Bengaluru News: बेंगलुरु के पास बनने वाली देश की पहली हाई-टेक एआई सिटी (India's First AI City) को लेकर बड़ा सियासी घमासान छिड़ा हुआ है. एक तरफ सरकार अपना ड्रीम प्रोजेक्ट (Bidadi Township Project) जल्द से जल्द शुरू करना चाहती है, तो दूसरी तरफ किसान अपनी जमीन बचाने के लिए पिछले 450 दिनों से धरने पर बैठे हैं. अब इस मामले में जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी (H. D. Kumaraswamy) ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (D. K. Shivakumar ) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
'बंद कमरे में नहीं, किसानों के सामने हो बात'
विवाद तब और गरमा गया जब सीएम शिवकुमार ने इस प्रोजेक्ट पर चर्चा के लिए कुमारस्वामी को 26 जून को विधानसभा में बुलाया. कुमारस्वामी ने वहां जाने से साफ इनकार कर दिया है. उन्होंने अपने पहले से तय कार्यक्रमों का हवाला देते हुए मीटिंग 27 जून को रखने को कहा है. कुमारस्वामी ने एक शर्त रखते हुए कहा कि 4-5 नेताओं के एसी कमरे में बैठकर बात करने का कोई मतलब नहीं है. मीटिंग बिदादी या बैरमंगला में होनी चाहिए, ताकि प्रभावित किसान भी इसमें शामिल हो सकें. उन्होंने सीएम को जवाब देते हुए कहा- 'आपने मुझे 5 लोगों की टीम के साथ बुलाया है, लेकिन मेरी कोई टीम नहीं है. मेरे साथ सिर्फ किसान हैं.'
क्या है यह मेगा प्रोजेक्ट और कितना बड़ा है?
इस प्रोजेक्ट का नाम ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) है. इसे भारत की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाली इंटीग्रेटेड टाउनशिप बताया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के लिए बिदादी के पास के 9 गांवों की कुल 7481 एकड़ जमीन ली जानी है.
किसान क्यों कर रहे हैं विरोध?
इस प्रोजेक्ट के खिलाफ 450 से ज्यादा दिनों से किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका कहना है कि जमीन ही उनकी आजीविका है और इसके छिनने से वे सड़क पर आ जाएंगे. हालांकि, सरकार बार-बार कह रही है कि 80 परसेंट किसान अपनी मर्जी से जमीन देने को तैयार हैं. जबकि, किसानों का दावा है कि 70-80 परसेंट लोग इस प्रोजेक्ट के सख्त खिलाफ हैं.

20 मई 2026 को डीके शिवकुमार ने GBIT के सिलसिले में बिदादी के किसानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी. उस वक्त वे कर्नाटक के डिप्टी सीएम थे.
Photo Credit: IANS
किसानों को मिलना शुरू हुआ मुआवजा
सरकार भारी विरोध के बावजूद इस प्रोजेक्ट को पूरी रफ्तार से आगे बढ़ा रही है. हाल ही में 3 गांवों की 499 एकड़ जमीन लेने का फाइनल नोटिस जारी कर दिया गया है. इसके अलावा, टाउनशिप का मास्टर प्लान और प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने के लिए 26 करोड़ रुपये का टेंडर भी निकल चुका है. जो किसान जमीन देने को राजी हो गए हैं, उन्हें सरकार ने पैसे बांटने शुरू कर दिए हैं. जमीन का रेट 2.30 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय किया गया है, साथ ही खेत में लगी फसल के अलग से पैसे मिल रहे हैं. केम्पैयानापाल्या गांव के सात किसानों को मुआवजे के पहले चेक दिए जा चुके हैं.
'खुद का विकास कर रही सरकार'
कुमारस्वामी ने साफ कर दिया है कि वे किसानों की पूरी मदद करेंगे और उनके हक के लिए कोर्ट तक भी जाएंगे. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार राज्य का नहीं, बल्कि खुद का विकास कर रही है. फिलहाल, कुमारस्वामी की चिट्ठी पर सीएम शिवकुमार ने सिर्फ इतना कहा है कि वे बाद में इस पर जवाब देंगे.
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