टीकरी बॉर्डर 380 दिन बाद खुला, किसान आंदोलन खत्म होने के बाद सिंघू व गाजीपुर बॉर्डर भी जल्द खुलेंगे

दिल्ली से बहादुरगढ़ को जोड़ने वाले टीकरी बॉर्डर को किसानों ने रविवार को पूरी तरह से खाली कर दिया है और यहां दोनों तरफ की सड़क भी चालू हो गई हैकिसानों की घर वापसी के बाद दिल्ली की सीमाओं से ट्रैफिक खोल दिया गया है. गाजीपुर और सिंघू बॉर्डर पर आंदोलन की जगहों को खाली करने का काम भी तेज हो गया है.

नई दिल्ली:

किसान आंदोलन (farmers protest) खत्म होने के बाद दिल्ली की तीनों सीमाओं पर बैठे किसान घर जा रहे हैं,टीकरी बॉर्डर (Tikri Border) पूरी तरह से खाली हो गया है और वहां दोनों तरफ का रास्ता खुल गया है,जबकि ग़ाज़ीपुर (Ghazipur Border) और सिंघू बॉर्डर (Singhu Border) का रास्ता अगले 2 दिनों में खुल जाएगा. दिल्ली के ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान अब चारपाई लेकर खाने तक सामान ट्रकों और ट्रैक्टरों में भरकर घर जा रहे हैं, किसान आंदोलन के दौरान पिछले 1साल में हर मौसम में वो इसी सड़क पर बैठे रहे,आसपास रहने वाले लोग उनके परिवार का हिस्सा बन गए थे तो सड़क उनका घर,लेकिन लंबी लड़ाई के बाद मिली जीत अब उन्हें घर बुला रही है,हालांकि ये रास्ता खुलने में अभी 2 दिन लग जाएंगे.

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सिंघू बॉर्डर जहां हज़ारों किसानों की भीड़ थी वो अब वीरान है,बहुत कम संख्या में किसान हैं जो अपना सामान भर रहे हैं,किसानों की तरफ से 100 से ज्यादा वॉलिंटियर हैं जो 20 से ज्यादा जेसीबी मशीन लेकर यहां की गंदगी और मलबे को हटा रहे हैं,पुलिस यहां अब तक खुद की बैरिकेडिंग और कंटीले तार नहीं हटा पाई है,यहां भी रास्ता खुलने में अभी 2 दिन का वक्त लगेगा,हालांकि किसानों का कहना है कि वो 15 दिसम्बर तक चले जाएंगे.

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उधर दिल्ली से बहादुरगढ़ को जोड़ने वाले टीकरी बॉर्डर को किसानों ने रविवार को पूरी तरह से खाली कर दिया है और यहां दोनों तरफ की सड़क भी चालू हो गई हैकिसानों की घर वापसी के बाद दिल्ली की सीमाओं से ट्रैफिक खोल दिया गया है. टीकरी बॉर्डर पर रोहतक रोड 380 दिन बाद खुल गया है और दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है. वहीं राजधानी के गाजीपुर और सिंघू बॉर्डर पर आंदोलन की जगहों को खाली करने का काम भी तेज हो गया है.

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रोहतक रोड पर बैरिकेड को अक्टूबर में ट्रैफिक की आवाजाही के लिए हटा दिया गया था. दूसरी ओर, जहां किसान आंदोलन कर रहे थे,वहां रविवार को दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह से बैरिकेड हटा दिए. किसानों के जाने के बाद रोहतक रोड पर लगे अवरोधक हटा दिए गए हैं. सड़क के दोनों ओर वाहनों की आवाजाही तेज हो गई है. पंजाब, हरियाणा और यूपी के किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पिछले साल 26 नवंबर को बड़ी संख्या में दिल्ली की सीमाओं पर इकट्ठा हुए थे.

संसद में 29 नवंबर को इन कानूनों को रद्द करने तथा एमएसपी पर कानूनी गारंटी के लिए एक पैनल गठित करने का आश्वासन सरकार ने दिया था. इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की थी. किसान नेताओं के अनुसार, सिंघू सीमा 95 प्रतिशत से अधिक खाली कर हो गई है. किसान समूहों और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने यहां सफाई अभियान शुरू किया है.

संयुक्त किसान मोर्चा के एक नेता ने कहा कि सिंघू बॉर्डर पर सफाई का काम चल रहा है. बीस से अधिक जेसीबी और 100 से अधिक स्वयंसेवी यहां अथक प्रयास कर रहे हैं ताकि इस स्थल को जल्द से जल्द खाली किया जा सके. सीमा से बैरिकेड, बोल्डर और कंटीले तारों की परतें हटाई जा रही हैं.

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किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि सिंघू सीमा आंदोलन स्थल को 95 प्रतिशत से अधिक खाली कर दिया गया है. कई संगठन वहां सफाई की कवायद में लगे हुए हैं. कुछ लंगर और एक-दो तंबू को छोड़कर, सिंघू बॉर्डर पर अधिकांश आंदोलनकारी चले गए हैं. लंगर सफाई के काम में लगे वालंटियर के लिए हैं. रविवार रात तक रास्ता पूरी तरह से खाली हो जाने की संभावना है.