- तमिलनाडु में कांग्रेस के 5 MLA को हैदराबाद शिफ्ट किया गया है, हालांकि पार्टी TVK को समर्थन दे रही है
- टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद अब बहुमत के आंकड़े को पार करने के लिए संघर्ष कर रही है
- विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सहयोगी पार्टियों का समर्थन पत्र सौंपकर सरकार बनाने का दावा पेश किया है
तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक खींचतान लगातार जारी है. इस बीच कांग्रेस के सभी 5 विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट किए जाने की खबर है. हालांकि कांग्रेस विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर चुकी है. कांग्रेस ने सरकार गठन को लेकर राज्यपाल की तरफ से हो रही देरी के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन भी किया है.
समर्थन हासिल करने के प्रयासों के तहत, टीवीके ने द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम के नेतृत्व वाले गठबंधन के घटकों से संपर्क साधा था, तब कांग्रेस ने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम को बाहर से समर्थन देने का फैसला किया. कांग्रेस चुनावों के बाद द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम गठबंधन से अलग हो गई और विजय की पार्टी को अपना समर्थन दे दिया.

तमिलगा वेत्री कझगम, जो 23 अप्रैल के विधानसभा चुनावों में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, 234 सदस्यों वाली विधानसभा में 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार करने के लिए संघर्ष कर रही है.
इससे पहले टीवीके प्रमुख विजय ने शुक्रवार को कई विपक्षी दलों का समर्थन हासिल करने के बाद तमिलनाडु में सरकार बनाने का औपचारिक रूप से दावा पेश किया. 234 सदस्यों वाली विधानसभा में उनके गठबंधन की ताकत बहुमत के आंकड़े से ऊपर पहुंच गई है. विजय ने चेन्नई के राजभवन में तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सहयोगी पार्टियों और निर्दलीय समर्थकों के समर्थन पत्र सौंपे.

कांग्रेस पहली पार्टी थी जिसने विजय को समर्थन दिया और उसके पांच नवनिर्वाचित विधायकों ने टीवीके प्रमुख का समर्थन किया.
शुक्रवार शाम भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी टीवीके के नेतृत्व में सरकार बनाने की कोशिश को औपचारिक रूप से अपना समर्थन देने की घोषणा की.
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नई विधानसभा में इन चारों पार्टियों के दो-दो विधायक हैं, जिससे विजय खेमे की कुल ताकत 120 विधायकों तक पहुंच गई है, जो साधारण बहुमत से ऊपर है.
इस बीच, विजय को उन दो विधानसभा क्षेत्रों में से एक से इस्तीफा देना होगा, जहां से वे चुने गए थे. यह चुनाव आयोग के उन नियमों के अनुसार है जो किसी भी व्यक्ति को एक ही समय में दो सीटें रखने से रोकते हैं.
ये नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण हैं, जिसमें विजय अब अपनी पार्टी को चुनावी राजनीति में औपचारिक रूप से उतारने के एक साल से भी कम समय में राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने की कगार पर हैं.
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