्रदर्शन शुरू हो गया है. मुस्लिम त्योहार कमेटी ने साफ कहा है कि किसी भी हाल में कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो लाइन नहीं गुजरने दी जाएगी. कमेटी के अध्यक्ष शमशुल हसन बल्ली ने आरोप लगाया कि यह परियोजना धार्मिक आस्थाओं के खिलाफ है और समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है.

Bhopal Metro Controversy: विरोध प्रदर्शन का दृश्य

Bhopal Metro Controversy: विरोध प्रदर्शन का दृश्य

पहले भी विवादों में रहा मेट्रो प्रोजेक्ट

भोपाल मेट्रो परियोजना पहले भी कई विवादों में घिर चुकी है. कभी विस्थापन को लेकर सवाल उठे, तो कभी निर्माण में देरी और लागत बढ़ने को लेकर आलोचना हुई. हालांकि इस बार मामला धार्मिक स्थल से जुड़ा होने के कारण ज्यादा संवेदनशील और जटिल हो गया है.

विधानसभा तक पहुंचा मामला

यह मुद्दा अब सियासी रंग भी ले चुका है. कांग्रेस विधायक आतिफ अकिल ने पूरे मामले को विधानसभा में उठाते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि वह लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है. इसके बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को निर्देश दिए कि विधायक की मौजूदगी में मौके का मुआयना किया जाए.

विधायक और मेट्रो अधिकारियों के बीच बहस

मौके पर कांग्रेस विधायक आतिफ अकिल और मेट्रो अधिकारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस भी हुई. विधायक ने रूट बदलने की मांग की, जबकि अधिकारी तकनीकी मजबूरियों और परियोजना की जरूरतों का हवाला देते रहे. मौके से विवाद का समाधान नहीं निकल सका.

कानूनी पचड़े में फंसा मामला

विवाद के बढ़ने के साथ ही मामला अब अदालतों तक पहुंच चुका है. पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तानों के नीचे अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन प्रस्तावित किए जाने को लेकर याचिकाएं दायर की गई हैं. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मेट्रो सुरंग निर्माण से करीब एक एकड़ क्षेत्र प्रभावित हो सकता है, जिससे कब्रों की संरचना और अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.

वक्फ बोर्ड ने भी जताई कड़ी आपत्ति

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने भी इस पूरे मामले पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है. वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल ने आरोप लगाया कि मेट्रो परियोजना के तहत बिना अनुमति वक्फ संपत्तियों पर निर्माण किया जा रहा है और यह सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है.

नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर निर्माण का आरोप

विवाद केवल बड़ा बाग कब्रिस्तान तक सीमित नहीं है. नारियलखेड़ा क्षेत्र में स्थित वक्फ निशात अफजा (वाके बाग) नामक संपत्ति पर भी बिना अधिग्रहण और अनुमति पिलर निर्माण और खुदाई का आरोप लगाया गया है. यह जमीन वक्फ रजिस्टर और राजपत्र में दर्ज बताई जा रही है.

वक्फ अधिकरण पहुंचा मामला

कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-आम्मा ने दोनों मामलों को लेकर मध्यप्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण का रुख किया है. याचिका में मांग की गई है कि मेट्रो निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए, अवैध पिलर हटाए जाएं, मलबा साफ कराया जाए और वक्फ भूमि की यथास्थिति बनाए रखी जाए.

प्रशासन और सरकार के सामने बड़ी चुनौती

अब यह पूरा मामला सरकार और अदालतों के पाले में है. जहां एक ओर सरकार मेट्रो परियोजना को शहर की जरूरत और विकास से जोड़कर देख रही है, वहीं वक्फ बोर्ड और मुस्लिम संगठनों का कहना है कि विकास के नाम पर धार्मिक और कानूनी अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती.

आगे क्या बदलेगा मेट्रो का रूट?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैकल्पिक रूट संभव नहीं हुआ तो परियोजना में देरी हो सकती है. आने वाले दिनों में अदालत के फैसले और सरकार के रुख पर यह तय होगा कि भोपाल मेट्रो परियोजना किस दिशा में आगे बढ़ती है.

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अजय शर्मा
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