पटेल आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
पटेल आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को देशद्रोह के मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिल पाई है। शुक्रवार को हार्दिक की याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गुजरात पुलिस को डेढ़ महीने में जांच पूरी करने का आदेश दिया है। साथ ही मामले में चार्जशीट दाखिल ना करने के निर्देश भी दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 5 जनवरी को होगी। शुक्रवार की सुनवाई के बाद फिलहाल हार्दिक को और वक्त जेल में काटना होगा।
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने देशद्रोह मामले के खिलाफ हार्दिक की दायर की गई याचिका की सुनवाई करने से इंकार कर दिया था और इसे दूसरी बेंच के पास भेज दिया था। हार्दिक ने अपने खिलाफ लगे देशद्रोह के केस को चुनौती दी है और जमानत की मांग की है।
इससे पहले 4 नवंबर को हार्दिक की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने करीब 45 मिनट तक सुप्रीम कोर्ट में बहस की थी। सिब्बल की तरफ से दलील दी गई कि 22 साल के हार्दिक के खिलाफ गलत तरीके से मामला बनाया गया है। हार्दिक के पक्ष में खड़े सिब्बल का कहना था कि जिस रिकॉर्डिंग के आधार पर ये मामला बनाया गया है ये दो लोगों के बीच की आपसी बातचीत थी और सार्वजनिक नहीं थी। ये बात 3 अक्टूबर की है जबकि एफआईआर 18 अक्टूबर को हुई। हार्दिक फिलहाल सूरत की जेल में बंद हैं।
हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
गुजरात हाईकोर्ट ने पिछले महीने राजद्रोह के आरोप को चुनौती देने वाली पटेल आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल की याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में हार्दिक के खिलाफ राजद्रोह का मामला बनता है। दरअसल, 3 अक्टुबर को हार्दिक ने ने विपुल देसाई नाम के एक लड़के द्वारा सुसाइड की धमकी दिए जाने पर उससे कहा था कि दो-चार पुलिसवालों को मार देना, लेकिन खुदकुशी मत करना। इस बयान का वीडियो वायरल हो गया था जिसके बाद हार्दिक के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हो गया।
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने देशद्रोह मामले के खिलाफ हार्दिक की दायर की गई याचिका की सुनवाई करने से इंकार कर दिया था और इसे दूसरी बेंच के पास भेज दिया था। हार्दिक ने अपने खिलाफ लगे देशद्रोह के केस को चुनौती दी है और जमानत की मांग की है।
इससे पहले 4 नवंबर को हार्दिक की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने करीब 45 मिनट तक सुप्रीम कोर्ट में बहस की थी। सिब्बल की तरफ से दलील दी गई कि 22 साल के हार्दिक के खिलाफ गलत तरीके से मामला बनाया गया है। हार्दिक के पक्ष में खड़े सिब्बल का कहना था कि जिस रिकॉर्डिंग के आधार पर ये मामला बनाया गया है ये दो लोगों के बीच की आपसी बातचीत थी और सार्वजनिक नहीं थी। ये बात 3 अक्टूबर की है जबकि एफआईआर 18 अक्टूबर को हुई। हार्दिक फिलहाल सूरत की जेल में बंद हैं।
हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
गुजरात हाईकोर्ट ने पिछले महीने राजद्रोह के आरोप को चुनौती देने वाली पटेल आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल की याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में हार्दिक के खिलाफ राजद्रोह का मामला बनता है। दरअसल, 3 अक्टुबर को हार्दिक ने ने विपुल देसाई नाम के एक लड़के द्वारा सुसाइड की धमकी दिए जाने पर उससे कहा था कि दो-चार पुलिसवालों को मार देना, लेकिन खुदकुशी मत करना। इस बयान का वीडियो वायरल हो गया था जिसके बाद हार्दिक के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हो गया।
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