ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी और कोरोना का गहराता संकट...

ग्रामीण भारत का एक बड़ा इलाका डॉक्टरों की कमी के संकट से जूझ रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ताज़ा रूरल हेल्थ स्टेटिस्टिक्स रिपोर्ट 2019-20 रिपोर्ट के मुताबिक कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों में डॉक्टरों की कमी 76.1% है. ग्रामीण कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों में सर्जन की कमी 78.9%, फिजिशियन की 78.2% और शिशु रोग विशेषज्ञों की कमी 78.2% है. 

ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी और कोरोना का गहराता संकट...

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी के इलाके साँची के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में एक माली कोरोना (Coronavirus) के सैंपल इकठा कर रहा है. यही हाल उत्तर प्रदेश के स्वस्थ्य केंद्रों का है. बुलंदशहर से क़रीब 10 किलोमीटर दूर जटापुर सहकारी नगर उपकेंद्र में सालों से कोई डॉक्टर नहीं आया है. मजबूरन लोगों को शहर के जिला अस्पताल जाना पड़ता है. जटापुर सहकारी नगर के निवासी संजय ने एनडीटीवी से कहा, "यहां स्वास्थ्य केंद्र कई साल से बना हुआ है लेकिन डॉक्टर कई साल से यहां नहीं बैठ रहे हैं.. हम काफी परेशान हैं... 10 किलोमीटर दूर बुलंदशहर जाना पड़ता है. दो साल से कोई डॉक्टर नहीं आया है." 

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दरअसल ग्रामीण भारत का एक बड़ा इलाका डॉक्टरों की कमी के संकट से जूझ रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ताज़ा रूरल हेल्थ स्टेटिस्टिक्स रिपोर्ट 2019-20 रिपोर्ट के मुताबिक कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों में डॉक्टरों की कमी 76.1% है. ग्रामीण कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों में सर्जन की कमी 78.9%, फिजिशियन की 78.2% और शिशु रोग विशेषज्ञों की कमी 78.2% है. 

कोरोना के खिलाफ इस जंग में कमी डॉक्टरों तक सीमित नहीं है. पिछड़े ज़िलों में ऑक्सीजन और हॉस्पिटल बेड का संकट भी बढ़ता जा रहा है. मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के एक स्वास्थ्य केंद्र में एक महिला ने ऑक्सीजन की कमी की वजह से दम तोड़ दिया. उसके परिवार का आरोप है कि वो ऑक्सीजन के लिए कराहती रही लेकिन समय पर ऑक्सीजन मुहैया नहीं हो सका. मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर से करीब 200 किलोमीटर दूर कटनी में भी मरीज़ ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं. गुरुवार को जालपा वार्ड निवासी कल्पना नौगरहिया को उनके पुत्र हिमांशु गुप्ता एम्बुलेंस से गम्भीर हालत में जिला अस्पताल लाए लेकिन मां को ऑक्सीजन मुहैया करने में काफी संकट झेलना पड़ा. हिमांशु गुप्ता ने कहा, "मेरी मां की जान को बहुत खतरा बना हुआ है. समझ में नहीं आ रहा है. 1% ऑक्सीजन  भी नहीं दी जा पा रही है. अब स्थिति ये आ गयी है कि वो बचेंगी भी या नहीं." 

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ज़ाहिर है, डॉक्टरों और स्वास्थ्य संसाधनों की कमी का संकट पिछड़े इलाकों में गहराता जा रहा है. दरअसल कोरोना संकट से पहले से डॉक्टरों और महत्वपूर्ण स्वस्थ्य सम्बंधित संसाधनों का आभाव झेल रही कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों की वजह से देश के ग्रामीण और पिछड़े ज़िलों में ग्रामीण इलाकों में कोरोना का साया गहराता जा रहा है. जैसे जैसे कोरोना के मामले अप्रत्याशित तरीके से बढ़ते जा रहे हैं संकट का दायरा बढ़ता जा रहे और इससे निपटने की चुनौती भी.


(साथ में भोपाल से अनुराग द्वारी)

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