
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली:
दिल्ली में चिकनगुनिया से चार लोगों की मौत हो गई है. तीन मौतें दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में हुई है. बीती रात चिकनगुनिया से पहली मौत हुई थी. राजधानी दिल्ली में अभी तक चिकनगुनिया के मामले तेज़ी से बढ़कर 1,400 के करीब पहुंच गए है.
पहली मौत 65 साल के बुजुर्ग की हुई. उनकी सोमवार सुबह साढ़े 4 बजे उनकी मौत हो गई. गंगाराम अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, मरीज़ को शनिवार रात गाजियाबाद के यशोधरा अस्पताल से नाजुक स्थिति में यहां लाया गया था और आईसीयू में भर्ती किया गया था.
चिकनगुनिया शब्द को अफ्रीकी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है 'वह, जो झुका दे...' चिकनगुनिया एक वायरल बुखार है. एडीज एजिप्टी नाम के मच्छर, जिसको पीले बुखार का मच्छर भी कहते हैं, के काटने से यह वायरस शरीर में घुस जाता है.
कैसे आया चिकनगुनिया
चिकनगुनिया बीमारी को अफ्रीकन भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है, वह, जो झुका दे (हड्डी टूटने जैसा दर्द). यह नाम इसलिए पड़ा, क्योंकि जोड़ों में दर्द की वजह से मरीज झुककर चलने लगते हैं और पूरी तरह स्वस्थ होने में महीनों लग जाते हैं. चिकनगुनिया बीमारी अक्सर गरम देशों में पाई जाती है, अधिकतर एशिया और अफ्रीका के देशों में यह बीमारी होती रही है. सबसे पहले चिकनगुनिया की शुरुआत 1952 में अफ्रीका के मंकोडे द्वीप में हुई जो तंज़ानिया और मोजाम्बिक के बीचोंबीच स्थित है.
चिकनगुनिया से जुड़ी खास बातें
चिकनगुनिया के लक्षण
चिकनगुनिया का उपचार
पहली मौत 65 साल के बुजुर्ग की हुई. उनकी सोमवार सुबह साढ़े 4 बजे उनकी मौत हो गई. गंगाराम अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, मरीज़ को शनिवार रात गाजियाबाद के यशोधरा अस्पताल से नाजुक स्थिति में यहां लाया गया था और आईसीयू में भर्ती किया गया था.
चिकनगुनिया शब्द को अफ्रीकी भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है 'वह, जो झुका दे...' चिकनगुनिया एक वायरल बुखार है. एडीज एजिप्टी नाम के मच्छर, जिसको पीले बुखार का मच्छर भी कहते हैं, के काटने से यह वायरस शरीर में घुस जाता है.
कैसे आया चिकनगुनिया
चिकनगुनिया बीमारी को अफ्रीकन भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है, वह, जो झुका दे (हड्डी टूटने जैसा दर्द). यह नाम इसलिए पड़ा, क्योंकि जोड़ों में दर्द की वजह से मरीज झुककर चलने लगते हैं और पूरी तरह स्वस्थ होने में महीनों लग जाते हैं. चिकनगुनिया बीमारी अक्सर गरम देशों में पाई जाती है, अधिकतर एशिया और अफ्रीका के देशों में यह बीमारी होती रही है. सबसे पहले चिकनगुनिया की शुरुआत 1952 में अफ्रीका के मंकोडे द्वीप में हुई जो तंज़ानिया और मोजाम्बिक के बीचोंबीच स्थित है.
चिकनगुनिया से जुड़ी खास बातें
- चिकनगुनिया एक बार हो जाने पर जीवन में दोबारा होने की संभावना लगभग न के बराबर होती है
- चिकनगुनिया बीमारी सीधे एक मनुष्य से दुसरे मनुष्य में नहीं फैलती
- एक बीमार व्यक्ति को एडीज मच्छर के काटने के बाद फिर स्वस्थ व्यक्ति को काटने से फैलती है.
- इसमें बुखार, खांसी, जुकाम, बदन में दर्द और जोड़ों में दर्द से पीड़ित हो जाता है.
- आमतौर पर चिकनगुनिया बुखार जानलेवा नहीं कहा जाता
- कई मामलों में जानलेवा भी हो सकता है
- यह मच्छर दिन में काटता है, इससे बचना चाहिए
- जोड़ों में भयंकर पीड़ा होती है,
- इतना कमजोर हो जाता है कि कोई भी कार्य करने में असमर्थ पाता है
चिकनगुनिया के लक्षण
- मच्छर काटने के 2 से 7 दिनों के बाद चिकनगुनिया के लक्षण नजर आते हैं.
- इसमें तेज बुखार के साथ जोड़ों, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द
- जी मचलना, भूख कम लगना और कमजोरी आना
- प्रकाश सहन न होना
- शरीर पर चकते निकलना
चिकनगुनिया का उपचार
- चिकनगुनिया के लिए डॉक्टर लाक्षणिक दवा देते हैं
- चिकनगुनिया के विषाणु नष्ट करने के लिए कोई दवा या टीका अब तक नहीं बना है
- जोड़ों व अन्य दर्द के लिए पेन कीलर दवाएं दी जाती हैं
- बुखार आने पर बुखार कम करने की दवाएं दी जाती हैं
- रोगी को आराम करना चाहिए और पेय पदार्थ खूब लेने चाहिए
- रोगी कोई भी दवाई डॉक्टर की सलाह से ही लें
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