ताजमहल के लेकर एक बार फिर कानूनी दांव-पेच शुरू हो चुके हैं. ताजमहल परिसर के भीतर ‘भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय' मंदिर होने का दावा करते हुए एक याचिका दाखिल की गई है.
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया है. अदालत ने सभी पक्षों को इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का समय दिया है.
क्या है पूरा मामला और याचिकाकर्ताओं की मांग?
यह कानूनी लड़ाई तब और दिलचस्प हो गई जब आगरा की निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने विवादित परिसर का वैज्ञानिक या एडवोकेट कमिश्नर के जरिए सर्वे कराने की मांग को खारिज कर दिया था. आगरा के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज और उससे पहले सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने से साफ इनकार कर दिया था.
अब याचिकाकर्ताओं ने सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है. इस याचिका के माध्यम से मांग की गई है कि आगरा की ट्रायल कोर्ट और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज की ओर से पारित किए गए पुराने आदेशों को पूरी तरह से रद्द किया जाए. इसके अलावा ताजमहल परिसर की वास्तविकता और धार्मिक प्रतीकों की जांच के लिए एडवोकेट कमिश्नर द्वारा निष्पक्ष सर्वेक्षण कराया जाए.
कोर्ट रूम में क्या हुआ?
इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई. अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश कीं. अधिवक्ता सौम्या श्रीवास्तव ने खुद कोर्ट रूम में मौजूद रहकर पक्ष रखा.
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब गेंद केंद्र सरकार और एएसआई के पाले में है. तय समय सीमा के भीतर इन सभी प्रतिवादियों को कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल करना होगा. एएसआई का जवाब इस मामले में सबसे अहम माना जा रहा है क्योंकि ताजमहल की देखरेख और उसका इतिहास पूरी तरह से उसी के दस्तावेजों के अधीन है.
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