सिनेमा में नायक तो राजनीति में 'जन नायक' बने विजय की पार्टी TVK का क्या है मतलब, क्या है इसकी आइडियोलॉजी?
टीवीके ने अपने अधिवेशन में 26 प्रस्ताव पारित किए थे. इनमें भ्रष्टाचार, परिवारवाद, राज्य अधिकारों और शिक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्र की बीजेपी और राज्य की तत्कालीन डीएमके सरकार दोनों की आलोचना की गई थी.
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय अब राजनीति के मैदान में भी धमाल मचा रहे हैं. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने पहली बार में ही जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 234 में से 108 सीटें जीतकर डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) जैसी पार्टियों को भी पीछे धकेल दिया. सिनेमा जगत में नायक थलपति विजय राजनीति में 'जन नायक' बन गए. विजय ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. खुद वो पेरंबुर और तिरुचिरापल्ली दोनों सीटों पर जीते.
विजय राजनीति में कब आए?
दक्षिण भारतीय सिनेमा के कई बड़े सितारे राजनीति में सक्रिय रहे हैं. विजय ने भी इसी राह पर चलते हुए 2 फरवरी 2024 को अपनी पार्टी टीवीके की औपचारिक घोषणा की. कोविड महामारी के बाद से ही वे राजनीति में रुचि दिखा रहे थे. ऐसे में साल 2024 में सही समय देखकर उन्होंने पार्टी बनाई और साल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया. उसी दिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से संन्यास लेने का भी ऐलान कर दिया.

टीवीके पार्टी के नाम का क्या है मतलब?
टीवीके (TVK) का मतलब है 'तमिलगा वेत्री कझगम' (Tamilaga Vettri Kazhagam).
- तमिलगा (Tamilaga): इसका अर्थ है 'तमिलनाडु' या 'तमिल लोगों का'
- वेत्री (Vettri): इसका मतलब है 'जीत' या 'विजय'
- कजगम (Kazhagam): इसका अर्थ है 'संघ' या 'संगठन'
- यानी 'तमिलनाडु विजय संगठन'
घोषणापत्र में महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए कई वादे
विजय ने अप्रैल 2026 में घोषणापत्र जारी किया था, जिसमें कई बड़े वादे किए गए. उन्होंने कहा कि घर की महिला मुखिया को हर महीने 2,500 की आर्थिक मदद और साल में 6 मुफ्त गैस सिलेंडर दी जाएगी. वहीं, गरीब बेटियों की शादी के लिए 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी भी देंगे. विजय के पास बेरोजगार युवाओं के लिए भी बहुत कुछ है. उन्होंने स्नातकों को 4 हजार रुपए और डिप्लोमा करने वालों को 2,500 रुपए का मासिक भत्ता देने का भी ऐलान किया है. साथ ही बिना गारंटी के लोन, छोटे किसानों का कर्ज माफ और हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की भी घोषणा की. विजय ने कहा था कि राजनीति उनके लिए शौक नहीं, बल्कि ‘पवित्र सेवा' है.

टीवीके की विचारधारा क्या है?
विजय ने भ्रष्टाचार, परिवारवाद और विभाजनकारी राजनीति के विरोध को एजेंडे में रखा. अक्टूबर 2024 में आयोजित पहले महाधिवेशन में ही टीवीके ने अपनी वैचारिक पहचान 'सेक्युलर सोशल जस्टिस' के रूप में तय की. टीवीके ने तमिल अस्मिता, सामाजिक न्याय, महिलाओं और युवाओं का सशक्तीकरण तथा राज्य को अधिक अधिकार देने की मांग के साथ पार्टी को आगे ले जाने की बात कही थी. विजय ने उसी मंच से खुलकर कहा था, 'डीएमके हमारा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी है और बीजेपी वैचारिक शत्रु'. इसी रुख ने पार्टी को चुनाव तक दोनों बड़े गठबंधनों, इंडिया (INDIA) और एनडीए (NDA) से दूर खड़ा.
टीवीके ने अपने अधिवेशन में 26 प्रस्ताव पारित किए थे. इनमें भ्रष्टाचार, परिवारवाद, राज्य अधिकारों और शिक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्र की बीजेपी और राज्य की तत्कालीन डीएमके सरकार दोनों की आलोचना की गई थी. इसमें शिक्षा को राज्य सूची में वापस लाने की मांग भी शामिल थी.

निजी जीवन में भी झेली मुश्किलें
राजनीतिक सफर की शुरुआत विजय के लिए आसान नहीं रही, उसी समय उनका निजी जीवन भी अशांत चल रहा था. उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम ने तलाक की अर्जी दायर कर दी. 27 साल पुरानी शादी में आई इस दरार ने पूरे तमिलनाडु को चौंका दिया. संगीता ने विजय पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का आरोप भी लगाया. उनका मानना है कि पिछले दो साल से वह रिश्ते को सुधारने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन सफलता नहीं मिली. दोनों की साल 1999 में शादी हुई थी. दंपति के दो बच्चे हैं बेटा जेसन संजय और बेटी दिव्या साशा.

1984 में बाल कलाकार के तौर पर फिल्मी सफर की शुरुआत
विजय ने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1984 में बाल कलाकार के तौर पर की थी. उनकी पहली फिल्म ‘वेट्री' उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर द्वारा निर्देशित थी. उन्होंने कई फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया और 1992 में ‘नालैया थीरपु' से बतौर लीड एक्टर डेब्यू किया. 1996 में फिल्म ‘पूवे उनाक्कागा' ने उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में स्थापित किया. इसके बाद उन्होंने दर्जनों हिट फिल्में दीं और थलपति के नाम से मशहूर हुए.
इसे भी पढ़ें: दशकों में पहली बार... अभिनेता से नेता और अब CM तक का सफर, आंकड़ों में समझें कितनी बड़ी है विजय की विक्ट्री

तमिलनाडु में 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को चुनाव हुए थे और चार मई को मतगणना हुई थी. विजय के नेतृत्व वाली टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि द्रमुक 59 और अन्नाद्रमुक को 47 सीटें मिलीं. टीवीके को 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 10 और विधायकों की जरूरत है.
इसे भी पढ़ें: तमिलनाडु में शानदार जीत पर विजय की पहली प्रतिक्रिया- 'तब कई लोग हमारा मजाक उड़ाते थे'
इसे भी पढ़ें: TVK की बड़ी जीत के बाद अब तमिलनाडु में द्रविड़ियन पॉलिटिक्स का क्या होगा?
-
किस्सा यूपी का: तीसरे CM चंद्रभानु गुप्ता, जो खुद खुलेआम कहते थे- 'गली-गली में शोर है, CB गुप्ता चोर है'
'किस्सा यूपी का' सीरीज की तीसरी किस्त में आज बात यूपी के तीसरे सीएम चंद्रभानु गुप्ता की. जिन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ तो चार बार ली, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल कभी पूरा नहीं कर सके.
-
Explainer: देश में E20 पर ऐतराज... लेकिन पंजाब के किसान सरकार की इस नीति से क्यों हैं खुश?
एथेनॉल प्लांट बड़ी मात्रा में मक्का खरीद रहे हैं, इस वजह से मक्के के दाम बढ़े हैं। इस बढ़े हुए दाम से ही छोटे किसानों को सीधा फायदा पहुंच रहा है.
-
जम्मू-कश्मीर में 370 के खात्मे ने बदली तस्वीर! आतंकी घटनाओं में 77% की कमी, खत्म हुई पत्थरबाजी
पांच अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त किया था. गृह मंत्री अमित शाह ने ही दोनों सदनों में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश किया था.
-
Explainer: क्यों सबसे ज्यादा आबादी होने के बाद भी पंजाब में कमजोर हैं दलित, राजनीति में तो किनारे ही लगे
आखिर पंजाब की आबादी में एक तिहाई हिस्सेदारी होने के बाद भी दलित राजनीति कमजोर क्यों है. आइए जानते हैं, इसकी वजहें...
-
किस्सा यूपी का: कांग्रेसी CM संपूर्णानंद, जिन्होंने नेहरू की आपत्ति के बाद भी गोहत्या पर लगाया था बैन
'किस्सा यूपी का' की दूसरी कड़ी में आज बात उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद की, जिन्होंने अपने जीवन काल में 45 पुस्तकें लिखी. पंडित नेहरू से नाराजगी के बाद भी गो हत्या को बैन किया. बनारस का नाम बदलकर वाराणसी की. लेकिन इनका अंत बेहद गरीबी में हुआ.
-
ट्रंप के गाजा समझौते में क्या है? तुर्की-कतर भी खुश, इजरायल का पक्ष मजबूत, फिर नेतन्याहू को क्यों टेंशन
ट्रंप इस समझौते को एक क्रांतिकारी समझौता बता रहे हैं और साफ तौर पर इजरायल को इसके लिए मना रहे हैं. शुक्रवार को उन्होंने दावा किया कि यरूशलेम इस समझौते से "बहुत खुश" है, जबकि इसके विपरीत संकेत मिल रहे हैं.
-
जापान दूसरे विश्व युद्ध के बाद अपनी पहली सेंट्रलाइज्ड इंटेलिजेंस एजेंसी शुरू कर रहा है, जानिए क्यों महत्वपूर्ण
जापान को नए और बड़े खतरों का सामना करना पड़ रहा है. समुद्र के उस पार उत्तर कोरिया, चीन और रूस हैं. इन सभी के पास जासूसी की ऐसी ताकतवर क्षमताएं हैं, जिनसे निपटने के लिए जापान पूरी तरह तैयार नहीं है.
-
रामायण ट्रेलर विवाद: वाल्मीकि और तुलसीदास ने सीता की सुंदरता का वर्णन कैसे किया?
वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास की रामचरितमानस में भी माता सीता की सुंदरता का जो वर्णन किया गया है, वो इतना भव्य है कि उसे कभी भी सिर्फ शारीरिक आकर्षण तक सीमित नहीं किया जा सकता.
-
गोविंद वल्लभ पंत: पंडित नेहरू के बदले खाई लाठी, प्रदेश के पहले CM बने तो अपना हर खर्च खुद उठाया
देश की आजादी के बाद गोविंद वल्लभ पंत ने उत्तर प्रदेश की कमान संभाली. बाद में सरदार वल्लभ भाई पटेल के निधन के बाद वो केंद्र सरकार में गृह मंत्री भी बने. गोविंद वल्लभ पंत जवाहर लाल नेहरू के करीबियों में से एक माने जाते हैं. ऐसे में उनके जीवनकाल में कई ऐसी घटनाएं हैं जो बेहद दिलचस्प है.
-
अब DU में प्रोटेस्ट! CJP आंदोलन से जुड़े यूनिवर्सिटी के सर्कुलर के खिलाफ छात्रों का धरना, क्या हैं डिमांड्स?
सीजेपी प्रोटेस्ट में छात्रों के शामिल होने से जुड़ा आदेश सिर्फ दिल्ली विश्वविद्यालय ने नहीं जारी किया था. जेएनयू, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अलावा और भी कई संस्थानों ने छात्रों को जंतर-मंतर न जाने की नसीहत दी थी.