केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग के दौरान होने वाले हादसों की जिम्मेदारी फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (FTO) को लेनी होगी. सरकार की ओर से उन्हें हर संभव सहयोग दिया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि डीजीसीए (DGCA) इस समय उन हवाई पट्टियों का आकलन कर रहा है जहां निगरानी पर्याप्त नहीं है. कोशिश यह है कि सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत बनाया जाए, ताकि छोटी-छोटी लापरवाहियों के कारण होने वाले हादसों को रोका जा सके.
विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों पर भी केंद्रीय मंत्री ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि फिलहाल यह सरकार के लिए एक चुनौती है, लेकिन इसे अभी अस्थायी समस्या माना जा रहा है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो सरकार जरूरी कदम उठाने पर विचार करेगी.
सरकार की भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'Train in India, Fly in India' पहल के तहत पायलटों और विमानन क्षेत्र से जुड़े अन्य पेशेवरों की ट्रेनिंग भारत में ही देने पर जोर दिया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि सरकार ने वर्ष 2047 तक देश में 3,000 से ज्यादा विमानों का बेड़ा और 350 से अधिक एयरपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य रखा है. वहीं, अगले पांच वर्षों में 500 नए विमान भारतीय बेड़े में शामिल किए जाएंगे. वर्तमान में देश में करीब 860 विमान हैं, जबकि आने वाले समय में 1,640 नए विमानों की डिलीवरी भी होनी है.
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार इलेक्ट्रॉनिक पायलट लाइसेंस जारी करने जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो जाएगी. इसके अलावा नए फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर (FTO) भी बनाए जाएंगे. शुरुआत में हर नया FTO 60 से 70 ट्रेनिंग विमान रखेगा, जिसे बाद में बढ़ाकर 110 से 120 विमान तक किया जाएगा. शुरुआती चरण में हर साल 400 से 500 लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी.
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