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This Article is From Dec 26, 2014

राजस्थान कांग्रेस ने पंचायत राज अध्यादेश की तीखी आलोचना की

जयपुर:

कांग्रेस ने राजस्थान में भाजपा सरकार द्वारा राजीव गांधी सेवा केन्द्रों का नाम बदलकर अटल सेवा केन्द्र रखे जाने की तीखी आलोचना की है। इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा राजस्थान पंचायत राज (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश-2014 को पंचायती राज संस्थाओं की स्थापना की मूलभावना के खिलाफ बताया।

पायलट ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि इस अध्यादेश के माध्यम से जिला परिषद् एवं पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लडने वाले प्रत्याशियों के लिए शैक्षणिक अनिवार्यता 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना तथा सरपंच का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए 8वीं कक्षा पास होना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अध्यादेश भेदभाव बढ़ाने वाला है।

उन्होंने दावा किया कि सरकार की ओर से इसे पंचायत राज चुनाव के ठीक पहले लागू किया जाना प्रत्याशियों व राजनैतिक पार्टियों व जनता के हित में नहीं है। उन्होंने जनगणना-2011 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान राज्य की साक्षरता दर राष्ट्रीय साक्षरता दर से कम है (राष्ट्रीय साक्षरता दर 74 प्रतिशत है, जिसके अनुपात में राजस्थान की साक्षरता दर सिर्फ 66 प्रतिशत है)।

उन्होंने दावा किया कि इस अध्यादेश की सबसे बड़ी मार महिलाओं व अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों पर पड़ेगी। इस वजह से यह अध्यादेश 73वें संविधान संशोधन की मूल भावना के भी खिलाफ है, जिसका उद्देश्य आरक्षण देकर हाशिये पर रहने वाले तबकों की राजनीतिक भागीदार सुनिश्चित कर उन्हें मुख्य धारा से जोड़ा जाए।

पायलट ने कहा कि यदि भाजपा के वर्तमान विधायकों की शैक्षणिक योग्यता पर नजर डाली जाये तो आश्चर्यचकित करने वाले आंकड़े सामने आएंगे क्योंकि भाजपा के 160 विधायकों में से 23 विधायक स्वत ही अयोग्य हो जाएंगे। पायलट ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा राजीव गांधी सेवा केन्द्रों का नाम बदलकर अटल सेवा केन्द्र रखे जाने का निर्णय भाजपा सरकार की संकीर्ण मानसिकता का द्योतक है।

उन्होंने कहा कि जब-जब भाजपा की सरकार केन्द्र व राज्य में बनती है तो उनके नेता अपनी विचारधारा को थोंपने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों द्वारा जारी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं उपलब्धियों का नाम बदलकर अपने नेताओं के नाम लागू कर वाह-वाही लूटने का काम करते हैं।

पायलट ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि कांग्रेस के पास इस मुददे को लेकर कोर्ट जाने का विकल्प नहीं बचा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अध्यादेश ऐसे समय लायी है जब अदालतों में अवकाश चल रहा है और इसी बीच चुनाव आचार संहिता लग गई।

पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसा राजनीतिक साजिश के तहत किया है। इससे प्रदेश की आधी जनसंख्या को उसके चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित कर दिया है।

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