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This Article is From Jan 14, 2019

सबरीमाला मंदिर मुद्दे पर बोले राहुल गांधी- दोनों पक्षों के तर्कों में दम है, कुछ साफ नहीं कह सकता हूं

राहुल गांधी ने कहा, 'मैं इस तर्क में भी वैधता देख सकता हूं कि महिलाओं को समान अधिकार मिलने चाहिए. इसलिए, मैं इस मुद्दे पर आपको अपना स्पष्ट रुख नहीं बता पाऊंगा.’ 

सबरीमाला मंदिर मुद्दे पर बोले राहुल गांधी- दोनों पक्षों के तर्कों में दम है, कुछ साफ नहीं कह सकता हूं
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:

सबरीमला मंदिर  में सभी महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने की पैरवी करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि वह मुद्दे पर ‘स्पष्ट' रुख अख्तियार नहीं कर सकते हैं क्योंकि दोनों पक्षों के तर्कों में दम है. दुबई में शनिवार को पत्रकार वार्ता में गांधी ने कहा मुद्दा ‘और अधिक जटिल' है और वह इस मामले पर फैसला लेने की जिम्मेदारी केरल के लोगों पर छोड़ते हैं. उन्होंने माना कि सरीबमला मुद्दे पर उनका शुरुआती रुख आज से अलग था. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ मैंने दोनों पक्षों की बातें सुनी है. मेरा शुरुआती रुख आज के रुख से अलग था. केरल के लोगों की बात सुनने के बाद, मैं दोनों तर्कों में वैधता देख सकता हूं कि परंपरा का संरक्षण करने की जरूरत है. मैं इस तर्क में भी वैधता देख सकता हूं कि महिलाओं को समान अधिकार मिलने चाहिए. इसलिए, मैं इस मुद्दे पर आपको अपना स्पष्ट रुख नहीं बता पाऊंगा.''

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उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने केरल के लोगों और (केरल) कांग्रेस कमेटी की टीम से बात की और उन्होंने मुझे इसका विवरण समझाया. इसके बाद, मुझे एहसास हुआ कि मुद्दा कहीं ज्यादा जटिल है और दोनों पक्षों का रुख वैध है. मैं इस पर निर्णय करने की जिम्मेदारी लोगों पर छोड़ता हूं.''सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, गांधी ने कहा था कि सभी महिलाओं को सबरीमला मंदिर में जाने की अनुमति होनी चाहिए. हालांकि, उनका यह विचार कांग्रेस की केरल इकाई के नजरिए से अलग था.

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गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का जाना वर्जित था. खासकर 15 साल से ऊपर की लड़कियां और महिलाएं इस मंदिर में नहीं जा सकती थीं. यहां सिर्फ छोटी बच्चियां और बूढ़ी महिलाएं ही प्रवेश कर सकती हैं. इसके पीछे मान्यता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह बैन हटा दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में केरल के सबरीमाला स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी. तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि केरल के सबरीमाला मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लैंगिक भेदभाव है और यह परिपाटी हिन्दू महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है. मगर इस फैसले पर सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी ने निराशा जताई. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वहां विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है.

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