- बंगाल की सरकार ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी है
- मंत्री पदों पर चयनित पांच नेताओं ने बंगाल के विभिन्न प्रभावशाली सामाजिक समुदायों का प्रतिनिधित्व किया है
- बीजेपी ने ओबीसी, मतुआ, महिला, राजबंशी और आदिवासी समुदायों को मंत्रिमंडल में शामिल कर राजनीतिक संदेश दिया है
शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने अपने पहले राजनीतिक संदेश में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर खास जोर दिया है. मुख्यमंत्री के साथ शपथ लेने वाले पांच मंत्रियों का चुनाव सिर्फ राजनीतिक अनुभव के आधार पर नहीं, बल्कि बंगाल के अलग-अलग प्रभावशाली सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के तहत किया गया दिखाई दे रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह टीम भारतीय जनता पार्टी की "सबका साथ, सबका विश्वास" की नीति को बंगाल के सामाजिक समीकरणों के साथ जोड़ने की कोशिश है.
दिलीप घोष OBC समुदाय को मजबूत संदेश
नई कैबिनेट में दिलीप घोष (Dilip Ghosh) को शामिल कर बीजेपी ने ओबीसी समुदाय को मजबूत संदेश दिया है. दिलीप घोष लंबे समय से बंगाल बीजेपी का बड़ा चेहरा रहे हैं और ग्रामीण तथा हिंदुत्व समर्थक वोटरों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. ओबीसी समुदाय राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है और बीजेपी पिछले कुछ वर्षों से इस वर्ग में लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.

अशोक कीर्तनिया (मतुआ समुदाय)
अशोक कीर्तनिया (Ashok Kirtania) मतुआ समुदाय से आते हैं. मतुआ समुदाय पश्चिम बंगाल की लगभग 70 विधानसभा सीटों पर असर रखने वाला महत्वपूर्ण वोट बैंक माना जाता है. ऐसे में अशोक कीर्तनिया को मंत्रिमंडल में शामिल कर बीजेपी ने मतुआ समुदाय को बड़ा संदेश दिया है. नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के मुद्दे पर बीजेपी लंबे समय से इस समुदाय को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती रही है. अशोक कीर्तनिया का मंत्रिमंडल में शामिल होना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
अग्निमित्रा पॉल... महिला मतदाताओं के बीच प्रभावी चेहरा
महिला प्रतिनिधित्व और शहरी मध्यवर्गीय समाज को साधने के लिए अग्निमित्रा पॉल (Agnimitra Paul) को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. कायस्थ समुदाय से आने वालीं अग्निमित्रा पॉल बंगाल बीजेपी की फ्रायरब्रांड नेता हैं, जिनकी तुलना ममता बनर्जी से भी की जाती रही है. फैशन डिजाइनर से राजनीति में आईं अग्निमित्रा को पार्टी आधुनिक, शिक्षित और महिला मतदाताओं के बीच प्रभावी चेहरे के रूप में पेश करती रही है. शुभेंदु कैबिनेट में उनका शामिल होना महिला सशक्तिकरण और बंगाल के शहरी वर्ग को साधने की रणनीति माना जा रहा है.

निसिथ प्रमाणिक (राजबंशी)
उत्तर बंगाल के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए निसिथ प्रमाणिक (Nisith Pramanik) को जगह दी गई है. राजबंशी समुदाय उत्तर बंगाल की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है. बीजेपी पिछले चुनावों में उत्तर बंगाल में मजबूत प्रदर्शन कर चुकी है और पार्टी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है. निसिथ प्रमाणिक को मंत्री बनाकर बीजेपी ने यह संकेत दिया है कि उत्तर बंगाल उसकी राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा.
खुदीराम टुडू आदिवासी नेता
आदिवासी समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के लिए खुदीराम टुडू (Khudiram Tudu) को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. जंगलमहल और आदिवासी बहुल इलाकों में बीजेपी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से उभरी है. खुदीराम टुडू के जरिए पार्टी ने आदिवासी समाज को सत्ता में भागीदारी का संदेश देने की कोशिश की है.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. पश्चिम बंगाल में ब्राह्मण मतदाता कुल आबादी का लगभग 5% से 8% के आसपास मानी जाती है. हालांकि, यह समुदाय राज्य के कुल 70% हिंदू आबादी के अंतर्गत आता है और बंगाल की राजनीति में उच्च जाति के हिस्से के रूप में अत्यधिक प्रभावशाली है. पश्चिम बंगाल की राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल केवल प्रशासनिक टीम नहीं, बल्कि बंगाल के सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया राजनीतिक संदेश है. बीजेपी ने ब्राह्मण, ओबीसी, महिला, मतुआ, राजबंशी और आदिवासी समुदाय को प्रतिनिधित्व देकर यह दिखाने की कोशिश की है कि पार्टी राज्य के हर वर्ग को साथ लेकर चलना चाहती है.
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