भारत के हाथों में आई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान, जानें क्या होगा प्रमुख एजेंडा

भारत के हाथों में दुनिया की सबसे शक्तिशाली संस्‍था संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान आ गई है. आज से एक महीने तक भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करने जा रहा है.

भारत के हाथों में आई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान, जानें क्या होगा प्रमुख एजेंडा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान भारत के हाथों में. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान अब भारत के हाथों में आ गई है. भारत आज से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक माह तक अध्यक्षता करेगा. दो अगस्त यानि कल सोमवार से भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बतौर अध्यक्ष की भूमिका में कार्य करेगा. इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत और फ्रांस के ऐतिहासिक और घनिष्ठ संबंध हैं. सुरक्षा परिषद में हमारे कार्यकाल के दौरान उन्होंने हमें जो समर्थन दिया, उसके लिए मैं फ्रांस को धन्यवाद देता हूं. 

उन्होंने कहा कि हमारी अध्यक्षता के दौरान, भारत हमारे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए तीन उच्च स्तरीय हस्ताक्षर बैठकें आयोजित कर रहा है. इसमें समुद्री सुरक्षा, शांति स्थापना और आतंकवाद से मुकाबला शामिल हैं. भारत शांति के रखवालों की याद में एक कार्यक्रम का भी आयोजन करेगा.

तिरुमूर्ति ने कहा कि सुरक्षा परिषद के एजेंडा में सीरिया, इराक, सोमालिया, यमन और मध्य पूर्व सहित कई महत्वपूर्ण बैठकें होंगी. सुरक्षा परिषद लेबनान में सोमालिया, माली और संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल पर भी महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी अपनाएगा.


वहीं, संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि, सैयद अकबरुद्दीन ने भारत द्वारा अगस्त के लिए यूएनएससी की अध्यक्षता ग्रहण करने पर कहा कि हमारे पीएम नरेंद्र मोदी पहले भारतीय पीएम होंगे जिन्होंने UNSC की बैठक की अध्यक्षता करने का फैसला किया है. यूएनएससी पर यह हमारा आठवां कार्यकाल है. उन्होंने कहा कि 75 साल से अधिक समय में यह पहली बार है जब भारत, यूएनएससी के किसी कार्यक्रम की अध्यक्षता करने जा रहा है. यह दर्शाता है कि भारत और उसके राजनीतिक नेतृत्व को हमारे विदेश नीति उपक्रमों में लगाया गया है.

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हालांकि यह एक वर्चुअल मीटिंग है, फिर भी यह हमारे लिए इस तरह की पहली मुलाकात है. यह ऐतिहासिक है. सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि इससे पहले 1992 में तत्कालीन पीएम पीवी नरसिम्हा राव इस प्रयास में लगे थे, जब उन्होंने UNSC की बैठक में भाग लिया था.