
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
मुंबई:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के विस्तार और उसमें फेरबदल के एक दिन बाद NDA की सहयोगी शिवसेना ने बुधवार को भाजपा पर कटाक्ष किया कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडलों में काम करने वाले लोगों की तरह क्षमतावान लोगों को खोजना इन दिनों बहुत मुश्किल है।
मंत्रिमंडल के विस्तार में उपेक्षा से नाराज शिवसेना ने मंगलवार को कहा था कि जिस तरह विस्तार की कवायद की गई उससे वह आहत है। साथ ही पार्टी ने प्रधानमंत्री के ‘चयन मानकों’ पर भी सवाल उठाए थे। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में आज संपादकीय में कहा है 'मोदी अपनी सरकार के अकेले चेहरे हैं। इससे तुलना करें तो इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के पास बाबासाहेब आंबेडकर, बाबू जगजीवन राम, यशवंतराव चव्हाण और शंकरराव चव्हाण जैसे ज्यादा उत्कृष्ट सदस्य थे।'
संपादकीय में आगे कहा गया है, 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय को उसका नाम पीवी नरसिंह राव की वजह से मिला। मनमोहन सिंह की वजह से दुनिया को पता चला कि भारत में वित्त मंत्री है, जो काम करता है। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में जैसे क्षमतावान लोग थे वैसे लोग आज नहीं मिल सकते। इस परिदृश्य में मोदी के पास अपने मंत्रिमंडल की पूरी जिम्मेदारी खुद उठाने के अलावा और दूसरा कोई विकल्प नहीं है।'
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
मंत्रिमंडल के विस्तार में उपेक्षा से नाराज शिवसेना ने मंगलवार को कहा था कि जिस तरह विस्तार की कवायद की गई उससे वह आहत है। साथ ही पार्टी ने प्रधानमंत्री के ‘चयन मानकों’ पर भी सवाल उठाए थे। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में आज संपादकीय में कहा है 'मोदी अपनी सरकार के अकेले चेहरे हैं। इससे तुलना करें तो इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के पास बाबासाहेब आंबेडकर, बाबू जगजीवन राम, यशवंतराव चव्हाण और शंकरराव चव्हाण जैसे ज्यादा उत्कृष्ट सदस्य थे।'
संपादकीय में आगे कहा गया है, 'मानव संसाधन विकास मंत्रालय को उसका नाम पीवी नरसिंह राव की वजह से मिला। मनमोहन सिंह की वजह से दुनिया को पता चला कि भारत में वित्त मंत्री है, जो काम करता है। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में जैसे क्षमतावान लोग थे वैसे लोग आज नहीं मिल सकते। इस परिदृश्य में मोदी के पास अपने मंत्रिमंडल की पूरी जिम्मेदारी खुद उठाने के अलावा और दूसरा कोई विकल्प नहीं है।'
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