
नई दिल्ली:
कोर्ट के मामले में नोटिस एक प्रक्रिया की शुरुआत होती है और कोई किसी मामले में याचिका डालता है या किसी पर केस करता है, तो नोटिस से ही केस शुरू होता है। केस आगे चलता है या नहीं, ये केस करने वाले या कोर्ट पर निर्भर होता है। लेकिन ACB चीफ मुकेश मीणा को केवल एक नोटिस क्यों झटका माना जा रहा है, आइए समझें
1. ये कोई आम नोटिस नहीं है, बल्कि अदालत की अवमानना का नोटिस है।
2. एक पद पर आसीन सीनियर आईपीएस अफसर को ये कारण बताओ नोटिस है।
3. निजी तौर पर मुकेश मीणा को ये नोटिस जारी हुआ है किसी संस्था या सरकार को नहीं।
4. मुकेश मीणा की तरफ से बहस करने वाले एएसजी संजय जैन ने कोर्ट में कहा कि एक कार्यरत अधिकारी को कारण बताओ नोटिस किसी सज़ा से कम नहीं होता।
5. मीणा के वकील ने ही कोर्ट में कहा कि एक कारण बताओ नोटिस का मतलब होता है कि कोर्ट इस बात से पहली नज़र में सहमत है कि अदालत की अवमानना का केस बनता है।
6. मीणा के वकील ने कोर्ट के सामने बहुत देर तक बहस करके दलील दी कि मीणा को क्यों नोटिस न जारी किया जाए, लेकिन कोई भी दलील कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाई।
1. ये कोई आम नोटिस नहीं है, बल्कि अदालत की अवमानना का नोटिस है।
2. एक पद पर आसीन सीनियर आईपीएस अफसर को ये कारण बताओ नोटिस है।
3. निजी तौर पर मुकेश मीणा को ये नोटिस जारी हुआ है किसी संस्था या सरकार को नहीं।
4. मुकेश मीणा की तरफ से बहस करने वाले एएसजी संजय जैन ने कोर्ट में कहा कि एक कार्यरत अधिकारी को कारण बताओ नोटिस किसी सज़ा से कम नहीं होता।
5. मीणा के वकील ने ही कोर्ट में कहा कि एक कारण बताओ नोटिस का मतलब होता है कि कोर्ट इस बात से पहली नज़र में सहमत है कि अदालत की अवमानना का केस बनता है।
6. मीणा के वकील ने कोर्ट के सामने बहुत देर तक बहस करके दलील दी कि मीणा को क्यों नोटिस न जारी किया जाए, लेकिन कोई भी दलील कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाई।
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