सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अधिकारियों पर लगे आरोप गम्भीर हैं क्योंकि उनकी वजह से राजकोष को काफी नुकसान पहुंचा लेकिन उन्हें अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
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नई दिल्ली:
2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में पांच कारपोरेट अधिकारियों की जमानत मंजूर करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अधिकारियों पर लगे आरोप गम्भीर हैं क्योंकि उनकी वजह से राजकोष को काफी नुकसान पहुंचा लेकिन उन्हें अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी एवं न्यायमूर्ति एचएल दत्तू की खंडपीठ ने कहा, "हम इस तथ्य से भलीभांति परिचित हैं कि अधिकारियों पर गम्भीर आर्थिक अपराध के आरोप लगे हैं। हम इस बात से भी अवगत हैं कि यदि ये आरोप साबित हो जाते हैं तो इससे देश की अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ सकती है।" न्यायालय ने हालांकि कहा, "यह न्याय के हित में नहीं है कि आरोपियों को अनिश्चित समय तक जेल में रखा जाए।" इस बात का उल्लेख करते हुए कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पहले ही अपनी जांच पूरी कर ली है और मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है, न्यायालय ने कहा, "इसलिए, आगे की पूछताछ के लिए आरोपियों की हिरासत में मौजूदगी आवश्यक नहीं हो सकती।" न्यायालय ने कहा कि इसलिए वे सख्त शर्तो पर जमानत पाने के हकदार हैं। ज्ञात हो कि मामले में पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा सहित 14 लोग आरोपी हैं जिनमें से पांच कारपोरेट अधिकारियों यूनिटेक वायरलेस के संजय चंद्रा, स्वान टेलीकॉम के विनोद गोयनका, रिलायंस समूह के गौतम दोषी, सुरेंद्र पीपारा और हरि नायर को बुधवार को जमानत मिल गई।
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