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बांकीपुर और दतिया में बीजेपी को लगा झटका, उपचुनाव की हार में छुपे हैं पार्टी के लिए कई संदेश

बीजेपी को बिहार से लेकर मध्य प्रदेश उपचुनाव में झटका लगा है. पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट रही बांकीपुर में चुनाव हर गई है. वहीं दतिया में कांग्रेस ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की है.

बांकीपुर और दतिया में बीजेपी को लगा झटका, उपचुनाव की हार में छुपे हैं पार्टी के लिए कई संदेश
बीजेपी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट पर भी चुनाव हारी (फोटो- एक्स)
  • दतिया उपचुनाव में बीजेपी को लगा झटका, कांग्रेस इस सीट पर जीतने में कामयाब
  • बीजेपी नितिन नवीन की सीट बांकीपुर में चुनाव हार गई है
  • बांकीपुर से प्रशांत किशोर की जीत बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है
नई दिल्ली:

लगातार दूसरा हफ्ता बीजेपी के लिए बुरी खबर लेकर आया है. पिछला हफ्ता शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी बुरी खबरों का रहा तो इस हफ्ते की शुरुआत दो विधानसभा उपचुनावों में हार से हुई. बिहार में बांकीपुर और मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनावों में बीजेपी की हार हो गई. दोनों राज्यों में बीजेपी की सरकार है. अमूमन उपचुनावों में सत्तारूढ़ दलों की जीत होती है. जैसे गुजरात में आज मांजलपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी की बड़े अंतर से जीत हुई. लेकिन बांकीपुर और दतिया की हार बीजेपी को कचोटने वाली है. वह भी बांकीपुर की कहीं अधिक क्योंकि यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट और बीजेपी का गढ़ मानी जाती है. बीजेपी के लिए बांकीपुर की हार एक झटका है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट उसके हाथ से निकल गई. बीजेपी ने यह सीट पिछली बार पचास हजार से ज्यादा वोटों से जीती थी.


हार का विश्लेषण करेगी बीजेपी

बीजेपी नेताओं के मुताबिक़ हार का विश्लेषण किया जाएगा. बूथवार विश्लेषण होगा ताकि यह पता लग सके कि प्रशांत किशोर को कहां से कितने वोट मिले. बीजेपी का प्रारंभिक आकलन है कि आरजेडी ने प्रशांत किशोर को अपने वोट ट्रांसफर कराए. तेजस्वी यादव केवल एक घंटे के लिए प्रचार में आए. बीजेपी का आरोप है कि आरजेडी और पीके के बीच सांठ-गांठ है. एक नेता के मुताबिक विधानसभा चुनाव में आरजेडी का कोर वोट बना रहा, इसीलिए उसकी रणनीति प्रशांत किशोर को आगे बढ़ाना है ताकि बीजेपी के अपर कास्ट वोट में सेंध लग सके. पिछली बार आरजेडी की रेखा गुप्ता को 46 हजार से अधिक वोट मिले थे जबकि इस बार पंद्रह हजार वोट भी नहीं मिले.

बांकीपुर सीट से हारी बीजेपी

एक तिहाई कम हो गए बीजेपी के वोट

बीजेपी के वोट करीब एक तिहाई कम हुए. पार्टी नेता के अनुसार बीजेपी के कोर वोट का एक हिस्सा छिटका है, इसकी समीक्षा की जाएगी. उनके मुताबिक मुख्यमंत्री को निशाना बनाना गलत है जैसा कि प्रशांत किशोर दावा कर रहे हैं.  सूत्रों के अनुसार बीजेपी को अपना उम्मीदवार बदलने से भी नुकसान हुआ. इससे यह संदेश गया कि बीजेपी अपने वोटरों को टेकन फॉर ग्रांटेड लेती है. पार्टी ने इस सीट पर प्रचार के लिए स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी थी. स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन चार बार यहां गए थे क्योंकि यह उनकी पारंपरिक सीट है.

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बीजेपी का कोर वोटर नाराज

साथ ही बीजेपी नेता इस बात से इनकार नहीं करते हैं कि नीट पेपर लीक पर सीजेपी का आंदोलन, यूजीसी गाइडलाइन्स और भरत तिवारी एनकाउंटर से बीजेपी का कोर वोटर नाराज है. यह मतदान के कम प्रतिशत में भी दिखा जब वोटरों की उदासीनता का खामियाजा भी बीजेपी को भुगतना पड़ा.  बिहार के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों का आंदोलन और पुलिस की कार्रवाई से भी नुकसान उठाना पड़ा. 

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दतिया की हार से मोहन का सिरदर्द बढ़ेगा 

वहीं दतिया सीट पर हार से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का सिरदर्द बढ़ेगा। वे पहले से ही पार्टी के एक गुट के निशाने पर हैं. हालांकि हार की जिम्मेदारी नरोत्तम मिश्रा पर डालने की तैयारी है क्योंकि वे टिकट कटने से सार्वजनिक रूप से नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं. उनके समर्थकों में जमकर हिंसा की थी। हालांकि, बाद में पार्टी के कहने पर उन्होंने प्रचार किया था. 

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नरोत्तम की बूथ पर हार गई बीजेपी 

हालांकि बीजेपी नेताओं का कहना है कि दतिया का मुकाबला कठिन था. पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य में बीजेपी की प्रचंड आंधी के बावजूद पार्टी यह सीट हार गई थी. लिहाजा कांग्रेस ने अपनी सीट ही बचाई है. लेकिन वे इस बात से इनकार नहीं करते कि बांकीपुर हो या फिर दतिया, दोनों सीटों पर उम्मीदवार चयन में गड़बड़ी भी हार का कारण है. आज पार्टी नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर भी हार गई. वैसे तो बीजेपी उपचुनावों की हार को युवाओं के असंतोष और आंदोलन से जोड़ कर देखने को तैयार नहीं है, लेकिन इसके बाद बीजेपी मंथन अवश्य करेगी. पार्टी नेताओं का कहना है कि बुनियादी समस्याओं को हल करने के लिए कमर कसनी होगी. आने वाले समय में सरकार और संगठन दोनों में ही बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

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