सुप्रीम कोर्ट एराइव सेफ इंडिया NGO की याचिका पर सुनवाई करेगा.
- एराइव सेफ इंडिया NGO की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
- कोर्ट : हमारे आदेश का उद्देश्य सिर्फ ये था कि हाइवे के पास शराब न मिले
- हालांकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका है
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट एराइव सेफ इंडिया NGO की याचिका पर सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि अगर कोई स्टेट हाइवे सिटी के बीच से होकर गुजरता है तो अगर उसे डिनोटिफाई किया जाता है तो पहली नजर में गलत नजर नही होगा. क्योंकि शहर के बीच से गाड़िया आम तौर ओर धीमी रफ्तार से चलती है.
सिटी के अंदर के हाईवे और बिना सिटी के हाईवे में बहुत अंतर है. हाइवे का मतलब है जहां तेज रफ्तार में गाडियां चलती हों. सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमारे आदेश का उद्देश्य सिर्फ ये था कि हाइवे के पास शराब उपलब्ध न हो क्योंकि लोग शराब पी कर तेजी से गाड़ी चलाते है और दुर्घटना हो जाती है.
दरअसल चंडीगढ में कई जगह हाईवे का नाम बदलकर ' मेजर डिस्ट्रिक रोड' का नाम कर दिया गया है. इसी को लेकर एराइव सेफ इंडिया NGO ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे पर शराब की दुकानों को बंद करने का फैसला जनहित में लिया था क्योंकि इससे सडक दुर्घटनाएं होती हैं. ऐसे में चंडीगढ प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निस्प्रभावी करने के लिए 16 मार्च 2017 का नोटिफिकेशन अवैध है और रद्द किया जाना चाहिए. हालांकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका है.
सिटी के अंदर के हाईवे और बिना सिटी के हाईवे में बहुत अंतर है. हाइवे का मतलब है जहां तेज रफ्तार में गाडियां चलती हों. सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमारे आदेश का उद्देश्य सिर्फ ये था कि हाइवे के पास शराब उपलब्ध न हो क्योंकि लोग शराब पी कर तेजी से गाड़ी चलाते है और दुर्घटना हो जाती है.
दरअसल चंडीगढ में कई जगह हाईवे का नाम बदलकर ' मेजर डिस्ट्रिक रोड' का नाम कर दिया गया है. इसी को लेकर एराइव सेफ इंडिया NGO ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे पर शराब की दुकानों को बंद करने का फैसला जनहित में लिया था क्योंकि इससे सडक दुर्घटनाएं होती हैं. ऐसे में चंडीगढ प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को निस्प्रभावी करने के लिए 16 मार्च 2017 का नोटिफिकेशन अवैध है और रद्द किया जाना चाहिए. हालांकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका है.
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आशीष कुमार भार्गव
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