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प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत और बचाव में झंडे गाड़ता भारत, क्या कहते हैं आंकड़े

विवेक शुक्ला
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    जुलाई 31, 2026 18:26 pm IST
    • Published On जुलाई 31, 2026 18:26 pm IST
    • Last Updated On जुलाई 31, 2026 18:26 pm IST
प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत और बचाव में झंडे गाड़ता भारत, क्या कहते हैं आंकड़े

असम में बाढ़ ने हजारों जिंदगियों को बुरी तरह प्रभावित किया है. अचानक आई बाढ़ ने लोगों को संभलने का मौका ही नहीं दिया. इस बाढ़ में 60 से अधिक लोगों की जान चली गई. लेकिन दर्द के इस सैलाब में एक सुकून की बात यह रही कि आपदा प्रबंधन से जुड़ीं केंद्र और असम राज्य की एजेंसियों ने दिन-रात एक कर कई अनमोल जीवन बचाए. इनके प्रति खुद असम के लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए आभार जताया है. 

चाहे जोरहाट के टेओक रेवेन्यू सर्कल के टी एस्टेट में फंसी एक युवा लड़की, एक व्यक्ति और तीन महिलाओं को बचाने का मामला हो या फिर कवाईमारी मिसिंग गांव में फंसी गंभीर रूप से बीमार एक बुजुर्ग महिला को बचाकर अस्पताल पहुंचाने का. सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), फायर और इमरजेंसी सेवा से जुड़े लोगों की तत्परता ने बाढ़ प्रभावित इलाकों को बड़े नुकसान से काफी हद तक बचा लिया.

भारत में आपदा प्रबंधन में कैसा आया है बदलाव 

देश में आपदा प्रबंधन में जिस स्तर पर सुधार हुआ है, उसका परिणाम कई प्राकृतिक आपदाओं में देखा जा चुका है. अभी कुछ साल पहले तक आपदा प्रबंधन का ढांचा एकदम लचर था. इसमें न पर्याप्त संख्या में जवान और अधिकारी थे और न ही इसका आधुनिकीकरण हुआ था. साल 2014 से पहले तो राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) का कोई फुल-टाइम हेड भी नहीं था. 2014 तक कोई डायरेक्टर जनरल नियुक्त नहीं किया गया था. ज्यादातर अधिकारी वे होते थे, जो सेवानिवृत्ति के करीब होते थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में एक व्यवस्थित और मजबूत आपदा प्रबंधन सिस्टम बनाने की शुरुआत की. गृह मंत्री अमित शाह ने इसे दुनिया का एक बेहतरीन कार्यबल में इसे बदलने का कारनामा कर दिखाया. आज देश में एक ऐसा आपदा प्रबंधन का इको-सिस्टम तैयार है, जो वैश्विक मानदंडों पर न सिर्फ खरा उतरता है, बल्कि दुनिया के कई देशों को नेतृत्व भी प्रदान कर रहा है.

Assam Flood, NDRF, SDRF

असम में बाढ़ के दौरान बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को हेलिकॉप्टर की मदद से निकालते वायु सेना के जवान.
Photo Credit: PTI

आंकड़ों में नजर आता सुधार

इस समय भारत की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को ग्लोबल रैंकिंग में छठा स्थान प्राप्त है. एक कनाडियन रिसर्च एजेंसी के मुताबिक आपदा प्रबंधन की तैयारी की रैंकिंग में हमारा देश ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको, नीदरलैंड, ग्रीस और न्यूजीलैंड के बाद सबसे प्रमुख है. भारत में प्राकृतिक आपदा से होने वाला नुकसान कुल जीडीपी का केवल 0.45 फीसद ही है. साल 2013-14 में जहां प्राकृतिक आपदा से 5,677 लोगों की मौतें हुई थीं, वहीं 2024-25 में यह संख्या घटकर 3,080 लोगों तक ही रह गई. इसी तरह प्राकृतिक आपदा में मवेशियों का सबसे ज्यादा नुकसान 2006-07 में हुआ था. उस साल यह आंकड़ा 4.55 लाख तक पहुंच गया था. लेकिन 2023-24 में यह आंकड़ा घटकर 1.19 लाख पर आ गया. साल 2007-08 में प्राकृतिक आपदा से 35 लाख से ज्यादा घर प्रभावित हुए,  जबकि 2023-24 में केवल 1.4 लाख घरों को ही इन आपदाओं से नुकसान हुआ. साल 2024-25 में फसलों को भी सबसे कम नुकसान प्राकृतिक आपदा से हुआ. 

देश में आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की है. वह लगातार कह रहे हैं कि भारत प्राकृतिक आपदाओं से शून्य मृत्यु की तरफ बढ़ रहा है. उन्होंने इस आपदा प्रबंधन की इकाई को जिले स्तर तक पहुंचा दिया है. गृह मंत्री ने संसद में खड़े होकर कहा था कि उनका लक्ष्य देश में जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन क्षमताओं को सशक्त बनाना है, क्योंकि आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की है. इसलिए उन्होंने आपदा प्रतिक्रिया निधि राज्य और जिला दोनों स्तरों पर आवंटित करने की योजना बनाई.केंद्र सरकार ने 2025-26 में आपदा प्रबंधन पर कुल 30,946 करोड़ रुपये खर्च किए. इसमें स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड और मिटिगेशन फंड को दिया पैसा प्रमुख रूप से शामिल है. वहीं 2010–2015 तक तत्कालीन यूपीए सरकार ने कुल 33,580 करोड़ रुपए का बजट तय किया था. मोदी सरकार में आपदा प्रबंधन के लिए कुल वित्तीय आवंटन में काफी बढ़ोतरी हुई है. 2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार ने इस पर करीब दो लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं.

डिजास्टर मैनेजमेंट का ग्लोबल लीडर बन रहा है भारत

भारत को इस समय आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले 12 साल में मोदी सरकार ने आपदा प्रबंधन में क्षमता निर्माण, गति, दक्षता और सटीकता के कई मानदंड स्थापित किए हैं. इस समय राज्यों के हर जिले में आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जा रही है. हर प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है. इसी का परिणाम है कि भारत कई आपदाओं में शून्य मानवीय जान के नुकसान की उपलब्धि हासिल कर पाया है. चक्रवातों से न्यूनतम नुकसान से निपटने का रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि किस तरह केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय इकाइयां मिलकर बड़ी सफलताएं हासिल कर सकते हैं.

असम के शिवसागर जिले में आई बाढ़ के बाद एक बाढ़ प्रभावित गांव.

इस समय आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी एजेंसियां एक मंच पर हैं. आपदा प्रबंधन में 'संपूर्ण सरकार तैयार' के सिद्धांत को चरितार्थ कर रही हैं. अंतर-एजेंसी समन्वय बेहतर ढंग से काम कर रहा है. मोदी सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) का बेहतरीन ढांचा खड़ा किया है. इसकी वजह से ही भारत इस समय आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक ग्लोबल लीडर के रूप में अपनी पहचान बना चुका है.

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की तत्परता और कार्यकुशलता का प्रमाण हमने कई बार देख लिया है. हर आपदा में एनडीआरएफ का रिस्पॉन्स काबिले तारीफ रहा है. किसी भी आपदा के समय जान बचाने का इनका रिकॉर्ड शानदार है. इस बल ने अब तक खतरे में फंसे 1,68,000 से ज्यादा लोगों की जान बचाई है. इसके अलावा संकट में फंसे 8,50,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. इस बल  ने 2024 में रिकॉर्ड 1,038 ऑपरेशन किए.

(डिस्क्लेमर: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, वो देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अलग-अलग विषयों पर लेख लिखते हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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