- असम के शिवसागर जिले के बामुनपुखुरी चाय बागान में बाढ़ के तेज बहाव में एक मासूम बच्चे की मौत
- बच्चे ने अपने तीन महीने के पालतू पिल्ले को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करते हुए बहाव में फिसल गया था
- पिता ने बताया कि उन्होंने बेटे को सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा था, लेकिन वह पिल्ले को साथ ले जाना चाहता था
इन दिनों असम के कई इलाके भयंकर बाढ़ से जूझ रहे हैं. यह बाढ़ कई परिवारों के लिए दुख और नुकसान की वजह बनी है. शिवसागर जिले के बामुनपुखुरी चाय बागान में भी एक ऐसी ही दर्दनाक घटना हुई, जिससे एक परिवार अपने मासूम बेटे की मौत के सदमे से जूझ रहा है. 19 जुलाई को इलाके में पानी घुसने के बाद ऋदीप नाम का एक मासूम बच्चा अपने तीन महीने के पालतू पिल्ले 'वरुण' को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान वह पानी के तेज बहाव में फिसल गया और बह गया.
मासूम बच्चे के पिता ने क्या बताया?
NDTV से बातचीत में हृदिप के पिता ने उस दिन की घटना को याद करते हुए कहा, "मैंने उससे कहा था कि पानी बढ़ रहा है, इसलिए वह अपने चाचा के घर चला जाए. उसने जवाब दिया, 'पापा, मैं वरुण को साथ लेकर जा रहा हूं. आप भी आ जाइए.' मैं कुछ जरूरी कागजात लेने के लिए घर के अंदर गया. जब बाहर आया तो पानी बहुत तेजी से बढ़ चुका था. मेरे भाई और भतीजे हमारी मदद के लिए आए, लेकिन मेरा बेटा तेज बहाव में फिसल गया. हमने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके." पिल्ला बच गया और अब भी परिवार के साथ है.

'बाढ़ के दौरान बच्चों को पास ही रखें'
आंसू रोकते हुए हृदिप की मां ने कहा कि किसी भी माता-पिता को ऐसा दुख नहीं सहना चाहिए. उन्होंने कहा, "मैं सभी माता-पिता से कहना चाहती हूं कि बाढ़ के दौरान अपने बच्चों को हमेशा अपने पास रखें. यह न सोचें कि वे अपने आप सुरक्षित रहेंगे. हमने अपना इकलौता बेटा खो दिया है."
उन्होंने सरकार से बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव के इंतजाम और बेहतर करने की भी अपील की. उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार से अनुरोध करती हूं कि बाढ़ प्रभावित हर गांव में नाव की व्यवस्था हो. बचाव दल लोगों तक जल्दी पहुंच सकें. समय पर मदद मिलने से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं."
बामुनपुखुरी चाय बागान के लोगों का कहना है कि इस हादसे के बाद से परिवार को पड़ोसियों का पूरा सहयोग मिला है. घटना के कई दिन बाद भी इलाके के लोग परिवार के घर पहुंचकर संवेदना जता रहे हैं. इस महीने पूर्वी असम के कई हिस्सों में आई बाढ़ में कई लोगों की जान गई और हजारों लोग बेघर हुए. हृदिप के परिवार के लिए बेटे को खोना इस बात की दर्दनाक याद है कि बाढ़ का पानी कितनी तेजी से खतरनाक रूप ले सकता है. यही वजह है कि जोखिम वाले इलाकों में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और बचाव कार्य तेज करना बेहद जरूरी है.
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