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अखिलेश यादव 'कटियाबाज'... बिजली चोरी को लेकर सपा पर निशाना, चौराहों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स

उत्‍तर प्रदेश में बिजली चोरी को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा गया है. कई जगह बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिनमें अखिलेश यादव को कटियाबाज बताया गया है.

अखिलेश यादव 'कटियाबाज'... बिजली चोरी को लेकर सपा पर निशाना, चौराहों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स
  • राजधानी और कई जिलों में SP पर बिजली चोरी और तुष्टिकरण के आरोप लगाते हुए विवादित होर्डिंग्स लगाए गए हैं
  • होर्डिंग्स में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को कटियाबाज और अन्य नेताओं को बिजली चोर बताया गया है
  • आरोप है कि सपा शासन में त्योहारों के आधार पर बिजली सप्लाई में भेदभाव होता था और बिजली चोरी को बढ़ावा दिया गया
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लखनऊ:

समाजवादी पार्टी पर बिजली चोरी और तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए राजधानी समेत कई जिलों में विवादित होर्डिंग्स लगाए गए हैं. इन होर्डिंग्स में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को ‘कटियाबाज' बताया गया है, जबकि वरिष्ठ नेता आजम खान और सांसद शफीकुर्रहमान बर्क को ‘बिजली चोर' कहा गया है. होर्डिंग्स में सपा शासनकाल पर सीधा हमला किया गया है. आरोप लगाया गया कि सपा राज में बिजली सप्लाई में तुष्टिकरण होता था. 

‘रमजान में बिजली फुल, दीवाली पर बिजली गुल'... पोस्टरों में लिखा है कि सपा सरकार के दौरान त्योहारों के आधार पर बिजली दी जाती थी और कुछ इलाकों को प्राथमिकता मिलती थी. इसके साथ ही होर्डिंग्स पर सपा नेताओं के खिलाफ दर्ज बिजली चोरी के मुकदमों का भी जिक्र किया गया है. आरोप है कि सपा के शासन में नेताओं ने खुद बिजली चोरी को बढ़ावा दिया और सार्वजनिक मंचों से ऐसे बयान दिए जिससे लोगों को बिजली चोरी के लिए उकसाया गया. पोस्टर में ऐसे बयानों के अंश भी छापे गए हैं. 

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यूपी में बिजली चोरी रही है बड़ी समस्‍या 

आजम खान का नाम लेकर दावा किया गया है कि उनके खिलाफ बिजली चोरी के मामले दर्ज हैं. होर्डिंग लगाने वालों ने अखिलेश यादव को ‘कटियाबाज' कहकर कटाक्ष किया है. ‘कटिया' का मतलब अवैध तरीके से बिजली का कनेक्शन लेना होता है. कुछ सालों पहले यूपी में ये मुद्दा इतना गरमाया हुआ था कि इस पर एक बॉलीवुड फिल्‍म भी बन चुकी है. हालांकि, यूपी में बीजेपी सरकार आने के बाद हालात में काफी सुधार आया है.  

हालांकि, इन होर्डिंग्स पर किसी संगठन या व्यक्ति का नाम नहीं लिखा है. इन्हें शहर के प्रमुख चौराहों और बिजली दफ्तरों के आसपास लगाया गया है. सपा की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह विपक्ष की साजिश है और चुनाव से पहले माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है. बिजली विभाग ने भी साफ किया है कि अब सप्लाई में कोई भेदभाव नहीं होता. 

स्‍मार्ट मीटर पर फिलहाल रोक
 

वैसे बता दें कि इन दिनों यूपी में स्‍मार्ट मीटर का मुद्दा गरमाया हुआ है. इसे लेकर कई जिलों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. इसके बाद यूपी में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद को देखते हुए अब नए स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी गई है. अब तक प्रदेश में लगभग 80 लाख मीटर लगे हैं, लेकिन अब इससे ज़्यादा स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जायेंगे. फिलहाल मंत्रालय ने चार सदस्यीय समिति का गठन कर स्मार्ट मीटर्स को लेकर आ रही शिकायतों की जांच कराना शुरू कर दिया है. इस समिति की रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि आगे ये मीटर्स लगाने हैं या नहीं. 

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