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94 तक पहुंची ओवैसी की पार्टी, मुंबई, नांदेड़ समेत कई मुस्लिम बहुल इलाकों में AIMIM ने दिखाया जलवा

दोपहर 2 बजे तक के रुझानों में AIMIM 67 सीटों पर आगे दिखी, जो इस बात का संकेत है कि राज्य के मुस्लिम‑बहुल और दलित‑बहुल शहरी इलाकों में पार्टी की पकड़ बढ़ी है. यह प्रदर्शन कांग्रेस और NCP (शरद पवार) के लिए चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि उनके परंपरागत वोट बैंक में AIMIM ने सेंध लगाई है.

94 तक पहुंची ओवैसी की पार्टी, मुंबई, नांदेड़ समेत कई मुस्लिम बहुल इलाकों में AIMIM ने दिखाया जलवा
  • महाराष्ट्र के 29 नगर निगम चुनावों में 3.48 करोड़ मतदाताओं ने 15,931 उम्मीदवारों का भाग्य तय किया.
  • महायुति गठबंधन ने अधिकांश प्रमुख नगर निगमों में बढ़त बनाई, जबकि उद्धव-राज ठाकरे गठबंधन कमजोर रहा.
  • AIMIM ने पहली बार अहिल्यानगर और चंद्रपुर नगर निगमों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई और 67 सीटों पर बढ़त बनाई.
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महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव नतीजों में असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली पार्टी एआईएमआईएम के लिए भी अच्छी खबर है. रुझानों और जीते वार्डों को मिला दें तो ओवैसी की पार्टी 94 के आंकड़े में पहुंच गई है. ओवैसी को सबसे ज्यादा फायदा संभाजी नगर निगम चुनाव में देखने को मिल रहा है, जहां पार्टी 33 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गई है. संभाजी नगर का पहले नाम औरंगाबाद था, जहां से एआईएमआईएम का सांसद रह चुका है.

संभाजी नगर-33
अमरावती-15
नांदेड-14
धुले-10
जालना-2

 बीएमसी में एआईएमआईएम ने दो सीटें जीती हैं. नांदेड़ में पार्टी 14 सीटों पर आगे है. चुनाव में सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM का रहा. अहिल्यानगर और चंद्रपुर नगर निगमों में पार्टी ने पहली बार मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. अहिल्यानगर में AIMIM ने 3 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि चंद्रपुर में पार्टी ने अपना पहला प्रतिनिधि चुने जाने का रिकॉर्ड बनाया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सफलता AIMIM को महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक नई पहचान दे सकती है.

ओवैसी की पार्टी कहां आगे

मालेगांवः ओवैसी की पार्टी 20 सीटों के साथ नंबर 1. शिवसेना 18, समाजवादी पार्टी 6 सीटों पर आगे.

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लगभग नौ साल बाद हुए इन चुनावों में इस बार मुकाबला ज्यादा तीखा, बहुकोणीय और अप्रत्याशित रहा. राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन चुनावों में 3.48 करोड़ मतदाताओं ने 15,931 उम्मीदवारों का भाग्य तय किया, जिसमें मुंबई, पुणे, नागपुर, ठाणे, नवी मुंबई, कोल्हापुर जैसे प्रमुख शहरी केंद्र शामिल थे. मतदान के बाद सामने आए रुझानों से साफ होता है कि मतदाताओं ने शहरी मुद्दों को केंद्र में रखकर अपने प्रतिनिधि चुने हैं.

इन निकाय चुनावों का सबसे बड़ा राजनीतिक आयाम यह रहा कि भाजपा‑शिंदे के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन लगभग सभी प्रमुख नगर निगमों में बढ़त बनाए हुए है. शुरुआती रुझानों में महायुति गठबंधन 1200 से अधिक सीटों पर आगे दिखा, जबकि उद्धव ठाकरे‑राज ठाकरे के गठबंधन को मिलकर भी 120 से कम सीटों पर बढ़त मिल सकी. यह स्पष्ट संकेत है कि मुंबई से लेकर विदर्भ तक भाजपा की शहरी पकड़ मजबूत बनी हुई है.

75 सीटों पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी

दोपहर 2 बजे तक के रुझानों में AIMIM 67 सीटों पर आगे दिखी, जो इस बात का संकेत है कि राज्य के मुस्लिम‑बहुल और दलित‑बहुल शहरी इलाकों में पार्टी की पकड़ बढ़ी है. यह प्रदर्शन कांग्रेस और NCP (शरद पवार) के लिए चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि उनके परंपरागत वोट बैंक में AIMIM ने सेंध लगाई है. निकाय चुनावों में यह उभार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है.

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कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के निकाय चुनाव 2026 ने यह संदेश दिया है कि राज्य की शहरी राजनीति अब पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी, विविध और अनिश्चित हो गई है. महायुति की बढ़त, AIMIM का उभार और उद्धव गुट की कमजोर होती पकड़- ये तीन संकेत आने वाले महीनों में राज्य की सत्ता राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं.

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