
भारत में कोविड-19 महामारी (COVID-19 pandemic) में केंद्र सरकार के "सकल कुप्रबंधन" की आयोग द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने खारिज कर दी है. जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह सार्वजनिक बहस का मामला हो सकता है लेकिन अदालत के हस्तक्षेप का नहीं. गौरतलब है कि वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से स्थानांतरित छह सेवानिवृत्त नौकरशाहों द्वारा
ये याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी. याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार ने COVID-19 में घोर कुप्रबंधन किया है और एक आयोग का गठन कर इसकी जांच होनी चाहिए.
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याचिका में समय रहते सरकार द्वारा लॉकडाउन न लागू करने और 'नमस्ते ट्रम्प' के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस के उल्लंघन की जांच की मांग भी की गई थी. प्रशांत भूषण ने कोर्ट ने कहा, 'नमस्ते ट्रम्प' कार्यक्रम में लाखों लोग एक साथ जमा हुए, उससे पहले 4 फरवरी को गृह मंत्रालय ने एडवाइज़री जारी की थी कि बड़ी संख्या में लोग एक जगह इकठ्ठा न हों, उसके बाद भी कार्यक्रम में लोग इकठ्ठा हुए. प्रशांत भूषण ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से के बड़ी संख्या में लोग बेरोज़गार हुए. सरकार कोरोना को रोकने में नाकाम रही और इससे हमारी अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई, अर्थव्यवस्था में 24% की गिरावट हुई
. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन बिना किसी एक्सपर्ट कमेटी से चर्चा किये लागू किया गया. सरकार संसद में कहती है डॉक्टरों की मौत का कोई आंकड़ा नही है, पुलिस कर्मियों की मौत का कोई आंकड़ा नही है, रोज़गार जाने का कोई आंकड़ा नहीं है. लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी मज़दूरों का पलायन हुआ, सरकार के पास लॉक डाउन का कोई भी प्लान नही था, सरकार के पास PPE किट भी पर्याप्त मात्रा में नही थी.
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