PNB घोटाला : नीरव मोदी के करीबी सुभाष शंकर को काहिरा से मुंबई लाई CBI

पंजाब नेशनल बैंक के 13 हज़ार करोड़ से ज्यादा के घोटाले में सुभाष शंकर भी आरोपी है.चार्जशीट में ये आरोपी क्रमांक 18 है.इसे वांछित आरोपी के रूप में दिखाया गया है क्योंकि इसने कभी भी जांच में भाग नहीं लिया. मामला खुलने से ठीक पहले वह देश छोड़कर चला गया था.सीबीआई ने सुभाष शंकर की 14 दिन की हिरासत मांगी है.

PNB घोटाला : नीरव मोदी के करीबी सुभाष शंकर को काहिरा से मुंबई लाई CBI

49 साल का सुभाष शंकर परब 2018 में नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के साथ भारत से भाग गया था.

नई दिल्ली:

PNB बैंक घोटाले (PNB Scam) के आरोपी नीरव मोदी (Nirav Modi) के करीबी सुभाष शंकर परब (Subhash Shankar Parab) को  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इजिप्ट की राजधानी काहिरा से मुंबई लेकर आई है. उसे विशेष विमान से लाया गया है. इसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी हुआ था. पंजाब नेशनल बैंक के 13 हज़ार करोड़ से ज्यादा के घोटाले में सुभाष शंकर भी आरोपी है.चार्जशीट में ये आरोपी क्रमांक 18 है.इसे वांछित आरोपी के रूप में दिखाया गया है क्योंकि इसने कभी भी जांच में भाग नहीं लिया. मामला खुलने से ठीक पहले वह देश छोड़कर चला गया था.सीबीआई ने सुभाष शंकर की 14 दिन की हिरासत मांगी है.

जांच के दौरान पता चला था कि सुभाष ही फर्जी एलओयू के लिए पीएनबी बैंक के साथ डील कर रहा था. परब के निर्देश पर दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें जमा भी किए गए. वह विदेशी बैंकों के साथ भी समन्वय कर रहा था.फंड रोटेशन पर इसका  पूर्ण नियंत्रण था, जिस दिन नीरव मोदी में देश छोड़ा था,उसी दिन इसने भी देश छोड़ दिया था. यह पहले दुबई मऔर फिर काहिरा में था. मामले से जुड़े कई मूल दस्तावेज अभी भी गायब हैं. एलओयू कैसे तैयार किए गए, इसकी जानकारी इससे लेनी है.आरोपी को आज गिरफ्तार कर लिया गया.

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दूसरी ओर, सुभाष शंकर परब के वकील ने मुवक्किल की ओर से दावा किया, 'मैं तो सिर्फ  कर्मचारी था.मैं एलओयू पर सही के लिए अधिकृत नहीं था. मैंने कभी भी बैंक को वसूली के लिए कोई निर्देश नहीं दिया. मैं एलओयू पर हस्ताक्षर करने में शामिल नहीं था. सभी सबूत दस्तावेजी प्रारूप में हैं, इसलिए  हिरासत की आवश्यकता नहीं है.सभी दस्तावेज बैंक या खुद जांच एजेंसी के पास हैं.न्यायिक हिरासत या कम से कम सीबीआई हिरासत दी जानी चाहिए.मैं सीबीआई की जांच में सहयोग करने को तैयार हूं.', 'मैं तो सिर्फ  कर्मचारी था.मैं एलओयू पर सही के लिए अधिकृत नहीं था. मैंने कभी भी बैंक को वसूली के लिए कोई निर्देश नहीं दिया. मैं एलओयू पर हस्ताक्षर करने में शामिल नहीं था. सभी सबूत दस्तावेजी प्रारूप में हैं, इसलिए  हिरासत की आवश्यकता नहीं है.सभी दस्तावेज बैंक या खुद जांच एजेंसी के पास हैं.न्यायिक हिरासत या कम से कम सीबीआई हिरासत दी जानी चाहिए.मैं सीबीआई की जांच में सहयोग करने को तैयार हूं.'सुभाष शंकर नीरव मोदी की एक कंपनी के डीजीएम था. सीबीआई ने नीरव मोदी पर सबूतों/गवाहों से छेड़छाड़ करने और अपने कुछ कर्मचारियों का अपहरण कर उसे काहिरा ले जाने का भी आरोप लगाया था. सीबीआई पहले ही नीरव मोदी, निशाल मोदी के साथ सुभाष शंकर के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.

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बता दें कि नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पीएनबी से धोखाधड़ी करके क्रेडिट सुविधा हासिल करके 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप हैं. घोटाला उजागर होने के बाद ये लोग देश छोड़कर भागने ने में कामयाब रहे थे.