
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों में जजों की नियुक्तियों को भरने के लिए और बड़ा कदम उठाया है. कोर्ट ने पूछा है कि देश के सभी राज्यों में निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की रिक्तियों को भरने के लिए क्या किसी एक एजेंसी द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर संयुक्त परीक्षा का आयोजन किया जा सकता है या नहीं? कोर्ट ने कहा कि नेशनल इलिजिबिलिटी इंटरेंस टेस्ट (नीट) की तरह क्या इसके लिए संयुक्त परीक्षा आयोजित की जा सकती है?
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की बेंच ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को इस मसले पर 30 जून तक अपना-अपना पक्ष रखने के लिए कहा है. कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने हमें बताया है कि निचली अदालतों में जजों के पद खाली हैं, जिन्हें भरने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. हमें ऐसा लगता है कि रिक्तियां को भरने के लिए एकल एजेंसी होनी चाहिए.
हालांकि कोर्ट ने कहा कि हमारा संघीय ढांचे को छूने का कोई इरादा नहीं है. अभ्यर्थी अपने राज्य और अपनी पसंदीदा भाषा में विभिन्न राज्यों के लिए एकल संयुक्त परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. हमारी प्राथमिकता निचली अदालतों में रिक्तियों को भरना है.
दरअसल, न्याय विभाग की सचिव स्नेहलता श्रीवास्तव के पत्र पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई कर रही इस बेंच ने कहा कि हम निचले स्तर पर खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कह सकते हैं. स्नेहलता श्रीवास्तव ने निचली अदालतों के लिए संयुक्त रूप से न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की सिफारिश की थी. उन्होंने कहा था कि संघ लोक सेवा आयोग के जरिए अखिल भारत स्तर पर संयुक्त परीक्षा आयोजित की जा सकती है.
सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि कई हाईकोर्ट को जिला अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने में परेशानी आ रही है. कुछ ऐसे भी राज्य हैं, जिनमें निचली अदालतों में नियुक्ति का काम राज्य लोक सेवा आयोग के द्वारा किया जाता है, वहां भी रिक्तियां नहीं भरी जा सकी है.
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की बेंच ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को इस मसले पर 30 जून तक अपना-अपना पक्ष रखने के लिए कहा है. कोर्ट ने कहा है कि सरकार ने हमें बताया है कि निचली अदालतों में जजों के पद खाली हैं, जिन्हें भरने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. हमें ऐसा लगता है कि रिक्तियां को भरने के लिए एकल एजेंसी होनी चाहिए.
हालांकि कोर्ट ने कहा कि हमारा संघीय ढांचे को छूने का कोई इरादा नहीं है. अभ्यर्थी अपने राज्य और अपनी पसंदीदा भाषा में विभिन्न राज्यों के लिए एकल संयुक्त परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. हमारी प्राथमिकता निचली अदालतों में रिक्तियों को भरना है.
दरअसल, न्याय विभाग की सचिव स्नेहलता श्रीवास्तव के पत्र पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई कर रही इस बेंच ने कहा कि हम निचले स्तर पर खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कह सकते हैं. स्नेहलता श्रीवास्तव ने निचली अदालतों के लिए संयुक्त रूप से न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की सिफारिश की थी. उन्होंने कहा था कि संघ लोक सेवा आयोग के जरिए अखिल भारत स्तर पर संयुक्त परीक्षा आयोजित की जा सकती है.
सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि कई हाईकोर्ट को जिला अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करने में परेशानी आ रही है. कुछ ऐसे भी राज्य हैं, जिनमें निचली अदालतों में नियुक्ति का काम राज्य लोक सेवा आयोग के द्वारा किया जाता है, वहां भी रिक्तियां नहीं भरी जा सकी है.
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सुप्रीम कोर्ट, नेशनल इलिजिबिलिटी इंटरेंस टेस्ट, जजों की नियुक्तियांं