फाइल फोटो
सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत रॉय की रिहाई के लिए सहारा की ओर से दिए गए नए प्रस्ताव पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। कंपनी ने अदालत के समक्ष 31 जुलाई तक दस हजार करोड़ रुपए देने को आज प्रस्ताव रखा था।
न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की दो सदस्यीय खंडपीठ ने सुब्रत राय और दो निदेशकों की जमानत के लिए दस हजार करोड़ रुपए का भुगतान करने के सहारा के प्रस्ताव पर भी विचार करने की सहमति दे दी है। राय और दो निदेशक चार मार्च से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
इस मामले में यह पीठ बाद में फैसला सुनायेगी। सहारा समूह ने अपने नए प्रस्ताव में आज अदालत को भरोसा दिलाया कि वह तीन से चार कार्य दिवसों के भीतर ही तीन हजार करोड़ रुपए का भुगतान करेगा और दो हजार करोड़ रुपए नकद 30 मई तक दे देगा।
समूह ने यह भी कहा है कि वह 20 जून से पहले पांच हजार करोड़ रुपए की बैंक गारंटी भी दे देगा।
शीर्ष अदालत ने इससे पहले कहा था कि अगर राय दस हजार करोड़ रुपए का भुगतान करें, तो उन्हें जमानत पर छोड़ दिया जाएगा। इस राशि में से पांच हजार करोड़ रुपए बैंक गारंटी के रूप में और शेष रकम नकद जमा करानी थी।
राय और समूह के दो निदेशक निवेशकों के बीस हजार करोड़ रूपए बाजार नियामक सेबी के पास जमा कराने के शीर्ष अदालत के आदेश पर अमल नहीं करने के कारण चार मार्च से न्यायिक हिरासत में हैं।
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