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This Article is From Sep 27, 2025

देश के इस गांव में 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' की पुष्टि, एक किलोमीटर का इलाका सील, जानिए कितना है खतरनाक

त्रिशूर जिले के एक गांव में ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ के प्रकोप की पुष्टि के बाद अधिकारियों ने प्रभावित फार्म के चारों ओर एक किलोमीटर के दायरे को संक्रमित क्षेत्र घोषित कर दिया और उसके चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे पर निगरानी की जा रही है.

देश के इस गांव में 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' की पुष्टि, एक किलोमीटर का इलाका सील, जानिए कितना है खतरनाक
  • केरल के त्रिशूर जिले के मुलनकुन्नाथुकावु पंचायत में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के संक्रमण की पुष्टि हुई है.
  • एक किलोमीटर के दायरे को संक्रमित क्षेत्र घोषित किया गया है और 10 किलोमीटर के दायरे में निगरानी की जा रही है.
  • जिलाधिकारी ने संक्रमित क्षेत्र से सूअर के मांस की बिक्री और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है.
नई दिल्‍ली :

केरल के त्रिशूर जिले के एक गांव में ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर' के प्रकोप की पुष्टि हुई है. अधिकारियों के अनुसार, भोपाल की एक सरकारी प्रयोगशाला में किए गए परीक्षण के बाद मुलनकुन्नाथुकावु पंचायत के वार्ड नंबर छह में सूअरों में संक्रमण की पहचान हुई है. उन्होंने बताया कि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल को तैनात किया गया है. साथ ही एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि पशुपालन विभाग के नेतृत्व में टीम ने बीमारी को फैलने से रोकने के लिए अभियान शुरू कर दिया है.

अधिकारियों ने प्रभावित फार्म के चारों ओर एक किलोमीटर के दायरे को संक्रमित क्षेत्र घोषित कर दिया और उसके चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे पर निगरानी की जा रही है.

सूअर के मांस और बिक्री पर रोक के आदेश 

जिलाधिकारी अर्जुन पांडियन ने संक्रमित क्षेत्रों से सूअर के मांस की बिक्री और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है.

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. इसाक सैम ने स्पष्ट किया कि यह बीमारी केवल सूअरों को प्रभावित करती है और यह अन्य पशुओं या मनुष्यों में नहीं फैलती है.

इस तरह से समझिए अफ्रीकी स्वाइन फीवर को 

  • अफ़्रीकी स्वाइन फीवर (ASF) घरेलू और जंगली सूअरों में फैलने वाला एक बेहद संक्रामक वायरल रोग है. इसकी मृत्यु दर 100 प्रतिशत तक पहुंच सकती है.
  • संक्रमण का पहली बार 1920 में अफ्रीका में पता चला था.  
  • यह मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं है. हालांकि सूअरों की आबादी और कृषि अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत ही विनाशकारी प्रभाव पड़ता है. 
  • यह वायरस प्राकृतिक वातावरण में अत्यधिक प्रतिरोधी है, जिसका अर्थ है कि यह कपड़ों, जूतों, पहियों और अन्य सामग्रियों पर जीवित रह सकता है. 
  • यह विभिन्न प्रकार के सूअर के मांस से बने उत्पादों, जैसे हैम, सॉसेज या बेकन में भी जीवित रह सकता है. 
  • इससे बचाव के लिए, विशेषज्ञ उन फार्मों पर गहन सफाई, कीटाणुशोधन और सैनिटाइजेशन का सुझाव देते हैं, जहां इसके मामले सामने आए हैं. 
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