- पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को तेज कर राहत मिली है
- राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को कुल 142.79 एकड़ जमीन सौंपकर सीमा पर बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लाई
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने और डिटेंशन सेंटर बनाने की नीति की प्रशंसा की है
पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार गठन के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था तेज कर दी है. इससे उत्तर बंगाल के उन गांवों में राहत का माहौल है, जो पहले मवेशी तस्करी और घुसपैठ के कारण काफी परेशान रहते थे. अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि बाड़ लगाने के काम में तेजी और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन सौंपे जाने से सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ा है. हालांकि, जमीन के मुआवजे, अपनी जमीन तक पहुंच और सीमा से गुजरने वाली नदी के इस्तेमाल से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं. एनडीटीवी की इस ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि अब सीमा से लगे इलाकों में कैसे हालात है.
बीएसएफ को कहां सौंपी गई सबसे ज्यादा जमीन
राज्य सरकार ने BSF चौकियों और सीमा पर बुनियादी ढांचे के निर्माण के प्रयास तेज कर दिए हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा साझा जानकारी के अनुसार कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर 24 परगना समेत कई जिलों में कुल 142.79 एकड़ जमीन BSF को सौंपी जा चुकी है. सबसे ज्यादा जमीन मुर्शिदाबाद में 38.805 एकड़ सौंपी गई है, इसके बाद जलपाईगुड़ी में 35.165 एकड़ और कूचबिहार में 22.95 एकड़ जमीन दी गई है.
बीएसएफ को 600 एकड़ जमीन सौंपने का लक्ष्य
राज्य सरकार का लक्ष्य कुल करीब 600 एकड़ जमीन सौंपने का है, जिसमें अब तक कई हिस्सों में बाड़ नहीं लगाई गई थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने बांग्लादेश सीमा को मजबूत करने का अपना वादा पूरा किया है. उन्होंने कहा, “हमने चुनाव के दौरान कहा था कि सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम शुरू किया जाएगा, चिकन नेक की 121 हेक्टेयर जमीन भी भारत सरकार को सौंप दी गई है. अब घुसपैठिए खुद ही वापस जा रहे हैं.”
‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' नीति पर अमल
अमित शाह ने ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' नीति का भी जिक्र किया और बताया कि संदिग्ध घुसपैठियों को रखने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाए गए हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सीमा से सटे जिलों में बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में फिलहाल 386 लोगों को रखा है. इनमें 182 पुरुष, 109 महिलाएं और 95 बच्चे शामिल हैं. सबसे ज्यादा लोग उत्तर 24 परगना के बसीरहाट पुलिस जिले में दर्ज किए गए हैं. यह कार्रवाई बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों के खिलाफ ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट' नीति के तहत की जा रही है.
सीमा सुरक्षा अभियान पर क्या कह रहे ग्रामीण
सीमा पर रहने वाले कई ग्रामीणों के लिए यह मुद्दा राजनीति से ज्यादा रोजमर्रा की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा है. गांव की निवासी सोभान देवी ने कहा कि पहले हालात बेहद ही खराब थे और रातभर जागकर बच्चों और घर की रखवाली करनी पड़ती थी. उन्होंने बताया, “पहले हम रात में सो नहीं पाते थे. बांग्लादेशी लोग मवेशी तस्करी करते थे और हथियार लेकर चलते थे. हम देश की सुरक्षा के लिए जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन उचित मुआवजा चाहिए. अगर BSF पक्की बाड़ लगाएगी तो हम सुरक्षित महसूस करेंगे.”
बाड़ लगने से खुश हैं गांव के लोग
कई अन्य ग्रामीणों ने भी यही कहा कि पिछले पांच साल में अस्थायी बाड़ से अवैध गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन स्थायी और ऊंची बाड़ से सुरक्षा और मजबूत होगी. अरविंदो सेन ने बताया कि पहले गांव से हर रात 100 से 200 मवेशी तस्करी के लिए ले जाए जाते थे. उन्होंने कहा, “हमने पुलिस से कई दफा शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब बाड़ लगने से राहत है. स्थायी बाड़ बनने से हम खुश हैं, लेकिन जमीन का सही माप होना चाहिए और काम जल्दी पूरा होना चाहिए.”
बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ की तारीफ
जमीन अधिग्रहण एक संवेदनशील मुद्दा बना रह सकता है. कई परिवार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपनी जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन वे उचित मुआवजा, पारदर्शी प्रक्रिया और पहले से परामर्श चाहते हैं. चांग्राबांधा के सेनपारा की बीना देवी ने बताया कि उनके परिवार की 18 बीघा पुश्तैनी जमीन वर्षों से उपयोग में नहीं है. उन्होंने कहा, “हम अपनी ही जमीन को बाड़ के पार से देखते हैं, जबकि बांग्लादेशी वहां मवेशी चराते हैं. ग्रामीणों को भरोसे में लिया जाना चाहिए और बाड़ को बांग्लादेश की ओर आगे बढ़ाया जाना चाहिए.”
ग्रामीणों ने BSF की चौबीसों घंटे तैनाती और सेवाओं की सराहना की है. उनका कहना है कि हाल में लगाए गए लाइट और CCTV जैसे निगरानी उपायों से भी उन्हें काफी फायदा हुआ है. उनका मानना है कि बाड़, BSF चौकियां और डिटेंशन व्यवस्था के संयोजन से जमीन पर हालात बदलने लगे हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं