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बुलेटप्रूफ, मशीन गन माउंट से लेकर 360 डिग्री फायरिंग पोर्ट्स तक... भारतीय सेना के इस अभेद्य ट्रूप को जानिए

सुरक्षा के लिहाज से इसमें हाई लेवल बैलिस्टिक प्रोटेक्शन होगा. वाहन के सभी हिस्सों को सुरक्षा दी जाएगी. यह NATO STANAG लेवल-III के अनुसार होगा. इसमें छत पर गनर के लिए हैच होगा. यह 360 डिग्री तक घूम सकेगा.

बुलेटप्रूफ, मशीन गन माउंट से लेकर 360 डिग्री फायरिंग पोर्ट्स तक... भारतीय सेना के इस अभेद्य ट्रूप को जानिए
सेना ने 159 बुलेटप्रूफ ट्रूप कैरियर (BPTC) खरीदने की योजना बनाई है.
  • भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तैनात जवानों के लिए 159 बुलेटप्रूफ ट्रूप कैरियर खरीदने जा रही है.
  • ये वाहन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में 28 जवानों को सुरक्षित ले जाने के लिए 4x4 प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे.
  • वाहन की रफ्तार सड़क पर 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे और ऑफ-रोड में 50 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे होगी.
नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की पहाड़ियों पर अब भारतीय सेना के जवान पहले से कहीं अधिक सुरक्षित होंगे. साथ ही आधुनिक वाहनों में गश्त करते नजर आएंगे. क्योंकि भारतीय सेना अपने वाहनों को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है. सेना ने 159 बुलेटप्रूफ ट्रूप कैरियर (BPTC) खरीदने की योजना बनाई है. ये वाहन खास तौर पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में तैनात राष्ट्रीय राइफल्स ,सेक्टर और फ़ोर्स हेडक्वार्टर  के लिए होंगे. इसको लेकर 30 अप्रैल को रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन (RFI) जारी की गई.

बुलेटप्रूफ ट्रूप कैरियर (BPTC) की खासियतें

  • ये वाहन खासतौर पर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में 28 जवानों को एक साथ सुरक्षित ले जाने के लिए डिजाइन किए गए हैं. जिनमें मशीन गन माउंट से लेकर 360 डिग्री फायरिंग पोर्ट्स जैसी सुविधाएं मौजूद होंगी.
  • आरएफआई में डिलीवरी की शर्त भी तय की गई है. कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद हर साल कम से कम 60 वाहन देने होंगे. ये वाहन 4x4 प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे. इन्हें एक सुरक्षित बस की तरह डिजाइन किया जाएगा.
  • इसमें एक ड्राइवर, एक सह-चालक और 28 जवान बैठ सकेंगे. वाहन की पेलोड क्षमता करीब 3 टन होगी. इसका कुल वजन 20 टन से ज्यादा नहीं होना चाहिए.

सड़क पर 80 से 100 किमी होगी रफ्तार

ग्राउंड क्लीयरेंस कम से कम 200 मिमी होना जरूरी है. इन वाहनों को कठिन इलाकों में चलाने के हिसाब से तैयार किया जाएगा. सड़क पर इनकी रफ्तार 80 से 100 किमी प्रति घंटा होगी. ऑफ-रोड में 50 से 75 किमी प्रति घंटा की गति रखनी होगी. 

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5000 मीटर की ऊंचाई पर भी काम करने में होगा सक्षम

मैदान में इसकी रेंज कम से कम 350 किमी होनी चाहिए. पहाड़ी इलाकों में यह 300 किमी तक चल सके.
वाहन 5,000 मीटर तक की ऊंचाई पर काम करने में सक्षम होना चाहिए. इसमें तापमान -10 डिग्री से +40 डिग्री सेल्सियस तक सहने की क्षमता होगी.

छत पर गनर के लिए होगा 360 डिग्री मुवेवल हैच

सुरक्षा के लिहाज से इसमें हाई लेवल बैलिस्टिक प्रोटेक्शन होगा. वाहन के सभी हिस्सों को सुरक्षा दी जाएगी. यह NATO STANAG लेवल-III के अनुसार होगा. इसमें छत पर गनर के लिए हैच होगा. यह 360 डिग्री तक घूम सकेगा.

इन वाहनों की छत पर लगे होंगे 7.62 मिमी के मशीन गन

इस पर 7.62 मिमी मशीन गन लगाई जा सकेगी. इसके अलावा हर साइड में कम से कम चार फायरिंग पोर्ट होंगे. राष्ट्रीय राइफल्स फिलहाल पुराने सुरक्षा वाहनों का इस्तेमाल कर रही है. इनमें से कई वाहन काफी समय पहले खरीदे गए थे. 

नए BPTC से पुराने वाहनों की जगह ली जाएगी. इससे ऑपरेशन क्षमता भी बढ़ेगी. यह कदम बदलती सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया है. जाहिर है सेना इससे अपनी ताकत और सुरक्षा दोनों को मजबूत करना चाहती है.

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लेखक के बारे में
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राजीव रंजन
Editor - Defence & Political Affairs
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