Bhimrao Ambedkar Birth anniversary: देश आज दलितों के मसीहा भीमराव अंबेडकर की आज जयंती है. उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता भी कहा जाता है. अंबेडकर एक महान अर्थशास्त्री, कानूनविद, और समाज सुधारक भी थे.संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने देश का लिखित संविधान को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई, ताकि संविधान में प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार मिले.अंबेडकर ने जाति प्रथा और छुआछूत के विरोध में बड़ा आंदोलन किया.अछूतों को सार्वजनिक तालाब से पानी पीने का अधिकार दिलाने के लिए उन्होंने 1927) महाड़ सत्याग्रह आंदोलन किया.दलितों की शिक्षा और उत्थान के लिए बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना की.
महिलाओं और मजदूरों को दिलाया अधिकार
बाबासाहेब अंबेडकर महिला अधिकारों के प्रबल समर्थक थे. उन्होंने हिंदू कोड बिल पेश किया. इसका मकसद महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, तलाक का अधिकार और गोद लेने का अधिकार देना था. अंबेडकर एक बड़े अर्थशास्त्री भी थे. भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना उनके रिसर्च द प्रॉब्लम ऑफ द रूपी: इट्स ओरिजिन एंड इट्स सॉल्यूशन में दिए गए सुझावों के आधार पर हुई थी.भारत के श्रम मंत्री के तो उन्होंने मजदूरों के लिए बड़े सुधार किए.काम के घंटों को 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे करना. गर्भवती महिला श्रमिकों के लिए प्रसूति अवकाश का प्रावधान कराया. कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) और भविष्य निधि (PF) जैसी सुविधाओं की नींव रखी.
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अंबेडकर के 10 अनमोल विचार
1. शिक्षा की शक्ति
शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो. शिक्षा वह हथियार है जो किसी भी तरह की गुलामी की बेड़ियां काट सकती है.
2. आत्मसम्मान
आत्म सम्मान के बिना जीवन जीने लायक नहीं है. मनुष्य का सबसे पहला कर्तव्य अपने स्वाभिमान की रक्षा करना है. बिना आत्म-सम्मान के, व्यक्ति सिर्फ एक शरीर है, जीवित आत्मा नहीं.
3. सामाजिक प्रगति का पैमाना
मैं किसी समुदाय की प्रगति को उस समुदाय की महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति से मापता हूं. समाज तभी आगे बढ़ेगा जब महिलाएं स्वतंत्र और शिक्षित होंगी.
4. धर्म का उद्देश्य
मैं ऐसे धर्म को पसंद करता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है.धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि नैतिकता और मानवता का आधार होना चाहिए.
5. विचार और जीवन
अच्छे विचारों को केवल मन में रखना काफी नहीं है, उन्हें समाज में फैलाना और लागू करना भी जरूरी है. एक विचार को फैलाने की उतनी ही जरूरत होती है, जितनी कि एक पौधे को पानी की. वरना दोनों मुरझा जाते हैं और मर जाते हैं.
6. महानता और परोपकार
एक महान व्यक्ति एक प्रतिष्ठित व्यक्ति से इस मायने में भिन्न होता है कि वह समाज का सेवक बनने के लिए तैयार रहता है. सच्ची महानता पद या प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने में निहित है.
7. स्वतंत्रता की रक्षा
हमें अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता को एक सामाजिक स्वतंत्रता में बदलना चाहिए। सामाजिक स्वतंत्रता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता का कोई मूल्य नहीं है.वोट देने का अधिकार तब तक अधूरा है जब तक समाज में ऊंच-नीच और भेदभाव बना रहता है.
8. इतिहास का ज्ञान
जो लोग इतिहास नहीं जानते, वे कभी इतिहास नहीं बना सकते.अपनी जड़ों और संघर्षों को याद रखना ही भविष्य की सफलता की पहली सीढ़ी है.
9. जीवन का लक्ष्य
जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए. यह जरूरी नहीं है कि आपने कितने साल जिया, बल्कि यह है कि आपने उन वर्षों में मानवता के लिए क्या किया.
10. कानून और न्याय
संवैधानिक नैतिकता केवल एक कानूनी अवधारणा नहीं है, बल्कि यह एक जीवन जीने का तरीका है. संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आम नागरिक के सम्मान की रक्षा का माध्यम है.
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