- बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी 193 सीटों पर आगे चल रही है जबकि टीएमसी 95 सीटों पर लीड कर रही है
- बीजेपी ने सॉफ्ट हिंदुत्व और बंगाली भद्रलोकों को लुभाने के लिए व्यापक संपर्क अभियान चलाया
- ममता सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को बीजेपी ने चुनाव प्रचार में मुख्य मुद्दा बनाया
294 विधानसभा सीटों वाली बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग क्लियर हो चुके हैं. अब तक के रुझानों में बीजेपी 193 सीटों पर आगे चल रही है. पिछली बार बीजेपी को महज 77 सीटें मिली थीं. वहीं पिछले चुनाव में 214 सीटें जीतने वाली टीएमसी 95 सीटों पर लीड कर रही है. आखिर ऐसा हुआ कैसे? ये ठीक बात है कि ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी पिछले 15 सालों में सत्ता में थी, मगर अंत तक मुकाबला कांटे का लग रहा था. तो फिर बीजेपी ने वो कौन सी रणनीति अपनाई कि ममता के शासन का अंत हो गया?
हिंदुत्व से परिवर्तन तक, बंगाली जनता तक गहरी पहुंच
इस चुनाव में बीजेपी ने सॉफ्ट हिंदुत्व को आगे किया. अनुराग ठाकुर और अन्य बीजेपी नेता मछली खाते नजर आए. हिंदू मतदाता को पिछले पांच सालों से बीजेपी पहले ही जगाने का या कहें कि अपने पक्ष में करने का काम कर चुकी थी. चुनाव के दौरान बस इसे धार दी गई, लेकिन बस इतना कि मामला हिंदू बनाम मुस्लिम ना लगे. इसके साथ बंगाली भद्रलोक (पढ़े-लिखे और प्रतिष्ठित लोग) को अपने पक्ष में करने का अभियान चलाया गया. संपर्क अभियान चलाए गए. सुवेंदु अधिकारी जैसे नेताओं ने हिंदू वोटों को एकजुट किया तो सामिक भट्टाचार्य जैसे नेताओं ने भद्रलोक मतदाताओं को लुभाया. लोगों को समझाया कि बंगाल के विकास के लिए सरकार में परिवर्तन होना जरूरी है. इससे बंगाल में परिवर्तन की बयार चल पड़ी.

ममता सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर जोरदार आरोप
पीएम मोदी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और सभी बीजेपी नेताओं ने लगातार ममता सरकार पर भ्रष्ट होने के आरोप लगाए. 15 सालों से सरकार में रही टीएमसी नेताओं पर कई केस पहले से ही चल रहे थे और कई योजनाओं में गड़बड़ियां भी सामने आ चुकी थीं. ऐसे में ममता सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से चस्पा हो गए. लोगों को लगने लगा कि अगर इस बार बदलाव नहीं किया गया तो उनकी जिंदगी पर बहुत असर पड़ेगा. आज रिजल्ट के दिन बीजेपी और टीएमसी के सीटों की संख्या इस बात का सुबूत दे रहे हैं.
मोदी ब्रांड का जादू और अमित शाह की रणनीति
बीजेपी ने इस चुनाव में किसी एक नेता को आगे नहीं किया. सुवेंदु अधिकारी से खुद एनडीटीवी ने पूछा कि अगर बीजेपी चुनाव जीत जाती है तो कौन सीएम बनेगा तो सुवेंदु ने साफ किया कि बीजेपी सामुहिक नेतृ्त्व में बंगाल चुनाव लड़ रही है. चेहरा सिर्फ पीएम मोदी ही हैं और सारी रणनीति खुद अमित शाह बना रहे हैं. सुवेंदु ने बताया कि वो भी वहीं जा रहे हैं, जहां पार्टी की ओर से कहा जा रहा है. अमित शाह ने अपने सबसे भरोसेमंद लोगों को बंगाल चुनाव लड़ाने के लिए भेजा. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को बंगाल चुनाव का प्रभारी और सह प्रभारी त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लव देब को बनाया गया. धर्मेंद्र प्रधान और सुनील बंसल को बूथ मैनेजमेंट, लो प्रोफाइल साइलेंट रणनीति, संगठन को चुस्त करने के काम में लगाया गया और ये रणनीति काम करती दिख रही है.

ममता बनर्जी पर कोई व्यक्तिगत हमला नहीं
2021 बंगाल विधानसभा चुनाव से सबक लेते हुए बीजेपी ने इस बार ममता बनर्जी पर डायरेक्ट अटैक नहीं किया. इस बार उनकी सरकार की खामियों पर ज्यादा बात की गई. पीएम मोदी से लेकर बीजेपी के प्रत्येक नेता ने ये कोशिश की ममता बनर्जी को कम से कम टारगेट किया जाए. इसके उल्टे ममता बनर्जी इस चुनाव में पीएम मोदी और अमित शाह पर डायरेक्ट अटैक करती दिखीं. यहां तक की पीएम मोदी के झालमूढ़ी खाने का भी अपनी रैली में मजाक उड़ाया.
योजना बनाम योजना की राजनीति
बीजेपी ने इस चुनाव को विकास पर भी फोकस किया. ममता बनर्जी की चल रही योजनाओं और वादों को ध्यान में रखकर अपने वादे किए. साथ ही केंद्र सरकार की चल रही योजनाओं के बारे में भी बताया. ममता सरकार को केंद्र सरकार की योजनाएं लागू नहीं करने का दोषी ठहराया. बीजेपी ने बताने की कोशिश की अगर डबल इंजन सरकार बनती है तो बंगाल के लोगों को केंद्र और राज्य सरकार दोनों की योजनाओं का लाभ मिलेगा. साथ ही केंद्र सरकार की ओर से बजट देने में भी कोई दिक्कत नहीं होगी. ऐसा लगता है कि बीजेपी का ये नुस्खा भी काम कर गया. टीएमसी बीजेपी की इन रणनीतियों में अंत तक फंसती नजर आई और एक तरह से कहें कि बीजेपी को कॉपी करती नजर आई.

बंगाल चुनाव का असर क्या होगा
बंगाल चुनाव का असर बहुत बड़ा होने जा रहा है. कर्नाटक को छोड़ दें तो अब तक बीजेपी हिंदी भाषी इलाकों के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों पर ही कब्जा कर पाई थी.बंगाल चुनाव में मिली जीत बीजेपी को अब पंजाब, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ऑक्सीजन देगी. वहीं 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले बंगाल की जीत पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को और ऊंचा करेगी.
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