Arvind Kejriwal IIT Branch: देश में लाखों स्टूडेंट्स हर साल IIT में एडमिशन पाने के लिए एग्जाम में बैठते हैं. कॉम्पटिशन तगड़ा होने की वजह से सिर्फ कुछ हजार बच्चे ही अपने सपनों के कैंपस में पहुंच पाते हैं. ये स्टूडेंट्स ऐसे होते हैं, जो अपने लक्ष्य को लेकर इतने क्लियर होते हैं कि उनके पास एग्जाम क्रैक करने के अलावा कोई दूसरा ऑप्शन ही नहीं होता है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी ऐसे ही छात्रों में से एक रहे हैं. स्कूल के दिनों से ही उनका गोल तय हो चुका था कि उन्हें IIT में ही पढ़ना है. यही वजह रही कि उन्होंने इंजीनियरिंग के दूसरे कॉलेजों को बैकअप के तौर पर भी नहीं चुना. आज लोग भले ही उन्हें एक राजनेता और आम आदमी पार्टी के मुखिया के रूप में जानते हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई और करियर की कहानी भी काफी दिलचस्प है. आइए जानते हैं अरविंद केजरीवाल ने किस IIT से पढ़ाई की है और उनका ब्रांच क्या था.
छोटे शहरों से स्कूलिंग और सिर्फ IIT जाने का जुनून
अरविंद केजरीवाल के पिता गोविंद राम केजरीवाल खुद एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे. पिता की नौकरी के चलते केजरीवाल का बचपन उत्तर भारत के अलग-अलग शहरों जैसे सोनीपत, गाजियाबाद और हिसार में बीता. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई हिसार के कैंपस स्कूल और सोनीपत के होली चाइल्ड स्कूल से पूरी की.
उनके पिता ने साल 20211 में 'द कैरवां मैगजीन' से कहा था कि 'अरविंद बचपन से ही वह किताबों के इतने शौकीन थे कि जब घर में कोई मेहमान आता था, तो ज्यादा मेलजोल बढ़ाने के बजाय बाथरूम में जाकर अपनी किताबें पढ़ने लगते थे. साल 1985 में जब स्कूली पढ़ाई खत्म हुई, तो उन्होंने ठान लिया कि उन्हें सिर्फ और सिर्फ IIT ही जाना है.' पिता ने बैकअप के लिए स्टेट इंजीनियरिंग कॉलेज का फॉर्म भरने की सलाह दी, लेकिन अरविंद ने साफ मना कर दिया था.
अरविंद केजरीवाल ने किस IIT और ब्रांच से पढ़ाई की
साल 1985 में IIT की बेहद कठिन परीक्षा में अरविंद केजरीवाल ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 563 हासिल की. उन्हें देश के सबसे टॉप इंस्टीट्यूट में से एक आईआईटी खड़गपुर (IIT Kharagpur) में एडमिशन मिला. उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग से पढ़ाई की. साल 1989 में उनकी डिग्री कंप्लीट हुई थी.
टाटा स्टील की नौकरी और फिर बने IRS
आईआईटी से निकलते ही देश की दिग्गज कंपनी टाटा स्टील ने उन्हें नौकरी दी. जमशेदपुर में उन्हें असिस्टेंट इंजीनियर की नौकरी मिली, लेकिन अरविंद का मन सिर्फ कॉर्पोरेट नौकरी में नहीं मानने वाला था. वह कुछ बड़ा करना चाहते थे. सिर्फ तीन साल नौकरी करने के बाद, उन्होंने साल 1992 में टाटा स्टील से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली आकर सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए. उनके पिता बताते हैं कि अरविंद पुलिस सेवा (IPS) जॉइन करना चाहते थे, लेकिन उनका स्कोर उन्हें भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की तरफ ले गया.
मसूरी में ट्रेनिंग और लाइफ पार्टनर से मुलाकात
केजरीवाल ने एग्जाम क्लियर किया और साल 1995 में असिस्टेंट इनकम टैक्स कमिश्नर के रूप में अपनी सेवा शुरू की. जब वह आईआरएस की ट्रेनिंग के लिए मसूरी गए, तो वहीं उनकी मुलाकात सुनीता से हुई, जो आगे चलकर उनकी पत्नी बनीं. ट्रेनिंग के बाद दोनों की पोस्टिंग दिल्ली के इनकम टैक्स विभाग में हुई.
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