राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हमला बोला है. ओवैसी ने सोमवार रात बिजनौर के नजीबाबाद में कहा था कि अगर उस ट्रस्ट में एक मुसलमान को सदस्य बना लेते और जब यह घोटाला सामने आया तब उसका एनकाउंटर कर देते और बुलडोजर से उसका घर गिरा देते, इससे केस क्लोज हो जाता. आइए हम आपको मुसलमानों से जुड़ी संस्थाओं में घोटालों के बारे में बताते हैं.
"अगर ट्रस्ट में कोई मुसलमान होता, तो अब तक उसका एनकाउंटर और घर तोड़ दिया गया होता।"
— AIMIM (@aimim_national) June 30, 2026
राम मंदिर चंदा चोरी पर बोले Barrister @asadowaisi pic.twitter.com/fPwLjN1QVM
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जनहित, धार्मिक या धर्मार्थ कामों के लिए दान की गई संपत्तियों को शरिया या इस्लामी कानून में वक्फ कहा जाता है. ये संपत्तियां चल और अचल दोनों हो सकती हैं.पीआईबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 30 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और 32 बोर्डों ने बताया है कि उनके पास 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं.ये संपत्तियां 38 लाख एकड़ से अधिक जमीन को कवर करतीं है. लेकिन समय-समय पर इन वक्फ संपत्तियों में हेरफेर, अनधिकृत कब्जे और वित्तीय विसंगतियों की खबरें आती रहती हैं. इनकी जांच में अनियमितताएं भी सामने आती रहती हैं.
'कर्नाटक वक्फ बोर्ड की आधी जमीन बेच दी'
ऐसा ही एक मामला 2012 में कर्नाटक में सामने आया था. वहां के अल्पसंख्यक आयोग के तत्कालीन प्रमुख अनवर मनिप्पादी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा का सात हजार पन्ने की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी थी.इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि राज्य के वक्फ बोर्ड की कुल 54,000 एकड़ जमीन में से करीब 27 हजार एकड़ जमीन का अवैध रूप से हस्तांतरण, बिक्री या व्यावसायिक उपयोग किया गया. इन जमीनों की कीमत उस समय करीब दो लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी. इस घोटालें में राजनेताओं, वक्फ बोर्ड के अधिकारियों और रियल एस्टेट डेवलपर्स के शामिल होने के आरोप लगाए गए थे.
उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की बंदरबांट
उत्तर प्रदेश में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों की संपत्तियों की खरीद-बिक्री और अवैध कब्जों को लेकर शिकायतें बड़े पैमाने पर मिली थीं.राज्य सरकार की सिफारिश पर सीबीआई ने लखनऊ और प्रयागराज सहित कई जिलों में दर्जनों वक्फ संपत्तियों के अवैध ट्रांसफर, किराए पर देने और वित्तीय हेरफेर के मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू की थी.इसमें पता चला कि कई कीमती वक्फ संपत्तियों को बेहद मामूली किराए पर निजी लोगों को सौंप दिया गया था. सीबीआई ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया था.
महाराष्ट्र वक्फ भूमि विवाद
महाराष्ट्र में भी वक्फ संपत्तियों में धांधली और उन्हें अवैध तरीके से बेचने के कई मामले सामने आए थे. ये मामले मुंबई, पुणे, नाशिक और नागपुर जैसे शहरों में सामने आए. इन मामलों में हजारों करोड़ कीमती जमीनों का कौड़ियों के भाव बेचने या लीज पर देने का आरोप लगा था. ईडी ने इसी तरह के एक मामले में कार्रवाई की थी.
दिल्ली वक्फ बोर्ड में नौकरी देने में अनियमितता

दिल्ली वक्फ बोर्ड में लोगों को नौकरियां देने में अनियमितता कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया.
Photo Credit: PTI
इसी तरह दिल्ली वक्फ बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं और अवैध नियुक्तियों का मामला सामने आया था. इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी. इस जांच में सामने आया कि बोर्ड के नियमों और तय प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर अपने चहेतों को अवैध रूप से नियुक्त किया.इस तरह से बोर्ड के फंड का मनमाना इस्तेमाल किया गया. इस मामले में दिल्ली भ्रष्टाचार निरोधक शाखा,सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी जांच की थी. यह मामला आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान के बोर्ड के अध्यक्ष रहते समय का है. वो 2016 से 2021 तक बोर्ड के प्रमुख थे.
जाकिर नाइक ने दान के पैसे से खरीदी बेनामी संपत्तियां
विवादित और फरार इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाइक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर वित्तीय हेरफेर के आरोप लगे थे. जांच में पता चला कि इस ट्रस्ट को विदेशों से करोड़ों रुपये का चंदा मिला. चंदे के इस पैसे का इस्तेमाल धार्मिक गतिविधियों के नाम पर किया गया, लेकिन कथित तौर पर इसका एक बड़ा हिस्सा बेनामी संपत्तियां खरीदने और संदिग्ध गतिविधियों में डाइवर्ट किया गया. सरकार ने इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन पर पाबंदी लगा दी थी. जाकिर नाइक अभी भी फरार हैं. वो भारत से भागकर मलेशिया में रहते हैं.
मदरसा अजीजिया ट्रस्ट घोटाला (बिहार)
बिहार की राजधानी पटना के पास बिहारशरीफ के ऐतिहासिक अजीजिया मदरसे और उससे जुड़े ट्रस्टों में सरकारी फंड के दुरुपयोग का मामला सामने आया.निगरानी विभाग ने अपनी जांच में पाया कि ट्रस्ट के नाम पर आने वाले सरकारी अनुदान और शिक्षकों के वेतन के पैसों में फर्जीवाड़ा किया गया है. कागजों पर फर्जी शिक्षकों की नियुक्तियां दिखाकर सालों तक उनके वेतन के करोड़ों रुपये हड़पे गए. इसके बाद संस्थान के कई शिक्षकों एफआईआर दर्ज कराई गई थी.
दारुल उलूम देवबंद में विदेशी चंदा में हेरफेर
उत्तर प्रदेश के देवबंद स्थित मशहूर इस्लामिक संस्थान और उससे जुड़े ट्रस्टों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की जांच की गई.केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जांच में पाया गया कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के सख्त नियमों का पालन किए बिना विदेशों से सीधे बैंक खातों में मोटी रकम ट्रांसफर की गई. नियमों के उल्लंघन को देखते हुए सरकार ने संस्थान से जुड़े कुछ बैंक खातों पर कार्रवाई की और टैक्स छूट के दावों की भी दोबारा समीक्षा की.
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