भारतीय सेना ने चीन के सैनिकों को खदेड़ दिया है. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
- घटना के बाद भारत ने उस इलाके में जवानों की संख्या को बढ़ा दिया है. वहीं इस झड़प के बाद भी चुशुल में ब्रिगेड कमांडर लेवल की वार्ता जारी है.
- सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया कि चीन की ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' ने पूर्वी लद्दाख गतिरोध पर सैन्य और राजनयिक बातचीत के जरिये बनी पिछली आम सहमति का उल्लंघन किया और यथास्थिति को बदलने के लिए उकसावेपूर्ण सैन्य अभियान चलाया.
- भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग सो (झील) के दक्षिणी किनारे पर इस पीएलए की गतिविधि को पहले ही विफल कर दिया और जमीन पर तथ्यों को एकतरफा बदलने के चीनी इरादों को विफल करने के लिए उपाय भी किए.
- कर्नल आनंद ने बताया कि मामले के हल के लिए चुशूल में ‘ब्रिगेड कमांडर' स्तर की एक फ्लैग मीटिंग की तैयारी की जा रही है.
- उन्होंने कहा, 'भारतीय सेना बातचीत के माध्यम से शांति और स्थिरता बनाए रखने को प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए भी उतनी ही प्रतिबद्ध है.'
- गौरतलब है कि अब तक की करीब 5-6 दफा कोर कमांडर लेवल में हुई बातचीत में दोनों देश पहले जैसी स्थिति को वापस लाने पर राजी हुए तो हैं, लेकिन चीन की ओर से जमीनी स्तर पर अपना वादा नहीं निभाया गया है.उल्टे उसने सीमा पर अपनी सैनिको की तादाद बढ़ाई.
- लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून को दोनो देशों के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 सैनिको ने सरहद की हिफाजत करते हुए जान दे दी वहीं चीन के भी झड़प में 45 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे. हालांकि चीन की ओर से कभी इस पर कुछ नहीं कहा गया है.
- कुछ दिन पहले ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लद्दाख की स्थिति को 1962 के संघर्ष के बाद 'सबसे गंभीर' बताया और कहा कि दोनों पक्षों की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अभी तैनात सुरक्षा बलों की संख्या भी 'अभूतपूर्व' है. (इनपुट भाषा से भी)
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