अगले लोक सभा चुनावों में क्षेत्रीय दलों की भूमिका बेहद अहम हो सकती है... इनमें से कई दल मुस्लिम वोटों को अपने खाते में डालने के लिए खास रणनीति बना रहे हैं। चुनावी चहल-पहल के चलते ये दल तीसरा मोर्चा के अलावा कई अन्य समीकरणों की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। इसी के मद्देनजर, इन चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की क्या 'रणनीति' होगी, इसपर एनडीटीवी ने बात की पार्टी के वरिष्ठ सांसद और नेता सौगत रे से...
एनडीटीवी : चुनावों से पहले जो नए राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आ रहे हैं उसमें तृणमूल कांग्रेस अपने आप को कहां देखती है?
सौगत रे : जिस दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हुए, उसी दिन ममता बनर्जी ने एक फेडरल फ्रंट का आइडिया रखा था... हमें गैर−कांग्रेसी और गैर−भाजपाई पार्टियों को एकसाथ लाने के लिए चर्चा शुरू करनी है। हम एक नया विकल्प खड़ा कर सकते हैं। हम चाहते हैं की चर्चा अभी शुरू हो।
एनडीटीवी : क्या क्षेत्रीय दलों के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई है?
सौगत रे : बातचीत की प्रक्रिया औपचारिक तौर पर अभी शुरू नहीं हुई है लेकिन अनौपचारिक तौर पर बात होती रहती है। यह फ्रंट चुनाव के बाद बनेगा।
एनडीटीवी : क्या तृणमूल कांग्रेस कांग्रेस के साथ फिर 'बिज़नेस' कर सकती है... क्या एक नई राजनीतिक परिस्थिति में आप फिर साथ आ सकते हैं?
सौगत रे : इसपर मैं अभी टिप्पणी नहीं कर सकता। अभी हम कांग्रेस और बीजेपी से बराबर दूरी बनाए रखना चाहते हैं।
एनडीटीवी : क्या इसकी संभावना है कि आप बीजेपी के साथ जा सकते हैं?
सौगत रे : एक दम नहीं... आपको यह याद रखना होगा कि पश्चिम बंगाल में 27 फीसदी लोग मुसलमान हैं। बीजेपी, वह भी नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, कभी स्वीकार्य नहीं होगी। अकेले चुनाव लड़ेंगे। अगर ज़्यादा सीटें मिलेंगी तो एक रोल 'प्ले' करेंगे नए सरकार के गठन में...।
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