कांग्रेस से अलग होकर भी क्या अपनी साख कायम रख पाएंगे Captain Amarinder Singh 

कैप्‍टन अमरिंदर सिंह दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पहले, 2002 से 2007 तक उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और फिर वर्ष 2017 मार्च से 18 सितंबर 2021 तक दूसरी बार मुख्यमंत्री रहे.

कांग्रेस से अलग होकर भी क्या अपनी साख कायम रख पाएंगे Captain Amarinder Singh 

कैप्टन अपनी नई पार्टी पंबाज लोक कांग्रेस का गठन कर बीजेपी से गठबंधन करने का ऐलान कर चुके हैं.

नई दिल्ली:

Captain Amarinder Singh Profile: अगले साल 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Elections 2022) को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां जोर-शोर से तैयारियों में जुटी हैं. लेकिन इस बार के चुनावों में सभी की नजर मुख्यमंत्री पद और कांग्रेस से इस्तीफा देकर नई पार्टी बनाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) पर टिकी हुई हैं. कारण, कैप्टन अपनी नई पार्टी पंबाज लोक कांग्रेस (Punjab Lok Congress) का गठन कर बीजेपी (BJP) से गठबंधन करने का ऐलान कर चुके हैं. दरअसल, 2017 के चुनावों में शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए कांग्रेस को जीत दिलाकर दूसरी बार मुख्यमंत्री बने अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) से बढ़ती तकरार के बाद इस्तीफा दे दिया था. इस दौरान उन्होंने खुलकर कांग्रेस नेतृत्व से नाराजगी जाहिर की थी. कैप्टन पंजाब की राजनीति में सबसे पुराने खिलाड़ियों में से एक हैं. 

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11 मार्च 1942 को तत्कालीन पटियाला रियासत के शाही परिवार में जन्मे कैप्टन अमरिंदर सिंह महाराजा यादविंदर सिंह के पुत्र हैं. उनकी शुरुआती शिक्षा कसौली के वैलहैम बॉयज स्कूल, स्नावर स्कूल और दून स्कूल में हुई है. उनके परिवार में पत्नी परनीत कौर, पुत्र रनिंदर सिंह और पुत्री जय इंदर कौर हैं. उनकी पत्नी, प्रणीत कौर 2009 से 2014 तक एक सांसद और विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री थीं. कैप्‍टन दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पहले, 2002 से 2007 तक उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और फिर वर्ष 2017 मार्च से 18 सितंबर 2021 तक दूसरी बार मुख्यमंत्री रहे. वे पटियाला से विधानसभा के निर्वाचित सदस्य हैं.

पाकिस्तान के साथ जंग में ले चुके हिस्सा
वह भारतीय आर्मी में बतौर कमीशंड ऑफिसर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. नेशनल सिक्योरिटी अकेडमी और इंडियन मिलिट्री अकेडमी से स्नातक करने के बाद वे 1963 में भारतीय सेना में शामिल हुए और 1965 में इस्‍तीफा देने तक रहे. पाकिस्‍तान के साथ जंग छिड़ने के बाद वे फिर से भारतीय सेना में शामिल हुए और 1965 के भारत-पाकिस्‍तान युद्ध में कप्‍तान के रूप में अपनी सेवाएं दीं. इस दौरान वे सिख रेजिमेंट का हिस्‍सा थे. 

राजीव गांधी लेकर आए थे राजनीति में 
अमरिंदर सिंह को तत्कालीन मुख्यमंत्री राजीव गांधी कांग्रेस में लेकर आए थे. 1980 में पटियाला सीट से पहली बार वे सांसद बने, लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में 1984 में कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वो शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए. हालांकि 1992 में उन्होंने इससे भी इस्तीफा दे दिया और शिरोमणि अकाली दल (पंथिक) नाम की एक अलग पार्टी बनाई, जिसका बाद में 1998 में कांग्रेस में ही विलय हो गया. कैप्टन ने 1999 से 2002, 2010 से 2013 और 2015 से 2017 तक तीन मौकों पर पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में काम भी किया है.

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आम चुनावों में अरुण जेटली को हराया
बता दें कि अमरिंदर सिंह 2002 में पहली बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने. हालांकि 2007 में कांग्रेस चुनाव हार गई और प्रकाश सिंह बादल पंजाब के मुख्यमंत्री बने. उस चुनाव में विपक्ष ने उनपर आरोप लगाया था कि कैप्टन लोगों की पहुंच के बाहर रहते हैं और इसी बात को चुनाव का मुद्दा बनाया गया था. इसके बाद अमरिंदर सिंह 2014 के लोकसभा चुनाव में पंजाब की अमृतसर से बीजेपी के अरुण जेटली के खिलाफ चुनाव लड़ा और मोदी लहर के बावजूद उन्होंने दिवंगत अरुण जेटली को एक लाख से अधिक वोटों से हराया था.

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राजनेता के अलावा लेखक भी हैं कैप्टन
मुखर राजनेता के अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह एक गहन लेखक भी हैं. उन्होंने युद्ध और सिख इतिहास पर कई किताबें भी लिखी हैं. जिनमें 'ए रिज टू फार', 'लेस्ट वी फोर्गेट', 'द लास्ट सनसेट: राइज एंड फॉल ऑफ लाहौर दरबार" और "द सिख इन ब्रिटेन: 150 साल की तस्वीरें"; शामिल हैं. लिखने के अलावा वे पोलो, राइडिंग, क्रिकेट, बैडमिंटन और स्क्वैश जैसे खेलों में भी विशेष रुचि रखते हैं.