- रेप और बच्चों के खिलाफ अपराध पर धाराएं बदली गईं
- संगठित अपराध की भी पहली बार की गई व्याख्या
- नए कानून में अब पुलिस की भी जवाबदेही तय होगी
लोकसभा में 3 नए क्रिमिनल बिल पास हो गए हैं. आपराधिक संशोधन विधेयकों पर चर्चा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) के जवाब के दौरान विपक्ष के कुल 97 सांसद अनुपस्थित रहे. इन्हें निलंबित किया गया है. नए क्रिमिनल बिलों (New Criminal Bills) को अब राज्यसभा में रखा जाएगा. वहां से पास होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा.
लोकसभा में 3 नए क्रिमिनल बिल पर जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- "अंग्रेजों के समय का राजद्रोह कानून खत्म किया गया है. नाबालिग से रेप और मॉब लिंचिंग जैसे क्राइम में फांसी की सजा दी जाएगी." 3 नए क्रिमिनल बिल के लोकसभा में पास होते ही सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई.
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गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 3 नए क्रिमिनल लॉ बिल पर कहा, "मैं इन तीन विधेयकों को लेकर आया हूं. आपने उन्हें स्थायी समिति को भेजने की मांग की. समिति ने उसमें कई संशोधन करने की अपील की थी, इसीलिए मैं वो तीनों बिल वापस लेकर नए बिल लेकर आया हूं. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में पहले 485 धाराएं थी अब 531 धाराएं होंगी."
पुलिस की जवाबदेही होगी तय
अमित शाह ने कहा- "नए कानून में अब पुलिस की भी जवाबदेही तय होगी. पहले किसी की गिरफ्तारी होती थी, तो उसके परिवार के लोगों को जानकारी ही नहीं होती थी. अब कोई गिरफ्तार होगा तो पुलिस उसके परिवार को जानकारी देगी. किसी भी केस में 90 दिनों में क्या हुआ, इसकी जानकारी पुलिस पीड़ित को देगी."
तीनों बिल पीएम मोदी के विजन का हिस्सा
अमित शाह ने कहा, "ये तीनों क्रिमिनल कानून पीएम मोदी के विजन का हिस्सा हैं. जनता मांग करती थी कि हमें सजा नहीं चाहिए, हमें न्याय चाहिए. मोदी जी के नेतृत्व में आज हम वो कर रहे हैं. जब हम न्याय कहते हैं, तो इसमें बड़े पैमाने पर ध्यान जाता है. इसमें पीड़ित और आरोपी दोनों आ जाते हैं. दंड में लोग सिर्फ आरोपी की ओर देखते थे."
फॉरेंसिक जांच पर जोर
उन्होंने कहा कि कई लोगों ने अलग-अलग सुझाव दिए हैं, सबसे बड़ी बात है इस बिल में कई नई चीजों को जगह दी गई है. जांच को हमने फॉरेंसिक जांच को जोर दिया है. जांच में टेक्नोलॉजी का इस्तेतमाल किया जाएगा. आज के बाद देश में तीन प्रकार की न्याय प्रणाली है, इस बिल के पास होने के बाद देश में एक तरह की न्याय प्रणाली होगी."
गुलामी की मानसिकता से मुक्ति
शाह ने कहा कि इन विधेयकों के माध्यम से सरकार ने तीनों आपराधिक कानूनों को गुलामी की मानसिकता से मुक्त कराया है. उनका कहना था, "पहले के कानूनों के तहत ब्रिटिश राज की सलामती प्राथमिकता थी, अब मानव सुरक्षा, देश की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है." उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कांग्रेस पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि अगर मन इटली का है तो ये कानून कभी समझ नहीं आएगा, लेकिन अगर मन यहां का है तो समझ आ जाएगा.
भारतीय संविधान और भारत की जनता की चिंता
शाह ने कहा, "इस ऐतिहासिक सदन में करीब 150 साल पुराने तीन कानून, जिनसे हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली चलती है, उन तीनों कानूनों में पहली बार मोदी जी के नेतृत्व में भारतीयता, भारतीय संविधान और भारत की जनता की चिंता करने वाले बहुत आमूल-चूल परिवर्तन लेकर मैं आया हूं."
कांग्रेस पर कसे तंज
उन्होंने कहा, "मैं विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि आपने भी वर्षों देश में शासन किया है, आपने मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून क्यों नहीं बनाया? आपने मॉब लिंचिंग शब्द का इस्तेमाल सिर्फ हमें गाली देने के लिए किया, लेकिन सत्ता में रहे तो कानून बनाना भूल गए."
न्याय प्रणाली से जुड़े कानूनों का हुआ मानवीकरण
शाह के मुताबिक, आजादी के बाद पहली बार अपराध न्याय प्रणाली से जुड़े तीनों कानूनों का मानवीकरण होगा. गृहमंत्री शाह ने लोकसभा में ये भी कहा कि नये कानूनों में महिलाओं और बच्चों को प्रभावित करने वाले कानूनों को प्राथमिकता दी गई है, उसके बाद मानव अधिकारों से जुड़े कानूनों और देश की सुरक्षा से संबंधित कानूनों को प्राथमिकता दी गई है.
उन्होंने कहा, "हमने अनुच्छेद 370 हटाने का वादा किया था, हट गई...हमने कहा था कि राम मंदिर बनाएंगे, 22 जनवरी को वहां रामलला विराजमान होंगे...हमने कहा था कि महिलाओं को आरक्षण देंगे, हमने आरक्षण दिया...मुस्लिम माताओं-बहनों को न्याय दिलाने के लिए तीन तलाक को खत्म किया गया."
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