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अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान को 2027 चुनाव के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट किया

अरविंद केजरीवाल ने वोटरों की सोच को प्रभावित करने की एक सोची-समझी कोशिश के तहत 'चिट्टा पार्टी', 'झगड़ा पार्टी' और 'ED पार्टी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. खासकर मालवा वो 'चुनावी अखाड़ा' है जो पंजाब की अगली सरकार तय कर सकता है.

अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान को 2027 चुनाव के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट किया
  • आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भगवंत मान को सीएम का चेहरा घोषित किया
  • केजरीवाल ने कहा कि मान के नेतृत्व में भ्रष्टाचार मुक्त सरकार ने पंजाब में कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं
  • केजरीवाल ने विपक्ष को नशीली दवाओं के प्रसार, धार्मिक विवाद और ED का सहारा लेने वाली पार्टियां बताया
चंडीगढ़:

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर शुक्रवार को बठिंडा में एक बड़ा ऐलान किया. उन्होंने एक बार फिर से मुख्यमंत्री के रूप में पार्टी की तरफ से भगवंत सिंह मान को ही प्रोजेक्ट करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि अगले पंजाब विधानसभा चुनावों में भी मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ही पार्टी का चेहरा होंगे.

राजनीतिक रूप से अहम मालवा इलाके में एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए, केजरीवाल ने जल्द चुनाव की तैयारी का संकेत दिया और कहा कि अगले विधानसभा चुनाव नवंबर में भी हो सकते हैं. उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे "भगवंत मान को फिर से मुख्यमंत्री बनाएं" ताकि सरकार का काम जारी रहे और चल रही कल्याणकारी योजनाएं पूरी हो सकें.

भगवंत मान ही मुख्यमंत्री का चेहरा- केजरीवाल

केजरीवाल ने बिना किसी शक के भगवंत मान को AAP का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बताया और उनकी साफ़ छवि और कामकाज के रिकॉर्ड की तारीफ़ की. उन्होंने दावा किया कि चार सालों में मान, उनके परिवार या उनके मंत्रियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा है. उन्होंने AAP की कल्याणकारी योजनाओं पर भी ज़ोर दिया, जिनमें मुफ़्त बिजली, ₹10 लाख का स्वास्थ्य बीमा और जुलाई से शुरू होने वाली एससी महिलाओं के लिए ₹1,000 और ₹1,500 की वित्तीय सहायता योजनाएं शामिल हैं.

'चिट्टा पार्टी', 'झगड़ा पार्टी', 'ED पार्टी'

केजरीवाल ने विपक्षी दलों का नाम लिए बिना उनके लिए कुछ खास नाम दिए:
'चिट्टा पार्टी': केजरीवाल ने एक पार्टी पर आरोप लगाया कि उसके कार्यकाल में बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं (चिट्टा) का इस्तेमाल बढ़ा. उसी पार्टी को 'बेअदबी पार्टी' भी कहा जाता है, यानी उसे धार्मिक अपमान (बेअदबी) के विवादों से जोड़ा.
'झगड़ा पार्टी': विरोधी खेमे में चल रही अंदरूनी कलह पर निशाना साधा.
'ED पार्टी': आरोप लगाया कि वे विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियों पर निर्भर हैं.

उन्होंने इनकी तुलना AAP से करते हुए इसे 'लोगों की अपनी पार्टी' बताया, जो गवर्नेंस और जन-कल्याण पर केंद्रित है.

बठिंडा रैली: मालवा में रणनीतिक महत्व

बठिंडा में हुई रैली सिर्फ़ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि मालवा क्षेत्र में ताकत दिखाने का एक रणनीतिक कदम था. पंजाब में विधानसभा की सबसे ज़्यादा सीटें इसी क्षेत्र में हैं और अक्सर यही क्षेत्र राज्य चुनावों के नतीजे तय करता है.

पदमजीत सिंह मेहता की मेयर पद पर जीत के बाद आयोजित इस कार्यक्रम ने क्षेत्र में AAP के लिए माहौल बनाने का काम किया. यहां लोगों की भारी भीड़ का जुटना मालवा में पार्टी को ज़मीनी स्तर पर मिल रहे समर्थन का संकेत माना जा रहा है.

मान ने गवर्नेंस पर ज़ोर दिया, विपक्षी गठबंधनों पर निशाना साधा

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना AAP द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और मुफ़्त बिजली के क्षेत्र में किए गए कामों से जनता की संतुष्टि का नतीजा है. उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर गवर्नेंस के बजाय गठबंधन पर ध्यान केंद्रित करने का आरोप लगाया और कहा कि प्रतिद्वंद्वी पार्टियां केवल राजनीतिक फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं.

मान ने धान की बुवाई के मौसम में पानी की पर्याप्त उपलब्धता के बारे में किसानों को भरोसा दिलाया और बताया कि जलाशयों में पानी का स्तर औसत से ऊपर है. साथ ही, रैली के दौरान उन्होंने सीधे जनता से जुड़कर कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने की बात पर भी ज़ोर दिया.

राजनीतिक महत्व: 2027 के लिए शुरुआती नैरेटिव बनाना

बठिंडा रैली मालवा पर अपनी पकड़ मज़बूत करने और आगामी चुनावों के लिए अभी से नैरेटिव (धारणा) तैयार करने की AAP की रणनीति को दिखाती है. मान को निर्विवाद CM चेहरे के तौर पर पेश करके, कल्याणकारी राजनीति को आक्रामक विपक्षी ब्रांडिंग के साथ मिलाकर और अहम वोटर समूहों को साधकर, AAP पंजाब के बदलते राजनीतिक परिदृश्य में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रही है.

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