माधव सोलंकी: KHAM फार्मूले की बदौलत गुजरात में दिलाई थी गद्दी, बनाया ऐसा रिकॉर्ड जो मोदी-शाह भी नहीं तोड़ पाए!

पेशे से पत्रकार और वकील रह चुके माधव सिंह सोलंकी ने राज्य में पटेलों का सियासी वर्चस्व खत्म कर दिया था. वह पहली बार 1977 में कम समय के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. 1980 के चुनाव में जब कांग्रेस बहुमत से जीती तो उन्होंने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों के लिए आरक्षण लागू कर दिया.

माधव सोलंकी: KHAM फार्मूले की बदौलत गुजरात में दिलाई थी गद्दी, बनाया ऐसा रिकॉर्ड जो मोदी-शाह भी नहीं तोड़ पाए!

गुजरात के चार बार मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधव सिंह सोलंकी का निधन हो गया है.

खास बातें

  • गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी का निधन
  • 1980 में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ों को दिया था आरक्षण
  • KHAM फार्मूले से 182 सीटों में से 149 सीटें जीतकर बनाया था रिकॉर्ड
नई दिल्ली:

गुजरात (Gujarat) के चार बार मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता माधव सिंह सोलंकी (Madhav Sinh Solanki) का शनिवार (9 जनवरी) को निधन हो गया. वह आणंद जिले के बोरसाद के रहनेवाले थे लेकिन गांधीनगर में रहते थे. तीन साल पहले अपने ही जन्मदिन पर वो आखिरी बार सार्वजनिक तौर पर दिखाई दिए थे. केंद्र की नरसिम्हा राव सरकार में सोलंकी विदेश मंत्री और योजना मंत्री भी रह चुके थे. वह तीन बार गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके थे.

माधव सिंह सोलंकी राजनीति में आने से पहले एक पत्रकार थे. वह राज्य में KHAM सिद्धांत के जनक थे. 1980 के दशक में गुजरात में उन्होंने इसी फार्मूले के बल पर कांग्रेस के लिए एक नया वोट बैंक तैयार किया था. KHAM का मतलब Kshatriya, Harijan, Adivasi and Muslim (क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम) समाज से था, जो उस समय तक कांग्रेस के परंपरागत वोटर नहीं थे.

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सोलंकी ने अपनी राजनीतिक कुशलता के साथ 1980 के दशक में राज्य के इन चार वर्गों को जोड़ा और 1985 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई थी. 182 सदस्यों वाली गुजरात विधान सभा में तब कांग्रेस को अकेले 149 सीटों पर जीत मिली थी जो एक रिकॉर्ड है. राज्य में और देश में बीजेपी की लहर और नरेंद्र मोदी के करिश्माई चेहरे और अमित शाह जैसे राजनीति के चाणक्य के कुशल संयोग के बावजूद आजतक वह रिकॉर्ड नहीं टूट सका है.

पेशे से पत्रकार और वकील रह चुके माधव सिंह सोलंकी ने राज्य में पटेलों का सियासी वर्चस्व खत्म कर दिया था. वह पहली बार 1977 में कम समय के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. 1980 के चुनाव में जब कांग्रेस बहुमत से जीती तो उन्होंने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों के लिए आरक्षण लागू कर दिया. इसका राज्य में जबर्दस्त विरोध हुआ. वहां कई मौतें भी हुई थीं. सोलंकी को पटेल, बनिया, ब्राह्मण जातियों का विरोध झेलना पड़ा था.

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यहां तक कि 1981 में अनुसूचित जाति के लोगों पर अगड़ी जाति के हमले तेज हो गए थे. तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रातों-रात विशेष विमान से स्पेशल पुलिस फोर्स गुजरात भेजा था. सोलंकी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के करीबी नेताओं में एक थे.

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