- करनाल के बुजुर्ग डॉक्टर डॉ. हरकृष्ण सिंह पिछले डेढ़ साल से अकेले और गंभीर हालत में अपने घर में रह रहे थे
- उनके शरीर पर मल-मूत्र के कारण कीड़े चल रहे थे और वे कई महीनों से नहाए नहीं थे, कपड़े भी नहीं बदले थे
- डॉ. हरकृष्ण का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न होकर ऑस्ट्रेलिया में सेटल है, लेकिन उन्होंने पिता की सुध नहीं ली.
पत्नी, बेटा-बेटी विदेश में सेटल, घर में अकेले रह रहे बुर्जुग डॉक्टर के शरीर पर कीड़े चल रहे थे. बुर्जुग जिस कमरे में पड़े थे, वहां इतनी गंदगी थी कि दरवाजा खुलते ही आस-पास में बदबू फैल गई. जिस बुर्जुग डॉक्टर के जीवन के अंतिम दिन इस कदर तकलीफदेह थी, उन्होंने आजीवन लोगों का निःशुल्क इलाज किया था. लेकिन बुढ़ापे में उनके अपने परिवार के लोगों ने उनका साथ छोड़ दिया. आर्थिक रूप से संपन्न होने के बाद बुर्जुग डॉक्टर के अकेलेपन की यह कहानी समाज और परिवार के टूटते डोर की क्रूर सच्चाई बयां कर रही है.
हैरान करने वाला यह मामला करनाल से सामने आया है. जहां एक बुजुर्ग डॉक्टर डेढ़ साल से अकेले और गंभीर हालत में रह रहे थे. स्थानीय लोगों की सूचना पर एक संस्था की रेस्क्यू टीम ने उन्हें गंभीर स्थिति में बचाया है.
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे परिजनों ने नहीं ली सुध
इस घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है. बुजुर्ग डॉक्टर डॉ. हरकृष्ण सिंह पिछले डेढ़ साल से अपने घर में अकेले रह रहे थे. बड़ी ही दयनीय हालत में रेस्क्यू टीम उन्हें अपने साथ ले गई. हैरानी बात यह है कि ऐसा नहीं है कि बुजुर्ग डॉक्टर के परिवार में कोई नहीं है या फिर आर्थिक स्थिति ठीक न हो. उनका परिवार ऑस्ट्रेलिया में सेटल हैं. हालांकि उन्होंने कभी भी पिता का हाल जानने की कोशिश नहीं की.

रेस्क्यू टीम की महिला के सहारे से आश्रम में चलते डॉक्टर हरकृष्ण सिंह.
लंबे समय से कपड़े तक नहीं बदले थे
बताया जा रहा है कि बुजुर्ग डॉक्टर पिछले डेढ़ साल से बेहद उपेक्षित हालत में थे. उन्होंने लंबे समय से कपड़े तक नहीं बदले थे. घर में जो कुछ मिल जाता, वहीं खा लेते या कभी-कभी बाहर. आसपास के लोगों को जब उनकी स्थिति का अंदाजा हुआ तो रेस्क्यू टीम को सूचना दी गई. मौके पर पहुंची टीम भी उनकी हालत देखकर स्तब्ध रह गई. घर में अव्यवस्था, अकेलापन और स्वास्थ्य की गंभीर अनदेखी साफ दिखाई दे रही थी.
मल-मूत्र से लिपटे शरीर पर चल रहे थे कीड़े
दानवीर राजा कर्ण की नगरी करनाल में मरीजों का निःशुल्क इलाज करने वाले डॉ. हरकृष्ण की दयनीय हालत को देखकर हर कोई दंग रह गया. मीरा घाटी क्षेत्र के एक मकान से अपना आशियाना की टीम ने उनको बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया. जब टीम पहुंची तो डॉ. हरकृष्ण सिंह (75) एक खाट पर पड़े हुए थे. मल-मूत्र से लिपटे उनके बदन पर कीड़े चल रहे थे. हालत इतनी खराब थी कि टीम ने जैसे ही उनके पुराने जर्जर मकान का दरवाजा खोला तो गली में बदबू फैल गई.
लोगों को उनका हमेशा से साइकिल पर चलना और गंभीर बीमारियों का भी होम्योपैथिक पद्धति से निःशुल्क इलाज करना याद है. जीवन सेवा में गुजरा. भरा-पूरा परिवार है लेकिन पत्नी, बेटा और बेटी अलग होकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं. उनकी सेक्टर-8 में बड़ी कोठी भी है, जिसे किराए पर दिया हुआ है.

बुर्जुग डॉक्टर की हालत कितनी खराब हो गई थी, उनके पैर इसकी निशानी दे रहे. गौर करने वाली बात यह है कि यह तस्वीर रेस्क्यू किए जाने के बाद साफ-सफाई के बाद की है.
कई महीनों से नहाए नहीं थे, शरीर पर कई जख्म
पड़ोसियों ने बताया कि परिवार के लोगों ने कभी उनका हाल नहीं जाना. कई वर्षों से अकेले रह रहे हैं. कई महीनों से वह बाहर नहीं निकले थे इसलिए किसी का उन पर ध्यान नहीं गया. अपना आशियाना आश्रम के सेवादार राजकुमार ने बताया कि पता चलने पर उनकी टीम को उन्हें लेने भेजा गया था. अपना आशियाना आश्रम के सेवादार राजकुमार ने बताया कि जिस खाट पर डॉक्टर लेटे हुए थे. उस पर कीड़े चल रहे थे.
लोगों का निःशुल्क इलाज करते थे डॉ. हरकृष्ण सिंह
डॉ. हरकृष्ण सिंह ने बताया कि वह हर बीमारी का इलाज करते रहे हैं. उन्होंने निर्मल धाम, गुरुद्वारा सिंहसभा, अग्रवाल धर्मशाला, रामलीला सभा, मॉडल टाउन गुरुद्वारा और जैन सभा सहित सभी जगह की डिस्पेंसरियों में निःशुल्क सेवाएं दी हैं. पत्नी झगड़ा करने के बाद चली गई. बच्चे भी उनके साथ ही चले गए. पड़ोस के लोगों ने बताया कि बिदट् सुनार नाम का युवक डॉक्टर को खाना देकर जाता था.
अब आश्रम में रखकर बुर्जुग डॉक्टर का चल रहा इलाज
रेस्क्यू का एक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में एक संस्था के लोग बुजुर्ग डॉक्टर गंभीर हालत में उठाकर अपने साथ आश्रम ले जाते नजर आ रहे हैं. वीडियो में बुजुर्ग की बिगड़ी हुई सेहत का साफतौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है. बताया जा रहा है कि परिवार के लोगों के द्वारा छोड़कर जाने के बाद से ही बुजुर्ग काफी टूट गए थे. धीरे-धीरे बीमारियों ने उन्हें घेर लिया और फिर वह पूरी तरह से लाचार हो गए थे.
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