- सुप्रीम कोर्ट ने 2021 की SI भर्ती पेपर लीक मामले में आरोपी जगदीश विश्नोई की जमानत से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की
- राजस्थान हाईकोर्ट ने जनवरी में विश्नोई को जमानत दी थी, जिसे राज्य सरकार ने चुनौती दी है.
- जांच में आरोपी की डायरी बरामद हुई जिसमें अभ्यर्थियों से धन के लेन-देन का विवरण लिखा था.
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की ओर से दायर उस विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर नोटिस जारी किया है, जिसमें 2021 की SI भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में आरोपी जगदीश विश्नोई को दी गई जमानत रद्द करने की मांग की गई है. राजस्थान हाईकोर्ट के इस वर्ष 16 जनवरी को विश्नोई को जमानत दे दी थी. राजस्थान सरकार ने इसे चुनौती देते हुए दलील दी थी कि गंभीर आरोपों एवं जांच में एकत्रित महत्वपूर्ण साक्ष्यों के बावजूद आरोपी को जमानत प्रदान कर दी गई. राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एस.डी. संजय एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए पेपर लीक की व्यापक साजिश में आरोपी की गंभीर भूमिका को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा. इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय करोल एवं न्यायमूर्ति कोटिश्वर सिंह की पीठ ने की.
25 अभ्यर्थियों का लीक पेपर से हो गया चयन
राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि जगदीश विश्नोई वर्ष 2021 की सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा से जुड़े संगठित पेपर लीक रैकेट का एक प्रमुख मास्टरमाइंड एवं किंगपिन था. राजस्थान एटीएस और एसओजी की जांच के अनुसार, आरोपी ने अन्य सह-आरोपियों एवं सेंटर सुपरिंटेंडेंट राजेश खंडेलवाल के साथ मिलकर कथित रूप से व्हाट्सएप के माध्यम से ₹10 लाख में गोपनीय प्रश्नपत्र पहले से प्राप्त किए, उन्हें हल करवाया तथा भारी धनराशि लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया. आगे यह भी सामने आया कि जिन 25 अभ्यर्थियों को लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाए गए थे, उनका अंततः भर्ती प्रक्रिया में चयन हो गया.
डायरी में लिखा था लेन-देन का ब्यौरा
राज्य सरकार की याचिका में आगे कहा गया कि जांच के दौरान आरोपी से एक अकाउंट डायरी बरामद हुई, जिसमें अभ्यर्थियों तथा धन के लेन-देन का विवरण दर्ज था. एफएसएल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि डायरी में लिखावट जगदीश विश्नोई की ही थी. अभियोजन पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी वर्ष 2008 से इसी प्रकार की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है तथा वह हिस्ट्रीशीटर है, जिसके विरुद्ध समान प्रकृति के 13 अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं.
139 आरोपी गिरफ्त में
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि इस व्यापक साजिश के संबंध में कुल 139 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा वर्तमान में मुकदमा आरोपों पर बहस के चरण में लंबित है, जिसमें लगभग 150 गवाहों के बयान अभी शेष हैं. राज्य सरकार ने तर्क दिया कि अपराध की संगठित प्रकृति, आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड एवं रैकेट में उसकी प्रभावशाली भूमिका को देखते हुए हाईकोर्ट को जमानत नहीं देनी चाहिए थी.
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