- समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी कैबिनेट विस्तार को केवल समय बिताने वाला कार्य बताया है.
- उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार में राज्य सरकार की वास्तविक भूमिका नहीं होती, निर्णय बाहर से लिए जाते हैं.
- अखिलेश यादव ने भाजपा शासन में मुख्यमंत्री की भूमिका को केवल कूरियर या मैसेंजर के समान बताया है.
उत्तर प्रदेश में योगी कैबिनेट विस्तार को लेकर सियासत तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर तीखा तंज कसा है और इसे महज ‘समय बिताने का काम' बताया है. उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार में राज्य सरकार की कोई वास्तविक भूमिका नहीं होती है, बल्कि फैसले बाहर से तय होते हैं और यहां सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है. अखिलेश यादव ने भाजपा शासन में मुख्यमंत्री की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को एक एक्स पोस्ट में योगी कैबिनेट विस्तार को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है. मुख्यमंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाते अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा कि भाजपा शासन में CM की स्थिति कूरियर-मैसेंजर जैसी हो गई है, जहां पर ऊपर से पर्ची आती है और यहां पर सिर्फ पढ़ी जाती है.
समय बिताने के लिए करना है कुछ काम!
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 10, 2026
वैसे भी मंत्रिमंडल के विस्तार में तो इनका कोई काम है नहीं। उधर से पर्ची आएगी, यहाँ तो सिर्फ़ पढ़ी जाएगी। भाजपा राज में वैसे भी CM का मतलब बस यही रह गया है : Courier-Messenger.
वैसे जनता पूछ रही है कि फ़िल्म सबसे आगे बैठकर देखेंगे या पीछे…
नैतिकता और राजनीति के संबंधों पर भी रखी बात
सपा प्रमुख ने यहीं नहीं रुके. उन्होंने अपनी पोस्ट में तंज कसते हुए कहा कि जनता पूछ रही है कि कैबिनेट विस्तार की फिल्म आगे बैठकर देखी जाएगी या पीछे बैठकर. जनता का अनुरोध है कि इस फिल्म को ध्यान से देखिएगा, हो सकता है कि ‘कर्मफल-कंसफल' का सिद्धांत समझकर कुछ जागरण हो जाए और कुछ अच्छा बदलाव भी.
अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव ने नैतिकता और राजनीति के संबंध को लेकर अपनी बात रखी और कहा कि हम तो यही मानते हैं कि मूल रूप से व्यक्ति नहीं उसका ‘लालच-लोभ' ही बुरा होता है, जो धीरे-धीरे उसका दुराचरण बन जाता है. बुराई इंसान को और बुरा बनाती जाती है.
स्वार्थ और परमार्थ का जिक्र कर साधा निशाना
इसके साथ ही अखिलेश यादव के पोस्ट में स्वार्थ और परमार्थ का जिक्र कर भी योगी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि ये भी सच है कि जब व्यक्ति ‘स्वार्थ' को छोड़कर ‘परमार्थ' के मार्ग पर चल निकलता है तो सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है, वो मानवता के लिए सार्थक साबित हो सकता है. अपने अंदर की सौ बुराइयों के ऊपर चंद अच्छाइयां जीत हासिल कर सकती हैं, यही महाकाव्यों का गहरा आंतरिक संदेश है.
उन्होंने कहा कि अपनी गलतियों और दुर्भावनाओं के लिए प्रायश्चित करने का कोई स्थान नियत नहीं होता है, इसके लिए अंदर का प्रकाश चाहिए जो सैकड़ों लोगों के बीच ‘अंधेरे बंद परिसर' में भी हो सकता है. आखिर में उन्होंने लिखा- तमसो मा ज्योतिर्गमय.
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