- असम से पहली बार 5,627 लीटर पूरबी आइसक्रीम की अंतरराष्ट्रीय खेप भूटान भेजी गई.
- एपीडा की मदद से भूटान के प्रमुख शहरों में भारतीय डेयरी उत्पादों की पहुंच बढ़ेगी.
- इस पहल से पूर्वोत्तर के हजारों डेयरी किसानों की आय बढ़ने और नए निर्यात बाजार खुलने की उम्मीद है.
भारत के डेयरी सेक्टर के लिए एक नई और मीठी शुरुआत हुई है. पहली बार असम में बनी पूरबी आइसक्रीम की अंतरराष्ट्रीय खेप भूटान भेजी गई है. यह पूर्वोत्तर भारत के डेयरी उद्योग और वहां के हजारों दूध उत्पादक किसानों के लिए नए बाजारों के दरवाजे खुलने का संकेत भी है. असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी से 5627 लीटर पूरबी आइसक्रीम की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह खेप भूटान के थिम्पू, पारो, फुएंत्शोलिंग और वांगड्यू जैसे प्रमुख शहरों में पहुंचेगी, जहां खुदरा ग्राहकों के साथ-साथ होटल, रेस्तरां और अन्य संस्थागत खरीदारों को भी इसकी आपूर्ति की जाएगी.
पूरबी आइसक्रीम का निर्माण वेस्ट असम मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड करता है, जबकि इसकी मार्केटिंग नॉर्थ ईस्ट डेयरी एंड फूड्स लिमिटेड (NEDFL) करती है. इस आइसक्रीम को असम के डेयरी किसानों से खरीदे गए दूध से तैयार किया जाता है. पहली खेप में कप, कोन, फैमिली पैक और गैलन पैक जैसे कई उत्पाद शामिल किए गए हैं ताकि भूटान के अलग-अलग उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी की जा सके.
आइसक्रीम निर्यात को मजबूती
इस निर्यात को सफल बनाने में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की महत्वपूर्ण भूमिका रही. एपीडा ने निर्यात दस्तावेज, नियामकीय मंजूरी, बाजार तक पहुंच और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर पूरी प्रक्रिया को आसान बनाया. इससे न सिर्फ यह खेप बिना किसी बाधा के भूटान पहुंच सकेगी, बल्कि भविष्य में पूर्वोत्तर भारत से मूल्य संवर्धित डेयरी उत्पादों के निर्यात का मजबूत ढांचा भी तैयार होगा.

Himanta Biswa Sarma
Photo Credit: PIB
भूटान की भौगोलिक निकटता असम के लिए बड़ा लाभ मानी जा रही है. कम दूरी होने के कारण परिवहन आसान रहता है और आइसक्रीम जैसे कोल्ड चेन वाले उत्पादों को सुरक्षित तरीके से पहुंचाना भी संभव होता है. यही वजह है कि भूटान को पूर्वोत्तर भारत के डेयरी उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बाजार माना जा रहा है.
"पूर्वोत्तर के उद्योग को नई पहचान मिली"
आने वाले समय में नॉर्थ ईस्ट डेयरी एंड फूड्स लिमिटेड की योजना पूरबी ब्रांड के दूसरे डेयरी उत्पादों को भी विदेशी बाजारों में पहुंचाने और निर्यात की मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाने की है.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस उपलब्धि पर बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह भारत के डेयरी सेक्टर की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा का प्रमाण है. उनके मुताबिक, इस पहल से डेयरी किसानों की आय बढ़ेगी, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होगी और पूर्वोत्तर भारत के कृषि आधारित उद्योगों को नई पहचान मिलेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह पूर्वोत्तर भारत के मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलते रहे, तो यह क्षेत्र सिर्फ कृषि उत्पादन ही नहीं, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात का भी बड़ा केंद्र बन सकता है.
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