नई दिल्ली:
कैबिनेट में हेरफेर की संभावनाओं के बीच विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने राहुल गांधी के मंत्रिमंडल में शामिल होने की जोरदार वकालत करते हुए कहा कि देश के सामने आ रहीं समस्याओं के समाधान के लिए यह जरूरी है। कृष्णा ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पहले ही कह चुके हैं कि राहुल गांधी सरकार में शामिल होंगे और उनका रुख कायम है।
मंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, हम हमेशा से चाहते हैं कि राहुल गांधी सरकार में शामिल हों। प्रधानमंत्री उन्हें सरकार में शामिल होने का न्योता दे चुके हैं, लेकिन फिलहाल वह खुद इसके इच्छुक नहीं दिखाई देते। कृष्णा से पत्रकारों ने पूछा था कि क्या वह सोचते हैं कि 42 वर्षीय राहुल को प्रणव मुखर्जी के इस्तीफे के बाद मंत्री बनाया जाना चाहिए।
कृष्णा ने कहा, मैं उन लोगों में से हूं, जिन्हें लगता है कि राहुल गांधी का सरकार में शामिल होना और देश के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करने में सरकार की मदद करना जरूरी है। सरकार के संकटमोचक के तौर पर पहचान पाने वाले प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपने नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले मंगलवार को वित्तमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
उधर, लघु उद्योग मंत्री वीरभद्र सिंह ने भी हिमाचल प्रदेश की एक अदालत द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय किए जाने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद कैबिनेट में हेरफेर की अटकलें शुरू हो गईं। प्रधानमंत्री ने फिलहाल तो वित्त मंत्रालय अपने पास रखा है और लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री विलासराव देशमुख को सौंपा है।
मंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, हम हमेशा से चाहते हैं कि राहुल गांधी सरकार में शामिल हों। प्रधानमंत्री उन्हें सरकार में शामिल होने का न्योता दे चुके हैं, लेकिन फिलहाल वह खुद इसके इच्छुक नहीं दिखाई देते। कृष्णा से पत्रकारों ने पूछा था कि क्या वह सोचते हैं कि 42 वर्षीय राहुल को प्रणव मुखर्जी के इस्तीफे के बाद मंत्री बनाया जाना चाहिए।
कृष्णा ने कहा, मैं उन लोगों में से हूं, जिन्हें लगता है कि राहुल गांधी का सरकार में शामिल होना और देश के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करने में सरकार की मदद करना जरूरी है। सरकार के संकटमोचक के तौर पर पहचान पाने वाले प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अपने नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले मंगलवार को वित्तमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
उधर, लघु उद्योग मंत्री वीरभद्र सिंह ने भी हिमाचल प्रदेश की एक अदालत द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय किए जाने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम के बाद कैबिनेट में हेरफेर की अटकलें शुरू हो गईं। प्रधानमंत्री ने फिलहाल तो वित्त मंत्रालय अपने पास रखा है और लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री विलासराव देशमुख को सौंपा है।
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