क्या कोवैक्सीन दो साल के बच्चों पर काम करेगी? AIIMS प्रमुख ने कहा- दो-तीन महीने प्रतीक्षा करें

एम्स दिल्ली के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कई बच्चे जो कोविड के टीके के परीक्षण के लिए भर्ती होने आए थे, उनमें पहले से ही एंटीबॉडी थे

क्या कोवैक्सीन दो साल के बच्चों पर काम करेगी? AIIMS प्रमुख ने कहा- दो-तीन महीने प्रतीक्षा करें

एम्स के डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि बड़ी संख्या में बच्चों में एंटीबॉडी मिली हैं.

खास बातें

  • एम्स दिल्ली और पटना में बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल जारी
  • बच्चों के कोरोना से संक्रमित होने की संभावना कम
  • डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर सतर्कता बरतना जरूरी
नई दिल्ली:

अब से दो-तीन महीनों में भारत के विशेषज्ञों को पता चल जाएगा कि भारत बायोटेक का कोवैक्सीन (Covaxin) दो साल की उम्र के बच्चों पर काम करती है या नहीं. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोविड के खिलाफ टीके की प्रभावशीलता के परीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई है. डॉ गुलेरिया ने एनडीटीवी को बताया कि "भारत बायोटेक दो साल से 18 साल तक के बच्चों का टीकाकरण कर रहा है. यह पहले ही शुरू हो चुका है... कई बच्चों को पहले ही टीका लगाया जा चुका है."

उन्होंने कहा कि "अगले दो-तीन महीनों में हम यह कहने में सक्षम हो सकते हैं कि क्या ये टीके दो साल से कम उम्र के बच्चों पर भी काम करते हैं. और फिर उन्हें रेगुलेटरी एप्रूवल प्राप्त करना चाहिए. फाइजर के पास पहले से ही एप्रूवल है लेकिन यह कुछ अधिक आयु वर्ग के लिए है." 

एम्स दिल्ली और पटना ने पहले ही कोविड वैक्सीन के लिए बच्चों की भर्ती और परीक्षण शुरू कर दिया है. डॉ गुलेरिया ने यह भी कहा कि परीक्षण के लिए भर्ती हुए बच्चों में से बड़ी संख्या में बच्चों में पहले से ही एंटीबॉडी थे, जिससे संक्रमण के अगले संभावित उछाल में उनके प्रभावित होने की संभावना में काफी सुधार हुआ.

डॉ गुलेरिया के अनुसार, वर्तमान डेटा अभी भी बताता है कि बच्चों की तुलना में बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों वाले लोगों में मृत्यु दर अधिक है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ध्यान इस श्रेणी पर ही रहना चाहिए.

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डॉ गुलेरिया ने एनडीटीवी को बताया कि "यदि आप ट्रायल के हिस्से के रूप में हमारे द्वारा प्रकाशित वैक्सीन रिक्रूटमेंट डेटा और कुछ डेटा को भी देखें, तो बच्चों की एक बड़ी संख्या में पहले से ही एंटीबॉडी मिले, हालांकि उनमें संक्रमण का कोई सबूत नहीं था."

डॉ गुलेरिया ने कहा कि "परीक्षण के लिए आने वालों में से लगभग 50-60 प्रतिशत को भर्ती नहीं किया जा सका क्योंकि उनमें एंटीबॉडी थे ... इससे पता चलता है कि उनमें अच्छी मात्रा में इम्युनिटी है. यह चिंता कि 'अगली लहर उन्हें प्रभावित कर सकती है' सही नहीं है." 


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डेल्टा प्लस के एक कोविड वेरिएंट के रूप में उभरने को लेकर चिंता का जिक्र करते हुए अनुभवी डॉक्टर ने कहा कि वर्तमान में मामलों की संख्या, बीमारी, मृत्यु दर या एंटीबॉडी के प्रभाव की गंभीरता इसके निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बहुत कम थी. हालांकि उन्होंने सतर्कता पर जोर दिया ताकि देश में इस वायरस को फैलने से रोका जाए. उन्होंने कहा, "हमें उन कार्यों में पीछे नहीं रहना चाहिए, जिन्हें हमें इस प्रकार के अधिक संक्रामक होने और फैलने की स्थिति में करने की आवश्यकता है."