Assam Floods Update: असम में बाढ़ की स्थिति भले ही कुछ इलाकों में धीरे-धीरे सुधरती दिखाई दे रही हो, लेकिन राज्य के कई हिस्सों में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं. पिछले 24 घंटों के दौरान तीन और लोगों की मौत के बाद बाढ़ जनित घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर 78 हो गई है. राज्य के सात जिलों के 550 से अधिक गांव अभी भी जलमग्न हैं और तीन लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. बड़ी संख्या में लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है. इस बीच मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है, जिससे राहत और बचाव कार्यों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है.
कई जिलों में बनी हुई है चिंताजनक स्थिति
असम के कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलस्तर कम होने लगा है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. अधिकारियों के अनुसार, ऊपरी असम के अधिकांश जिलों में हाल के दिनों में बारिश नहीं होने से कुछ राहत मिली है और जलमग्न गांवों से धीरे-धीरे पानी उतर रहा है. इसके बावजूद सात जिलों के 550 से अधिक गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के मुताबिक राज्य में इस समय 3,00,031 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. सबसे अधिक प्रभावित चराइदेव जिला है, जहां 1,37,561 लोग बाढ़ का सामना कर रहे हैं. इसके बाद शिवसागर में 84,600 और जोरहाट में 49,911 लोग प्रभावित हैं.
#OpJalRahat
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) July 29, 2026
𝗛𝗼𝗽𝗲 𝗜𝗻 𝗔𝗰𝘁𝗶𝗼𝗻
Amidst the devastating floods in #Assam, the #IndianArmy continues its relentless humanitarian mission under #OpJalRahat. Working shoulder-to-shoulder with the civil administration, NDRF, SDRF and local agencies, troops of @Spearcorps are… pic.twitter.com/mHaPU5jTXt
तीन और मौतों से बढ़ा मृतकों का आंकड़ा
एएसडीएमए की ओर से जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार पिछले 24 घंटों में शिवसागर जिले में दो और गोलाघाट जिले में एक व्यक्ति की मौत हुई है. इसके साथ ही इस वर्ष असम में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर 78 हो गई है. लगातार हो रही प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य के हजारों परिवारों को प्रभावित किया है. कई लोग अब भी अपने घरों से दूर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बड़ी संख्या में ग्रामीणों की आजीविका पर भी संकट गहरा गया है.

राहत शिविरों में हजारों लोगों ने ली शरण
बाढ़ के कारण विस्थापित हुए लोगों के लिए विभिन्न जिलों में राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक 16,500 से अधिक लोगों ने राज्यभर में बनाए गए 71 राहत शिविरों में शरण ली हुई है. इसके अलावा 30 राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 72 हजार से अधिक लोगों तक खाद्यान्न और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है. राज्य सरकार और प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने में जुटे हैं, हालांकि कई इलाकों में सड़क संपर्क टूटने और जलभराव के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं.
कृषि और पशुधन को भारी नुकसान
बाढ़ का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं है बल्कि कृषि और पशुपालन क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है. एएसडीएमए के अनुसार राज्य में 21,523.08 हेक्टेयर कृषि भूमि अभी भी जलमग्न है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है. इसके अलावा 11,000 से अधिक मवेशी बाढ़ के पानी में बह गए हैं, जबकि करीब 17,000 अन्य पशु प्रभावित हुए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन की क्षति ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

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अमित शाह ने लिया हालात का जायजा
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से फोन पर बातचीत की और राज्य की स्थिति की जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि कई इलाकों में जलस्तर घटा है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब भी अपने घर नहीं लौट सके हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक घर बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि कई मकानों में कीचड़ और गाद भर जाने के कारण लोगों के लिए वापस लौटना मुश्किल बना हुआ है.

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मौसम विभाग का नया अलर्ट बढ़ा रहा चिंता
इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 30 जुलाई से 1 अगस्त तक असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश तथा गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है. असम के तिनसुकिया, धेमाजी और लखीमपुर जिलों के साथ-साथ नगालैंड के मोन, मोकोकचुंग और वोखा क्षेत्रों के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है. तिनसुकिया और नगालैंड के कुछ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है. मौसम विभाग की चेतावनी ने आशंका बढ़ा दी है कि यदि दोबारा भारी बारिश होती है तो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति फिर से बिगड़ सकती है.
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